सड़कों पर सुरक्षा, रगों में संवेदना: कोटद्वार में परिवहन विभाग ने रचा सेवा का इतिहास

कोटद्वार | डिजिटल डेस्क के लिए अवनीश त्यागी
जब प्रशासन सिर्फ नियमों तक सीमित न रहकर संवेदना और सेवा का रूप ले ले, तब वह खबर नहीं बल्कि मिसाल बन जाता है।
सड़क सुरक्षा जीवन रक्षा माह के अंतर्गत परिवहन विभाग कोटद्वार, आधारशिला रक्तदान समूह और प्रकाश आई टेस्ट सेंटर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित रक्तदान एवं निःशुल्क नेत्र जांच शिविर ने यही साबित कर दिया।
यह आयोजन केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आया—जहां चालान की आवाज़ नहीं, बल्कि “रक्तदान महादान” का संकल्प गूंजा।
प्रशासन की वर्दी में धड़कता दिल
सड़क सुरक्षा सप्ताह आमतौर पर नियमों और चेतावनियों तक सीमित रहता है, लेकिन कोटद्वार में इसे सेवा उत्सव में बदल दिया गया।
इस शिविर की सबसे प्रेरणादायी तस्वीर तब सामने आई, जब सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रवर्तन) श्रीमती शशि दुबे ने अपने जीवन का प्रथम रक्तदान किया।
- यह क्षण केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि एक सशक्त संदेश था—
समाज को बदलने के लिए भाषण नहीं, आचरण चाहिए।
आज परिवहन विभाग की वर्दी केवल व्यवस्था की प्रतीक नहीं रही, बल्कि वह “जीवनदाता” के रूप में नजर आई।
“सड़क पर बहता खून एक अभिशाप है, लेकिन दान किया गया रक्त एक आशीर्वाद।”
सुरक्षित यात्रा के लिए दृष्टि भी जरूरी
रक्तदान के साथ-साथ शिविर में निःशुल्क नेत्र जांच का आयोजन भी किया गया।
प्रकाश आई केयर के श्री सतीश अमोली और उनकी टीम ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि—
सुरक्षित सफर के लिए केवल वाहन नहीं, चालक की दृष्टि भी दुरुस्त होनी चाहिए।
आंकड़े जो सिर्फ संख्या नहीं, उम्मीद हैं
- 35 लोगों की नेत्र जांच
- 27 पंजीकरण
- 23 रक्तदाताओं द्वारा रक्तदान
ये आंकड़े किसी रिपोर्ट का हिस्सा नहीं, बल्कि बचाई जा सकने वाली जिंदगियों की उम्मीद हैं।
सेवा के नायक: जिनके बिना यह संभव नहीं
इस सफल आयोजन में अनेक संस्थाओं और व्यक्तियों का योगदान रहा—
राजकीय अस्पताल कोटद्वार ब्लड बैंक टीम
- अजय सिंह मेहरा
- ज्योत्सना पोर्शन
- प्रदीप रावत
- कपिल कुमार
प्रकाश आई टेस्ट केयर
- सतीश अमोली
- कुमारी गीता
आधारशिला रक्तदान समूह
- दलजीत सिंह (संचालक)
- श्री गिरिराज सिंह (संरक्षक)
- स्वयंसेवक: याशिका जख्वाल, शिवम नेगी, इंदू नौटियाल, शंकर बहादुर
परिवहन विभाग कोटद्वार
- शशि दुबे (सहायक सम्भागीय परिवहन अधिकारी, प्रवर्तन)
- जयंत वशिष्ठ (परिवहन कर अधिकारी)
- सुशील कुमार, श्री विजेंद्र प्रसाद (परिवहन उप निरीक्षक)
- सुमित कुमार, कुंदन सिंह, देवेश भट्ट, अंकित कुमार, सुमित गुसाईं, राकेश कुनियाल, प्रिया सहित समस्त प्रवर्तन कर्मी
इन सभी ने यह सिद्ध कर दिया कि सेवा के लिए उम्र या पद नहीं, सिर्फ उद्देश्य बड़ा होना चाहिए।
विश्लेषण: सड़क सुरक्षा का असली अर्थ
यह आयोजन बताता है कि सड़क सुरक्षा केवल दुर्घटनाओं को रोकने तक सीमित नहीं है, बल्कि
➡️ एक-दूसरे के जीवन की कीमत समझने का नाम है।
जब प्रशासन, सामाजिक संगठन और स्वास्थ्य सेवाएं एक साथ आती हैं, तब नीतियां ज़मीन पर उतरती हैं और समाज में विश्वास पैदा होता है।
कोटद्वार का यह शिविर एक खबर नहीं, बल्कि संवेदनशील प्रशासन और जागरूक समाज का दस्तावेज़ है।
यह मॉडल यदि अन्य जिलों में अपनाया जाए, तो सड़क सुरक्षा सप्ताह सच मायनों में जीवन रक्षा अभियान बन सकता है।
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