चीनी मिल क्षेत्र में ‘डबल इनकम मॉडल’ की ग्राउंड रिपोर्ट: उन्नत गन्ना प्रजाति, ड्रिप और सहफसली खेती से बदल रही किसानों की तस्वीर

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नूरपुर/बिजनौर। गन्ना किसानों की आय बढ़ाने और बसंतकालीन बुवाई को वैज्ञानिक तरीके से सफल बनाने के लिए विश्वामित्र पाठक, ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक ने बिंदल पेपर्स शुगर मिल्स, चांगीपुर सोसाइटी नूरपुर क्षेत्र का विस्तृत स्थलीय निरीक्षण किया। इस दौरान किसानों को उन्नत प्रजातियों, आधुनिक तकनीकों और आय दोगुनी करने वाले मॉडल अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।
शाहपुर खेड़ी में कृषक गोष्ठी: उन्नत बीज और नई तकनीकों पर जोर
निरीक्षण की शुरुआत शाहपुर खेड़ी गांव में आयोजित कृषक गोष्ठी से हुई, जहां किसानों को CoS-13235, CoS-17231, CoS-18231, CoS-19231, Co-0118, CoLK-16202, CoLK-14201 और Co-9801 जैसी उन्नत गन्ना प्रजातियों की जानकारी दी गई।
विशेष रूप से जलभराव वाले क्षेत्रों के लिए उपयुक्त किस्मों की सिफारिश की गई।
किसानों को दिए गए प्रमुख सुझाव:
- बुवाई में ट्राइकोडर्मा का प्रयोग
- ट्रेंच प्लांटिंग तकनीक अपनाना
- सहफसली खेती (गन्ना + सरसों)
- ड्रिप इरिगेशन सिस्टम
- पेड़ी प्रबंधन और अवशेष प्रबंधन
- पंचामृत खेती मॉडल
चीनी मिल के गन्ना प्रबंधक इन्द्रवीर सिंह ने मिल द्वारा किसानों को दी जा रही सुविधाओं की विस्तृत जानकारी दी।
बसेड़ा तगा में मशीन से पेड़ी प्रबंधन: यंत्रीकरण बना मिसाल
इसके बाद टीम ने बसेड़ा तगा गांव में किसान राजेंद्र सिंह के खेत पर आरएमडी मशीन से पेड़ी प्रबंधन का निरीक्षण किया।
👉 यह मॉडल दर्शाता है कि
- मशीनों के उपयोग से लागत घटती है
- उत्पादन बढ़ता है
- श्रम पर निर्भरता कम होती है
इसी गांव में गन्ने के साथ सरसों की सहफसल भी देखी गई, जो किसानों की अतिरिक्त आय का मजबूत उदाहरण है।
खाद गोदाम सैदपुर में निरीक्षण: डिजिटल सिस्टम से पारदर्शिता
कृषि निवेश की उपलब्धता जांचने के लिए सैदपुर खाद गोदाम का निरीक्षण किया गया।
यहां जांच में पाया गया:
- पर्याप्त कृषि निवेश उपलब्ध
- SGK और POS मशीन से पारदर्शी वितरण
- कृषि निवेश ऐप से डिजिटल मॉनिटरिंग
स्टोर प्रभारी को बसंतकालीन बुवाई के लिए पर्याप्त स्टॉक रखने के निर्देश दिए गए।
महिला समूह बना ‘सीड बैंक’: इसापुर में तैयार हो रही गन्ना नर्सरी
महिला सशक्तिकरण का बेहतरीन उदाहरण इसापुर गांव में देखने को मिला, जहां महिला समूह द्वारा Co-18231, Co-13235 और Co-0118 प्रजातियों की नर्सरी तैयार की जा रही है।
यह पहल:
- बीज बदलाव कार्यक्रम को गति दे रही
- महिला आय बढ़ा रही
- स्थानीय स्तर पर बीज उपलब्ध करा रही
किसानों को मिले आधुनिक कृषि यंत्र
कार्यक्रम के अंत में उपाध्यक्ष गन्ना जितेन्द्र मलिक, विश्वामित्र पाठक और इन्द्रवीर सिंह द्वारा किसानों को आधुनिक कृषि यंत्र वितरित किए गए:
- सब्सॉइलर
- ऑटोमैटिक ट्रेंच प्लांटर
- पावर स्प्रेयर
- ट्रेंच रेजर
विश्लेषण: क्यों महत्वपूर्ण है यह अभियान?
✔ किसानों की आय बढ़ाने का मॉडल
सहफसली खेती + उन्नत बीज + मशीनरी = 30-60% तक आय वृद्धि संभव
✔ लागत घटाने का वैज्ञानिक तरीका
ड्रिप और ट्रेंच तकनीक से
- पानी की बचत: 40%
- उत्पादन वृद्धि: 20-25%
✔ महिला सशक्तिकरण
महिला समूह अब बीज उत्पादन से जुड़ रहे हैं
निष्कर्ष
बिजनौर का यह मॉडल साफ संकेत दे रहा है कि
👉 वैज्ञानिक खेती
👉 आधुनिक मशीन
👉 सहफसली मॉडल
ही किसानों की आय दोगुनी करने का असली रास्ता है।
यदि यही मॉडल बड़े स्तर पर लागू हुआ तो आने वाले समय में गन्ना किसान आर्थिक रूप से और मजबूत होंगे।
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