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होलिका दहन के दौरान दलित व्यक्ति को जातिसूचक गालियों के साथ, जिंदा जलाने की कोशिश

होलिका दहन के दौरान दलित व्यक्ति को जातिसूचक गालियों के साथ, जिंदा जलाने की कोशिश

रिपोर्ट : अवनीश त्यागी 

नजीबाबाद। उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के नजीबाबाद थाना क्षेत्र में होलिका दहन के अवसर पर एक दलित व्यक्ति को जलती हुई होलिका में धक्का देने की सनसनीखेज घटना सामने आई है। पीड़ित की पत्नी द्वारा दी गई तहरीर के अनुसार, गांव के कुछ दबंगों ने जातिसूचक गालियां देते हुए उनके पति पर जानलेवा हमला किया और जलती हुई होलिका में धकेल दिया। गनीमत रही कि मौके पर मौजूद अन्य ग्रामीणों ने समय रहते उन्हें बचा लिया और अस्पताल पहुंचाया।

क्या है पूरा मामला?

मामला 13 मार्च 2025 की रात करीब 11:40 बजे का है, जब पीड़िता मंजू देवी अपने पति वेदप्रकाश के साथ होलिका दहन की रस्म में गेहूं की बालियां अर्पित करने गई थीं। तभी गांव के ही कुछ दबंग—निपेंद्र, संसार, और नौबहार का पुत्र ने पुरानी रंजिश के चलते उनके पति को पकड़ लिया और जातिसूचक गालियां देते हुए जबरन जलती हुई होलिका में धक्का दे दिया। हमलावरों ने कथित तौर पर कहा, “साले चमार, तेरा किस्सा ही खत्म कर देते हैं।”

गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती

पीड़िता की चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और किसी तरह जलती हुई होली से पीड़ित वेदप्रकाश को बाहर निकाला। गंभीर रूप से झुलसे पीड़ित को तत्काल अस्पताल भेजा गया, जहां उनकी हालत चिंताजनक बनी हुई है।

पुलिस कार्रवाई पर सवाल

पीड़िता ने नजीबाबाद थाना प्रभारी को लिखित शिकायत दी है और आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। इस मामले पर जब थानाध्यक्ष कोतवाली नजीबाबाद से बात की गई, तो उन्होंने बताया कि “हमें आज प्रार्थना पत्र मिला है, और मामले की जांच की जा रही है। जांच के बाद आगे की कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।” हालांकि, अब तक किसी की गिरफ्तारी की कोई सूचना नहीं है।

जातिगत हिंसा पर बढ़ते सवाल

यह घटना न केवल एक जघन्य अपराध है, बल्कि यह भी दिखाती है कि आज भी समाज में जातिगत भेदभाव और अत्याचार किस कदर व्याप्त है। होली जैसे त्योहार पर, जब समाज में एकता और भाईचारे का संदेश दिया जाता है, तब ऐसी घटनाएं पूरे तंत्र पर सवाल खड़े करती हैं।

न्याय की मांग

पीड़िता और उसके परिवार ने स्थानीय प्रशासन से अपील की है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। यह मामला अनुसूचित जाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज किया जा सकता है, जिससे आरोपियों को कड़ी सजा मिल सके।

अब देखना यह होगा कि पुलिस की जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है और क्या पीड़ित परिवार को समय पर न्याय मिल पाएगा?

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