DM Umesh Pratap Singh Strict Action: बिजनौर में सीएम डैशबोर्ड रैंकिंग पर चला डीएम का चाबुक, लापरवाह अफसरों पर गिरेगी गाज!
रिपोर्ट: अवनीश त्यागी | TargetTvLive बिजनौर (उत्तर प्रदेश)।
सार (Highlights):
- सख्त तेवर: मुख्यमंत्री की प्राथमिकताओं और सीएम डैशबोर्ड के कार्यों में ढिलाई पर बिजनौर डीएम उमेश प्रताप सिंह का सख्त रुख।
- स्पष्टीकरण तलब: समीक्षा बैठक में अनुपस्थित रहने पर दुग्ध विकास अधिकारी और सेतु निगम के अफसरों को थमाया नोटिस।
- रैंडम चेकिंग कमेटी: विकास परियोजनाओं की गुणवत्ता आंकने के लिए गठित होगी विशेष जांच समिति; दिसंबर 2026 तक सभी निर्माण कार्य पूरे करने की डेडलाइन।
- रैंकिंग सुधार की हिदायत: जिले के 84 समीक्षा घटकों में से डी और सी श्रेणी वाले विभागों को तुरंत सुधार के सख्त निर्देश।
बिजनौर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ड्रीम प्रोजेक्ट्स और जन-कल्याणकारी प्राथमिकताओं को लेकर बिजनौर जिला प्रशासन पूरी तरह एक्शन मोड में आ गया है। जिलाधिकारी उमेश प्रताप सिंह ने स्पष्ट संदेश दिया है कि ‘सीएम डैशबोर्ड’ और विकास कार्यों की समीक्षा में किसी भी प्रकार की लापरवाही या सुस्ती बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जिन विभागों का प्रदर्शन निराशाजनक है, उनके अधिकारियों पर गाज गिरना तय है।
कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में डीएम उमेश प्रताप सिंह ने सितंबर 2026 तक की प्रगति और जिला अनुश्रवण पुस्तिका की गहन पड़ताल की।
अनुपस्थित अफसरों से मांगा जवाब, ‘A Grade’ से नीचे प्रदर्शन स्वीकार्य नहीं
बैठक की शुरुआत में ही जिलाधिकारी का कड़ा रुख देखने को मिला। समीक्षा बैठक से गायब रहने वाले दुग्ध विकास अधिकारी एवं सेतु निगम के अधिकारियों के खिलाफ सख्त कदम उठाते हुए डीएम ने तत्काल स्पष्टीकरण (Show Cause Notice) तलब करने के निर्देश जारी कर दिए।
डीएम ने सख्त हिदायत देते हुए कहा:
“शासकीय कार्यों में अनुशासनहीनता और लापरवाही अक्षम्य है। विभागीय योजनाओं का क्रियान्वयन धरातल पर दिखना चाहिए और जिले में किसी भी विभाग की ग्रेडिंग ‘ए-श्रेणी’ (A Grade) से नीचे नहीं आनी चाहिए।”
84 योजनाओं का एक्स-रे: 4 विभाग ‘D’ तो 4 ‘C’ ग्रेड में अटके
बैठक में सितंबर 2026 की प्रगति रिपोर्ट का विस्तृत विश्लेषण किया गया। बिजनौर जिले में कुल 84 योजनाओं व परियोजनाओं की रैंकिंग और मुख्य प्रदर्शन घटकों (KPIs) की गहन समीक्षा की गई। इस दौरान सामने आए रिपोर्ट कार्ड के अनुसार 59 योजनाओं व परियोजनाओं ने ‘ए-श्रेणी’ हासिल कर संतोषजनक प्रदर्शन किया है, जिन्हें इसी निरंतरता को बनाए रखने का निर्देश दिया गया। वहीं 4 योजनाएं ‘बी-श्रेणी’ में दर्ज की गईं, जिनमें कार्य प्रदर्शन सुधारने की गुंजाइश बताई गई।
इसके विपरीत, 4 योजनाओं को ‘सी-श्रेणी’ तथा 4 योजनाओं को ‘डी-श्रेणी’ प्राप्त होने पर जिलाधिकारी ने गहरा असंतोष व्यक्त किया। उन्होंने सी और डी ग्रेड पाने वाले विभागीय अधिकारियों को आड़े हाथों लेते हुए सख्त अल्टीमेटम दिया कि वे अपनी कार्यशैली में तुरंत सुधार लाएं और मुख्य प्रदर्शन घटकों (KPIs) को ध्यान में रखते हुए रणनीति बनाकर ग्राउंड स्तर पर ठोस नतीजे पेश करें। इसके अतिरिक्त, जिले की 13 योजनाएं व परियोजनाएं ‘नॉट एप्लीकेबल’ (N/A) की श्रेणी में रहीं।
रैंडम जांच के लिए बनेगी स्पेशल कमेटी, 3-स्टेज फोटो अनिवार्य
जिले में चल रहे निर्माण कार्यों (PWD, CNDS, यूपी प्रोजेक्ट्स लिमिटेड आदि) की गुणवत्ता और गति पर नजर रखने के लिए एक विशेष समिति का गठन किया जाएगा जो परियोजनाओं की रैंडम भौतिक जांच (Random Quality Audit) करेगी।
निर्माण परियोजनाओं के लिए नए सख्त नियम:
- दिसंबर 2026 की डेडलाइन: सभी निर्माण कार्य दिसंबर 2026 तक हर हाल में पूरे कर उन्हें चालू स्थिति (Operational Status) में लाया जाए।
- 3-स्टेज फोटोग्राफी: पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए:
- कार्य शुरू होने से पहले की तस्वीर।
- निर्माण के दौरान (In-Progress) की तस्वीर।
- कार्य पूर्ण होने के बाद की स्पष्ट तस्वीर अनिवार्य रूप से अपलोड और प्रस्तुत करनी होगी।
बिजली, छात्रवृत्ति और आवास योजनाओं का ग्राउंड रियलिटी टेस्ट
डीएम ने दशमोत्तर छात्रवृत्ति, दिव्यांगजन कल्याण, अल्पसंख्यक एवं पिछड़ा वर्ग छात्रवृत्ति और प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) की बिंदुवार समीक्षा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि पात्र लाभार्थियों तक योजनाओं का लाभ पारदर्शी तरीके से पहुंचे, ताकि बिजनौर जिले में किसी तरह की अनियमितता या जन-शिकायत की गुंजाइश न रहे।
वहीं, विद्युत आपूर्ति की समीक्षा के दौरान संबंधित अभियंता द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में 18 घंटे और शहरी क्षेत्रों में 24 घंटे निर्बाध बिजली देने का दावा किया गया। इस पर जिलाधिकारी ने दो टूक कहा कि कागजी आंकड़ों पर भरोसा न करके आम जनता और विभिन्न स्तरों से फीडबैक (Ground Feedback) लेकर बिजली आपूर्ति की वास्तविक स्थिति को सत्यापित कराया जाएगा।
निष्कर्ष (TargetTvLive टेक):
बिजनौर प्रशासन द्वारा सीएम डैशबोर्ड को लेकर अपनाया गया यह कड़ा रुख जिले में विकास कार्यों की रफ्तार को नई दिशा देगा। जिलाधिकारी की सीधी चेतावनी के बाद अब देखना यह होगा कि निचले स्तर के अधिकारी अपनी कार्यशैली में कितना सुधार ला पाते हैं और दिसंबर 2026 की डेडलाइन तक अटके हुए प्रोजेक्ट्स पूरे हो पाते हैं या नहीं।












