बांदा में पत्रकार पर हमला: दबंगई और प्रशासन की भूमिका पर सवाल

BANDA. बांदा जिले के एक गांव में दिनदहाड़े हुए गोलीकांड ने सनसनी फैला दी है। इस घटना में दबंगों ने पत्रकार रामलाल जयंत पर हमला कर उन्हें गंभीर रूप से घायल कर दिया। घायल अवस्था में उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनकी स्थिति नाजुक बनी हुई है।
घटना का विवरण
रामलाल जयंत, जो वर्तमान में गांव के प्रधान भी हैं, पर दो गोलियां चलाई गईं। जयंत का आरोप है कि हमलावरों को पुलिस का संरक्षण प्राप्त है। यह हमला कोई नई घटना नहीं है; इससे पहले भी उन पर कई बार जानलेवा हमले हो चुके हैं। लेकिन पुलिस द्वारा इन मामलों में अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है, जिससे प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

पुलिस की कार्रवाई और बयान
घटना के तुरंत बाद पुलिस ने एक हमलावर को गिरफ्तार कर लिया है। अतर्रा के क्षेत्राधिकारी (CO) सौरभ सिंह ने इसे आपसी रंजिश का नतीजा बताया है। उन्होंने कहा, “आपसी कहासुनी के बाद गोली चलाई गई। एक अभियुक्त को गिरफ्तार किया गया है, और मामले में विधिक कार्रवाई जारी है।”
पीड़ित का आरोप
घायल पत्रकार रामलाल जयंत ने आरोप लगाया है कि हमलावरों और पुलिस के बीच मिलीभगत है। उनका कहना है कि पुलिस ने उनके पिछले हमलों को गंभीरता से नहीं लिया, जिससे दबंगों का मनोबल बढ़ा।
पृष्ठभूमि और सवाल
यह घटना सिर्फ एक व्यक्ति पर हमला नहीं है, बल्कि यह उस व्यवस्था पर सवाल उठाती है, जो पत्रकारों और अन्य जनप्रतिनिधियों को सुरक्षा देने में नाकाम साबित हो रही है। रामलाल जयंत न केवल पत्रकार हैं, बल्कि प्रधान के रूप में भी अपने क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। ऐसे में, बार-बार उन पर हुए हमले कहीं न कहीं उनकी सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों को दबाने की साजिश की ओर इशारा करते हैं।
न्याय की मांग
यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि दबंगों के सामने कानून कितना कमजोर हो सकता है। पत्रकारों पर हमले न केवल उनकी सुरक्षा, बल्कि स्वतंत्र पत्रकारिता और लोकतंत्र पर भी हमला हैं। रामलाल जयंत के मामले में यदि न्याय नहीं हुआ, तो यह अन्य पत्रकारों और जनप्रतिनिधियों के लिए खतरे का संकेत हो सकता है।
सरकार और प्रशासन को चाहिए कि वे इस घटना की निष्पक्ष जांच कराएं और दोषियों को सख्त सजा दिलाने के साथ ही पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करें।












