बिजनौर कोर्ट परिसर से उठी हरियाली की अलख: न्यायाधीशों ने लगाए पौधे, बच्चों को सिखाया पर्यावरण बचाने का मंत्र

विश्व पर्यावरण दिवस पर डीएलएसए की अनोखी पहल, पौधारोपण के साथ कानूनी जागरूकता का भी दिया संदेश
बिजनौर। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर बिजनौर में पर्यावरण संरक्षण को लेकर एक प्रेरणादायक पहल देखने को मिली। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) के नेतृत्व में जनपद न्यायालय परिसर और विद्यालयों में पौधारोपण एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य केवल पौधे लगाना नहीं, बल्कि समाज को यह संदेश देना था कि पर्यावरण की रक्षा हर नागरिक की जिम्मेदारी है।
माननीय जनपद न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष संजय कुमार सप्तम के मार्गदर्शन में आयोजित कार्यक्रम में न्यायिक अधिकारियों, अधिवक्ताओं, कर्मचारियों और छात्रों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। पूरे दिन पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता और हरियाली बढ़ाने को लेकर सकारात्मक माहौल बना रहा।
कोर्ट परिसर में लगे आम, जामुन और आँवले के पौधे

विश्व पर्यावरण दिवस पर जनपद न्यायालय परिसर में फलदार और छायादार पौधों का रोपण किया गया। आम, जामुन, अमरूद और आँवला जैसे पौधे लगाकर हरित वातावरण को बढ़ावा देने का संदेश दिया गया।
इस अवसर पर जनपद न्यायाधीश संजय कुमार सप्तम ने कहा कि तेजी से बदलते पर्यावरणीय हालात और बढ़ते प्रदूषण के बीच वृक्षारोपण समय की सबसे बड़ी जरूरत बन गया है। उन्होंने सभी लोगों से अपने घरों, कार्यालयों और आसपास के क्षेत्रों में अधिक से अधिक पौधे लगाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में न्यायिक अधिकारी, अधिवक्ता और न्यायालय कर्मचारी बड़ी संख्या में मौजूद रहे।
बच्चों को बताया—पेड़ ही भविष्य की सबसे बड़ी पूंजी
डीएलएसए की ओर से बिजनौर के आदर्श शिक्षा पब्लिक स्कूल में विधिक जागरूकता एवं पर्यावरण संरक्षण शिविर का आयोजन किया गया। यहां सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण स्वाति चन्द्रा ने छात्र-छात्राओं को पर्यावरण संरक्षण के महत्व से अवगत कराया।
उन्होंने बच्चों से कहा कि यदि आज पेड़ नहीं बचाए गए तो आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ हवा और स्वस्थ वातावरण मिलना मुश्किल हो जाएगा। उन्होंने विद्यार्थियों को अधिक से अधिक पौधे लगाने, जल संरक्षण करने और अपने आसपास स्वच्छता बनाए रखने का संकल्प दिलाया।
गीले और सूखे कचरे को अलग रखने की दी सीख
कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के वैज्ञानिक सहायक प्रमोद सेमवाल ने छात्रों को पर्यावरण संरक्षण के वैज्ञानिक पहलुओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि घरों और विद्यालयों में गीले एवं सूखे कचरे को अलग-अलग रखना पर्यावरण बचाने की दिशा में एक छोटा लेकिन बेहद प्रभावी कदम है।
उन्होंने सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के महत्व को समझाते हुए बताया कि यदि हर नागरिक अपनी जिम्मेदारी निभाए तो प्रदूषण की समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
पेंटिंग प्रतियोगिता में बच्चों ने रंगों से उकेरी प्रकृति की तस्वीर
कार्यक्रम के दौरान आयोजित पेंटिंग प्रतियोगिता आकर्षण का केंद्र रही। बच्चों ने प्रकृति, स्वच्छता और हरियाली विषय पर शानदार चित्र बनाकर पर्यावरण के प्रति अपनी सोच को अभिव्यक्त किया। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित भी किया गया।
प्रतियोगिता ने यह साबित कर दिया कि नई पीढ़ी पर्यावरण संरक्षण को लेकर न केवल जागरूक है बल्कि उसे बचाने के लिए गंभीर भी है।
सिर्फ पौधारोपण नहीं, सोच बदलने का अभियान
बिजनौर में आयोजित यह कार्यक्रम केवल औपचारिकता नहीं था। इसके माध्यम से समाज को यह संदेश देने की कोशिश की गई कि पर्यावरण संरक्षण किसी एक विभाग या संस्था का काम नहीं, बल्कि हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब न्यायपालिका, प्रशासन, विद्यालय और आम नागरिक एक मंच पर आकर पर्यावरण बचाने का संकल्प लेते हैं, तब ऐसे अभियान वास्तविक बदलाव की नींव रखते हैं।
हर नागरिक लगाए एक पौधा, तभी सफल होगा पर्यावरण संरक्षण का मिशन
विश्व पर्यावरण दिवस पर बिजनौर से निकला यह संदेश दूर तक जाने वाला है। बढ़ती गर्मी, घटते जलस्तर और प्रदूषण जैसी चुनौतियों के बीच वृक्षारोपण और पर्यावरण जागरूकता ही भविष्य को सुरक्षित बनाने का सबसे प्रभावी रास्ता है।
यदि हर व्यक्ति वर्ष में कम से कम एक पौधा लगाकर उसकी देखभाल करने का संकल्प ले, तो पर्यावरण संरक्षण का सपना हकीकत में बदल सकता है।
अवनीश त्यागी
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