“काली पट्टी में परीक्षा ड्यूटी: कैशलेस इलाज से वंचित शिक्षणेत्तर कर्मचारियों का फूटा गुस्सा, बोर्ड परीक्षा के बीच सरकार को खुली चुनौती”

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📍 बिजनौर से बड़ी खबर: परीक्षा ड्यूटी पर विरोध का अनोखा तरीका
उत्तर प्रदेश के सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षणेत्तर कर्मचारियों का आक्रोश अब खुलकर सामने आ गया है। कैशलेस चिकित्सा सुविधा की मांग को लेकर कर्मचारी बोर्ड परीक्षा जैसे संवेदनशील कार्य के दौरान भी बांह पर काली पट्टी बांधकर ड्यूटी कर रहे हैं। विरोध का यह सिलसिला लगातार आठवें दिन भी जारी रहा, जिससे शिक्षा विभाग और सरकार पर दबाव बढ़ता दिख रहा है।
कर्मचारियों का स्पष्ट कहना है कि जब तक कैशलेस चिकित्सा सुविधा का शासनादेश जारी नहीं किया जाएगा, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा।
क्या है पूरा विवाद? शिक्षकों को सुविधा, कर्मचारियों को नहीं
शिक्षणेत्तर कर्मचारियों का आरोप है कि सरकार ने कैशलेस चिकित्सा सुविधा के आदेश में शिक्षकों को शामिल कर लिया, लेकिन शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को बाहर रखा गया।
संघ के जिलाध्यक्ष मुकेश सिन्हा और जिला मंत्री योगेश कुमार ने कहा:
“प्रदेश नेतृत्व के आवाहन पर जनपद के सभी परीक्षा केंद्रों पर कर्मचारी काली पट्टी बांधकर सरकार की कर्मचारी विरोधी नीति का विरोध कर रहे हैं।”
उनका कहना है कि यह सिर्फ चिकित्सा सुविधा का मुद्दा नहीं बल्कि सम्मान और समान अधिकार का प्रश्न बन गया है।
कई परीक्षा केंद्रों पर दिखा विरोध का असर
बिजनौर जिले के कई प्रमुख परीक्षा केंद्रों पर कर्मचारियों ने काली पट्टी बांधकर परीक्षा कार्य किया, जिनमें शामिल हैं:
कन्या इंटर कॉलेज, धामपुर
यशवीर सिंह, लाल सिंह, सुमित शर्मा, आर्यन राजपूत, दिनेश कुमार, राकेश कुमार, सुनीता, रूबी, ललित कुमार, सचिन कुमार आदि
मूर्ति देवी कन्या इंटर कॉलेज, नजीबाबाद
प्रदीप बडोला, राजेन्द्र कुमार, रोहित कुमार सहित कई कर्मचारी
आरजेपी इंटर कॉलेज, बिजनौर
राजेन्द्र कुमार, अनुराग भारद्वाज, अंकुश कुमार, अनिल कुमार, अरुण कुमार, किरणपाल, अवधेश कुमार
राजा हरवंश सिंह इंटर कॉलेज, हल्दौर
पवित्र कुमार के नेतृत्व में कर्मचारियों का विरोध प्रदर्शन
कर्मचारियों का बड़ा आरोप: “सरकार कर रही है लगातार उपेक्षा”
शिक्षणेत्तर कर्मचारियों का कहना है कि:
- उनकी कई मांगें लंबे समय से लंबित हैं
- सरकार उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं ले रही
- कैशलेस चिकित्सा जैसी बुनियादी सुविधा से वंचित रखना अन्याय है
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द आदेश जारी नहीं हुआ तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
विश्लेषण: परीक्षा के बीच विरोध से सरकार पर बढ़ेगा दबाव
विशेषज्ञों का मानना है कि:
- बोर्ड परीक्षा के दौरान विरोध करना सरकार के लिए बड़ा संदेश है
- इससे प्रशासनिक तंत्र पर सीधा प्रभाव पड़ सकता है
- अगर मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन प्रदेशव्यापी रूप ले सकता है
शिक्षा व्यवस्था में शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में उनकी नाराजगी से परीक्षा व्यवस्था और स्कूल प्रशासन दोनों प्रभावित हो सकते हैं।
❗ बड़ा सवाल: क्या सरकार जल्द जारी करेगी कैशलेस चिकित्सा का आदेश?
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि:
- क्या सरकार शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की मांग मानेगी?
- क्या कैशलेस चिकित्सा सुविधा सभी कर्मचारियों को मिलेगी?
- या फिर आंदोलन और बड़ा रूप लेगा?
फिलहाल कर्मचारी स्पष्ट कर चुके हैं—“आदेश नहीं, तो विरोध जारी रहेगा।”
निष्कर्ष
बिजनौर से शुरू हुआ यह विरोध सिर्फ एक जिले तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे उत्तर प्रदेश में कर्मचारियों के असंतोष का संकेत बन चुका है। अगर समय रहते समाधान नहीं हुआ तो यह आंदोलन सरकार के लिए बड़ा प्रशासनिक और राजनीतिक मुद्दा बन सकता है।











