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“फाइलों में चमक रहा विकास, जमीन पर क्यों नहीं दिख रहा असर? बिजनौर में मंत्री की बैठक के बाद उठे बड़े सवाल”

बिजनौर में विकास की समीक्षा या सिर्फ औपचारिकता? मंत्री की बैठक के बाद उठे बड़े सवाल, धरातल पर कब दिखेगा असर!

फाइलों में तेज विकास, लेकिन जमीनी हकीकत क्या कहती है? संचारी रोग अभियान से लेकर कृषि योजनाओं तक कई दावों पर सवाल
रिपोर्ट: अवनीश त्यागी | TargetTvLive

बिजनौर। जनपद में विकास कार्यों और जनकल्याणकारी योजनाओं की प्रगति को लेकर गुरुवार को कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक में उत्तर प्रदेश सरकार के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल ने अधिकारियों को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि विकास कार्यों में किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने निर्माणाधीन परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने, योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंचाने तथा शिकायतों के त्वरित निस्तारण पर विशेष जोर दिया।

बैठक में सड़क, पेयजल, बिजली, स्वास्थ्य, शिक्षा, सिंचाई, कृषि, नगर विकास, ग्रामीण विकास और समाज कल्याण समेत विभिन्न विभागों की योजनाओं की समीक्षा की गई। अधिकारियों ने अपनी-अपनी विभागीय उपलब्धियों और प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत कीं। लेकिन बैठक खत्म होने के बाद एक बार फिर वही पुराना सवाल चर्चा में है—क्या समीक्षा बैठकों से वास्तव में विकास की तस्वीर बदल रही है या यह प्रक्रिया केवल प्रशासनिक औपचारिकता बनकर रह गई है?

विकास की असली परीक्षा बैठक कक्ष में नहीं, गांव और खेतों में

सरकारी बैठकों में अक्सर विकास कार्यों की प्रगति प्रतिशत, उपलब्धियों के आंकड़े और योजनाओं की सफलता की तस्वीर प्रस्तुत की जाती है। लेकिन विकास का वास्तविक मूल्यांकन तब होता है जब आम नागरिक को उसका लाभ महसूस हो।

जनपद में अनेक ऐसी योजनाएं हैं जिनकी कागजी प्रगति और जमीनी स्थिति के बीच अंतर की शिकायतें समय-समय पर सामने आती रही हैं। यही कारण है कि समीक्षा बैठकों के साथ-साथ फील्ड निरीक्षण की आवश्यकता लगातार महसूस की जा रही है।

संचारी रोग अभियान बना उदाहरण, बैठकें हुईं लेकिन असर कितना?

पिछले माह जनपद में संचारी रोग नियंत्रण अभियान को लेकर लगातार बैठकें आयोजित हुईं। स्वास्थ्य, नगर निकाय और पंचायत विभागों को विशेष जिम्मेदारियां सौंपी गईं। कागजों पर अभियान व्यापक दिखाई दिया, लेकिन कई क्षेत्रों में नालियों की सफाई, जलभराव की समस्या, मच्छर नियंत्रण और जनजागरूकता अभियान का प्रभाव अपेक्षित स्तर पर नजर नहीं आया।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि अभियान की वास्तविक मॉनिटरिंग होती तो परिणाम और बेहतर दिखाई देते। इससे यह सवाल भी खड़ा होता है कि क्या विभागीय रिपोर्टें वास्तविक स्थिति को पूरी तरह दर्शा रही हैं?

कृषि विकास योजनाओं की फसल आखिर कहां?

बैठक में कृषि विभाग की योजनाओं की भी समीक्षा की गई। किसानों को आधुनिक तकनीक, अनुदान, प्रशिक्षण और विभिन्न सरकारी योजनाओं से जोड़ने के दावे किए गए। लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में कई किसान आज भी इन योजनाओं की पहुंच और प्रभाव को लेकर सवाल उठाते दिखाई देते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि योजनाएं प्रभावी ढंग से लागू हो रही हैं तो उसका असर खेतों, उत्पादन और किसानों की आय में स्पष्ट रूप से दिखाई देना चाहिए। केवल विभागीय प्रस्तुतियों से कृषि विकास की वास्तविक तस्वीर सामने नहीं आती।

क्या प्रभारी मंत्री को करनी चाहिए जमीनी पड़ताल?

प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि समीक्षा बैठकें आवश्यक हैं, लेकिन उनकी उपयोगिता तभी साबित होती है जब उनके बाद धरातल पर सत्यापन भी हो। प्रभारी मंत्री और वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा औचक निरीक्षण, गांवों का दौरा और योजनाओं की मौके पर समीक्षा विकास कार्यों की वास्तविक स्थिति को सामने ला सकती है।

यदि जनप्रतिनिधि केवल अधिकारियों की प्रस्तुतियों पर निर्भर रहेंगे तो योजनाओं की खामियां और जमीनी समस्याएं दबकर रह सकती हैं। वहीं प्रत्यक्ष निरीक्षण जवाबदेही बढ़ाने का प्रभावी माध्यम माना जाता है।

अधिकारियों को दिए गए ये प्रमुख निर्देश

– विकास कार्य समय सीमा में पूरे किए जाएं।
– निर्माण कार्यों की गुणवत्ता से समझौता न हो।
– शिकायतों का त्वरित और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण किया जाए।
– अधिकारी नियमित फील्ड भ्रमण करें।
– योजनाओं का लाभ पात्र व्यक्तियों तक पहुंचना सुनिश्चित किया जाए।
– निर्माणाधीन परियोजनाओं को शीघ्र पूरा किया जाए।

जनता के बीच सबसे बड़ा सवाल

बिजनौर में विकास कार्यों को लेकर आयोजित यह समीक्षा बैठक प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण जरूर है, लेकिन इसकी सफलता का वास्तविक आकलन आने वाले महीनों में होगा। यदि सड़कें बेहतर हों, स्वास्थ्य सेवाएं सुधरें, किसानों को लाभ मिले, गांवों में योजनाओं का असर दिखाई दे और शिकायतों का समाधान हो, तभी बैठक के निर्देश सार्थक माने जाएंगे।

फिलहाल जनता के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह समीक्षा बैठक भी पिछली बैठकों की तरह फाइलों तक सीमित रहेगी, या फिर इस बार विकास की तस्वीर वास्तव में जमीन पर बदलती नजर आएगी?

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