64 दिन से उबल रहा अमरोहा! ‘जहरीली’ हो गई बगद नदी, हजारों किसानों का विस्फोटक प्रदर्शन, सरकार को दी निर्णायक चेतावनी

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अमरोहा, 22 फरवरी। अमरोहा के गजरौला क्षेत्र में प्रदूषण के खिलाफ किसानों का गुस्सा अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। नाईपुरा और बगद नदी के आसपास के गांवों के किसान पिछले 64 दिनों से अनिश्चितकालीन धरने पर डटे हैं, लेकिन जब सुनवाई नहीं हुई तो रविवार को आंदोलन ने विस्फोटक रूप ले लिया।
धरना स्थल शहबाजपुर डोर पर हजारों किसानों ने ट्रैक्टर-ट्रालियों के साथ पहुंचकर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और कैमिकल फैक्ट्रियों के पुतले जलाए और सरकार-प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
किसानों का आरोप है कि गजरौला के रासायनिक कारखानों से निकलने वाले जहरीले कचरे ने सदानीरा बगद नदी को ‘मृत नदी’ बना दिया है।
‘जीवनदायिनी’ से ‘जहर की धारा’ बनी नदी
किसानों के अनुसार:
- बगद नदी का पानी पूरी तरह जहरीला हो चुका है
- भूमिगत जल भी प्रदूषित हो गया है
- मछलियां और जलीय जीव समाप्त हो चुके हैं
- फसलें नष्ट हो रही हैं
- मवेशी और ग्रामीण गंभीर बीमारियों, यहां तक कि कैंसर से प्रभावित हो रहे हैं
किसानों ने दावा किया कि कैमिकल प्रदूषण का असर अब कृषि चक्र पर भी पड़ रहा है।
👉 आम के बागों में फूल सूख रहे हैं
👉 परागण बाधित हो रहा है
👉 फल समय से पहले गिर रहे हैं
👉 फसलों में फफूंद और रोग बढ़ रहे हैं
जांच एजेंसियों पर भी गंभीर आरोप
किसान नेताओं ने सीधे तौर पर पर्यावरण संस्थाओं की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि:
- राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) प्रभावी कार्रवाई नहीं कर रहा
- उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की जांच रिपोर्ट दबाई जा रही हैं
- मानवाधिकार संस्थाएं भी निष्क्रिय हैं
- फैक्ट्रियों को खुली छूट दी जा रही है
किसानों का आरोप है कि सरकार की प्राथमिकता उद्योगपति बन गए हैं, पर्यावरण नहीं।
“यह सिर्फ किसानों का नहीं, देश की अर्थव्यवस्था का संकट”
किसान नेताओं ने चेतावनी दी:
“अगर प्रदूषण नहीं रोका गया तो इसका असर सिर्फ किसानों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि देश की जीडीपी और आम आदमी की रसोई तक पहुंचेगा।”
उन्होंने जलवायु अनुकूल कृषि नीति लागू करने और प्रदूषण फैलाने वाले कारखानों पर तत्काल कार्रवाई की मांग की।
मोदी-योगी के भाषण से बढ़ा आक्रोश
धरने में शामिल किसानों ने नाराजगी जताई कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हालिया मेरठ संबोधन में किसानों की इस गंभीर समस्या का कोई उल्लेख नहीं हुआ।
इससे किसानों में नाराजगी और बढ़ गई है और अब आंदोलन को और तेज करने की रणनीति बनाई जा रही है।
आंदोलन में शामिल प्रमुख किसान नेता
धरने में राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश चौधरी, अरुण सिद्धू, रामकृष्ण चौहान, एहसान अली, होमपाल सिंह, ओम प्रकाश सिंह, रमेश चंद्र, आजम चौधरी, हाजी नन्नू सैफी समेत हजारों किसान मौजूद रहे।
ग्राउंड रिपोर्ट: क्यों खतरनाक है यह आंदोलन?
विश्लेषण:
- यह आंदोलन अब स्थानीय नहीं, क्षेत्रीय संकट बन चुका है
- पर्यावरण बनाम उद्योग की सीधी लड़ाई बनती जा रही है
- लंबे समय तक जारी रहा तो राजनीतिक मुद्दा बन सकता है
- कृषि उत्पादन और खाद्य सुरक्षा पर असर संभव
क्या है किसानों की मुख्य मांग
✔ प्रदूषण फैलाने वाले कारखानों को बंद किया जाए
✔ बगद नदी की वैज्ञानिक जांच हो
✔ भूमिगत जल की शुद्धि की जाए
✔ किसानों को मुआवजा मिले
✔ पर्यावरण संरक्षण कानूनों का सख्ती से पालन हो
आगे क्या?
किसानों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को राज्य स्तर तक विस्तार दिया जाएगा।
यह आंदोलन अब सिर्फ प्रदूषण का मुद्दा नहीं, बल्कि अस्तित्व और पर्यावरण न्याय की लड़ाई बन चुका है।
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