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गुरुगांव देवी मंदिर में 22 मई को होगी बाबा नीम करौली मूर्ति स्थापना, मंत्री दयाशंकर सिंह समेत कई बड़े नेता रहेंगे मौजूद

  Farrukhabad News:

गुरुगांव देवी मंदिर में 22 मई को होगी बाबा नीम करौली मूर्ति स्थापना, मंत्री दयाशंकर सिंह समेत कई बड़े नेता रहेंगे मौजूद

तीन दिवसीय धार्मिक-राजनीतिक कार्यक्रम को लेकर तैयारियां तेज, क्षत्रिय एकता अभियान पर भी गरजे राघवेन्द्र सिंह राजू

फर्रुखाबाद | TargetTvLive | रिपोर्ट: ओमप्रकाश चौहान

फर्रुखाबाद में आगामी 22 मई से शुरू होने वाला बाबा नीम करौली मूर्ति स्थापना महोत्सव अब धार्मिक आयोजन के साथ-साथ सामाजिक और राजनीतिक चर्चा का भी बड़ा केंद्र बनता जा रहा है। गुरुगांव देवी मंदिर परिसर में आयोजित होने वाले इस तीन दिवसीय कार्यक्रम में प्रदेश सरकार के कई दिग्गज नेताओं और विभिन्न सामाजिक संगठनों के पदाधिकारियों की मौजूदगी रहने वाली है।

अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के राष्ट्रीय महामंत्री राघवेन्द्र सिंह राजू ने बुधवार को फर्रुखाबाद प्रवास के दौरान यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 22 मई को बाबा नीम करौली की मूर्ति स्थापना की जाएगी, जबकि 24 मई को ऊर्जा मंत्री कैलाश राजपूत द्वारा मूर्ति का अनावरण किया जाएगा। कार्यक्रम में प्रदेश के परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह की मौजूदगी भी विशेष आकर्षण मानी जा रही है।

होटल राजपूताना में हुई रणनीतिक बैठक

फर्रुखाबाद प्रवास के दौरान होटल राजपूताना बढ़पुर में आयोजित बैठक में राघवेन्द्र सिंह राजू ने संगठन के आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा साझा की। उन्होंने बताया कि 16 जून 2026 को जबलपुर स्थित मध्य विद्यालय में समीक्षा बैठक आयोजित होगी, जिसमें संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व सांसद कुंवर हरिवंश सिंह शामिल रहेंगे। इसके बाद 17 जून को मध्य प्रदेश के शहडोल में आयोजित कार्यक्रम में भी राष्ट्रीय नेतृत्व की मौजूदगी रहेगी।

राजू ने दावा किया कि हाल ही में जौनपुर में आयोजित कार्यक्रम को भारी जनसमर्थन मिला और अब संगठन “राष्ट्रहित में राजपूत क्षत्रिय एकीकरण अभियान” को और तेज करेगा।

“क्षत्रियों को वोट राजनीति की प्रयोगशाला बनाया गया”

अपने संबोधन में राघवेन्द्र सिंह राजू ने कहा कि देश की राजनीति में क्षत्रिय समाज को लंबे समय तक जातीय समीकरणों के तहत विभाजित किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक साजिशों के जरिए समाज को बांटने का प्रयास किया गया, जिससे सामाजिक शक्ति कमजोर हुई।

उन्होंने कहा कि वर्ण व्यवस्था के दौर से ही समाज की संरचना विकसित हुई, लेकिन समय के साथ क्षत्रिय समाज को सबसे अधिक विभाजित किया गया। अब जरूरत सामूहिक एकता और राजनीतिक भागीदारी की है।

“उसूलों पर आंच आए तो टकराना जरूरी”

राजू ने अपने संबोधन में कहा कि समाज को अहंकार और आपसी मतभेद छोड़कर संगठित होना होगा। उन्होंने कहा कि सत्ता और संगठन में उचित भागीदारी हर समाज का अधिकार है।

उन्होंने अपनी चर्चित पुस्तक “फिर इतिहास लौटा” का जिक्र करते हुए कहा कि इतिहास गवाह है कि जब-जब समाज ने एकजुट होकर जवाब दिया, तब बदलाव संभव हुआ।

22 से 24 मई तक चलेगा भव्य आयोजन

बाबा नीम करौली मूर्ति स्थापना कार्यक्रम 22, 23 और 24 मई तक चलेगा। आयोजकों के अनुसार धार्मिक अनुष्ठान, भजन-कीर्तन, सामाजिक बैठकें और जनसंवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और समाज के लोगों के पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।

कार्यक्रम को लेकर मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में तैयारियां तेज कर दी गई हैं। स्थानीय प्रशासन भी भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सतर्क नजर आ रहा है।

राजनीतिक और सामाजिक संदेश दोनों

विशेषज्ञों की मानें तो यह आयोजन केवल धार्मिक कार्यक्रम नहीं बल्कि सामाजिक शक्ति प्रदर्शन और आगामी राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है। प्रदेश के मंत्रियों और विभिन्न जिलों से आने वाले नेताओं की मौजूदगी इस कार्यक्रम को और अधिक चर्चित बना रही है।

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