बिजनौर में हरित आवरण का विस्तार: वन विभाग के प्रयासों का साकारात्मक परिणाम

बिजनौर। भारतीय वन सर्वेक्षण (FSI) रिपोर्ट 2022-23 में बिजनौर जनपद के हरित आवरण में 13.53 वर्ग किमी की वृद्धि दर्ज की गई है। यह वृद्धि वन विभाग, सामाजिक वानिकी प्रभाग, बिजनौर द्वारा चलाए गए व्यापक वृक्षारोपण अभियानों, जनसहभागिता बढ़ाने के प्रयासों और वन संरक्षण संबंधी नवाचारों का प्रत्यक्ष परिणाम है।
वन आच्छादन में सकारात्मक बदलाव
वर्ष 2021-22 में बिजनौर के वन क्षेत्र में 4.71 वर्ग किमी की कमी दर्ज की गई थी, जिससे वन विभाग के समक्ष यह चुनौती थी कि वन आवरण में गिरावट को कैसे रोका जाए और उसे पुनः बढ़ाया जाए। विभाग द्वारा अपनाई गई प्रभावी रणनीतियों और जनसहभागिता आधारित योजनाओं के चलते यह प्रयास सफल रहा, जिसका प्रमाण FSI रिपोर्ट 2022-23 में देखने को मिला, जहां 13.53 वर्ग किमी की वृृद्धि दर्ज हुई।
अगर वन श्रेणियों की बात करें तो:
- सघन वन में 0.66 वर्ग किमी की वृद्धि हुई।
- मध्यम सघन वन क्षेत्र में 23.03 वर्ग किमी की वृद्धि दर्ज की गई।
- खुले वन में 19.09 वर्ग किमी का इजाफा हुआ।
वन विभाग द्वारा उठाए गए प्रमुख कदम
1. वृक्षारोपण अभियानों में जनसहभागिता
बिजनौर वन विभाग ने ‘वृक्ष भंडारा’, ‘वृक्ष बारात’, ‘युवा वन’, ‘बाल वन’ और ‘देव वन’ जैसी अवधारणाओं के तहत पौधरोपण को जनांदोलन का रूप दिया। इसके तहत स्थानीय लोगों, किसानों और सरकारी विभागों को शामिल किया गया, जिससे वृक्षारोपण को सतत संरक्षण मिला।
2. ‘हर खेत पर मेड़, हर मेड़ पर पेड़’ अभियान
वन विभाग ने कृषकों को वृक्षारोपण में भाग लेने के लिए प्रेरित किया। इस अभियान के अंतर्गत किसानों को उनकी भूमि की मेड़ों पर पेड़ लगाने के लिए प्रोत्साहित किया गया, जिससे वन आवरण बढ़ने के साथ-साथ उनकी आर्थिक स्थिति भी सुदृढ़ हुई।
3. कार्बन फाइनेंस योजना का प्रचार-प्रसार
वन विभाग ने किसानों को पेड़ों को लम्बे समय तक संरक्षित रखने के लिए प्रेरित किया। कार्बन फाइनेंस योजना के तहत वृक्षारोपण को आर्थिक लाभ से जोड़कर किसानों को अतिरिक्त आय का साधन प्रदान किया गया।
4. पौध संरक्षण एवं अनुरक्षण पर विशेष ध्यान
वन विभाग ने वृक्षारोपण स्थलों पर ‘सोशल फेंसिंग’ (सामाजिक सुरक्षा) को बढ़ावा दिया, जिससे पौधों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। इसके साथ ही, विभागीय वृक्षारोपण स्थलों पर तारबाड़ और जैविक बाड़ की व्यवस्था की गई।
5. वन अपराध नियंत्रण
वन एवं वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए वन विभाग ने सतत पेट्रोलिंग अभियान चलाया। अवैध कटाई और शिकार में लिप्त अपराधियों की गिरफ्तारी कर उन्हें जेल में निरुद्ध करने और अभियोजन कार्यों को प्रभावी रूप से लागू करने पर विशेष बल दिया गया।
परिणाम और भविष्य की संभावनाएं
बिजनौर वन विभाग के प्रयासों ने वन संरक्षण और संवर्धन में एक नई दिशा दी है। भारतीय वन सर्वेक्षण रिपोर्ट में दर्शाई गई सकारात्मक वृद्धि से स्पष्ट है कि यदि इसी प्रकार योजनाबद्ध प्रयास जारी रहे, तो आने वाले वर्षों में हरित आवरण में और अधिक सुधार देखा जा सकता है।
वन विभाग की यह रणनीति केवल बिजनौर के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश के लिए एक प्रेरणादायक मॉडल बन सकती है। यदि अन्य जिलों में भी इसी तरह वृक्षारोपण को सामाजिक सहभागिता से जोड़ा जाए, तो राज्य के हरित आवरण में अभूतपूर्व वृद्धि हो सकती है।
वन संरक्षण केवल सरकारी विभागों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य भी है। बिजनौर वन विभाग के प्रयासों से यह स्पष्ट हो जाता है कि जब समाज और प्रशासन एक साथ मिलकर कार्य करते हैं, तो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं।












