रंग बदलने वाला शिवलिंग! मुरादाबाद के बहेड़ी ब्रह्मनान स्थित प्राचीन श्री राधाकृष्ण मंदिर में उमड़ रही आस्था, महाशिवरात्रि पर विशेष आकर्षण

मुरादाबाद | अवनीश त्यागी की स्पेशल रिपोर्ट
उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जनपद की ठाकुरद्वारा तहसील के ग्राम बहेड़ी ब्रह्मनान में स्थित प्राचीन श्री राधाकृष्ण मंदिर इन दिनों श्रद्धालुओं के बीच गहरी आस्था और चर्चा का केंद्र बना हुआ है। सैकड़ों वर्ष पुराने इस शिवालय में विराजमान शिवलिंग को लेकर स्थानीय स्तर पर यह मान्यता प्रचलित है कि इसका रंग समय-समय पर बदलता है। इसी विश्वास के कारण यहां दूर-दराज से भक्त दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंच रहे हैं।
प्राचीन वास्तुकला का जीवंत उदाहरण
जलरोधक चुनियां ईंटों से निर्मित यह मंदिर क्षेत्र की प्राचीन स्थापत्य शैली का सशक्त प्रमाण माना जाता है। ऐतिहासिक पृष्ठभूमि भले ही पूरी तरह दस्तावेज़ों में दर्ज न हो, लेकिन स्थानीय जनश्रुतियों में इसकी दिव्यता और प्राचीनता का विशेष उल्लेख मिलता है।
मंदिर परिसर में प्रवेश करते ही घंटियों की गूंज, वैदिक मंत्रोच्चार और भक्तिमय वातावरण श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति का अनुभव कराता है।
रंग बदलने की मान्यता से बढ़ी श्रद्धा
भक्तों का दावा है कि मंदिर में स्थापित शिवलिंग समय-समय पर अपना रंग परिवर्तित करता है। हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक या वैज्ञानिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है, लेकिन आस्था के स्तर पर इसे चमत्कारिक माना जाता है।
स्थानीय शिक्षाविदों के अनुसार, शिवलिंग स्वयंभू है या स्थापित—इसकी स्पष्ट ऐतिहासिक जानकारी उपलब्ध नहीं है, फिर भी श्रद्धालुओं का विश्वास अटूट है।
महाशिवरात्रि पर विशेष आयोजन
हर वर्ष महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। भक्तजन हरिद्वार से कांवड़ के माध्यम से गंगाजल लाकर ब्रह्ममुहूर्त में रुद्राभिषेक करते हैं।
इस दौरान परिवार, समाज और राष्ट्र की सुख-समृद्धि के लिए विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। पूरा क्षेत्र “हर हर महादेव” के उद्घोष से गुंजायमान हो उठता है।
पूजन विधि और धार्मिक परंपराएं
सनातन धार्मिक मान्यता के अनुसार पंचाक्षरी मंत्र “ॐ नमः शिवाय” का जाप करते हुए उत्तर दिशा की ओर मुख कर शिवलिंग पर जल अर्पित करना शुभ माना जाता है।
प्रमुख मान्यताएं:
- तांबे के पात्र से जल अर्पित करना श्रेष्ठ
- स्टील के पात्र का प्रयोग न करने की परंपरा
- बेलपत्र, बेर, सफेद पुष्प, भांग-धतूरा अर्पित करना शुभ
- जल चढ़ाते समय दायां पैर आगे और बायां पीछे रखने की परंपरा
धर्माचार्यों का कहना है कि भगवान शिव भोलेनाथ हैं और सच्ची श्रद्धा से की गई पूजा ही सर्वोपरि मानी जाती है।
आध्यात्मिक ऊर्जा और मानसिक शांति का केंद्र
स्थानीय श्रद्धालुओं का अनुभव है कि यहां नियमित पूजा-अर्चना से मानसिक शांति, आत्मबल और सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होती है। कई भक्त इसे मनोकामना पूर्ण करने वाला स्थल मानते हैं।
ग्रामीण परिवेश में स्थित यह प्राचीन मंदिर धार्मिक पर्यटन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बनता जा रहा है।
निष्कर्ष
आधुनिक युग की भागदौड़ के बीच बहेड़ी ब्रह्मनान का यह प्राचीन शिवालय श्रद्धा, विश्वास और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक बनकर उभरा है। रंग बदलने की मान्यता हो या महाशिवरात्रि का भव्य आयोजन—यह मंदिर जनआस्था का सशक्त केंद्र बना हुआ है।
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