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यूपी स्थापना दिवस: बिजनौर में गूंजा विकास का संकल्प, प्रतिभाओं का हुआ सम्मान

यूपी स्थापना दिवस: बिजनौर में गूंजा विकास का संकल्प, प्रतिभाओं का हुआ सम्मान

स्पेशल रिपोर्ट । अवनीश त्यागी 
बिजनौर | 24 जनवरी 2026 |

उत्तर प्रदेश स्थापना दिवस 2026 के अवसर पर बिजनौर का इंदिरा बल भवन सिर्फ एक सांस्कृतिक मंच नहीं रहा, बल्कि यह प्रदेश की अर्थव्यवस्था, विकास मॉडल और 2030 के लक्ष्य को लेकर सरकार की मंशा का सार्वजनिक ऐलान बन गया। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के कैबिनेट मंत्री अनिल कुमार की मौजूदगी में आयोजित इस कार्यक्रम ने यह सवाल भी खड़ा किया— क्या “वन ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी” का सपना जिला स्तर तक उतर रहा है या अब भी फाइलों तक सीमित है?

दीप प्रज्वलन से विकास के दावे तक

कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन और विभागीय स्टालों के निरीक्षण से हुई। विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टाल सरकार की योजनाओं, उपलब्धियों और भविष्य के रोडमैप को दर्शा रहे थे। स्कूली बच्चों द्वारा प्रस्तुत देशभक्ति गीत और सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने माहौल को भावनात्मक रूप से मजबूत किया, लेकिन मंच से उठे बयान राजनीतिक और आर्थिक रूप से कहीं ज्यादा बड़े संकेत दे रहे थे।

1950 से 2026 तक: उत्तर प्रदेश की यात्रा

अपने संबोधन में अनिल कुमार ने उत्तर प्रदेश की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को रेखांकित करते हुए याद दिलाया कि 24 जनवरी 1950 को यह राज्य अस्तित्व में आया था। 2018 से उत्तर प्रदेश दिवस मनाने की शुरुआत को उन्होंने “सांस्कृतिक पहचान और विकास की ब्रांडिंग” करार दिया।
लेकिन सवाल यही है— क्या केवल आयोजन और ब्रांडिंग से प्रदेश की असली तस्वीर बदलती है?

2030 का लक्ष्य: वन ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी— सपना या रणनीति?

कार्यक्रम का सबसे बड़ा बयान रहा— 2030 तक उत्तर प्रदेश को वन ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी बनाना।
मंत्री ने इसे सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता बताया, लेकिन जिला स्तर पर मौजूद अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और नागरिकों के लिए यह लक्ष्य तभी सार्थक होगा जब—

  • रोजगार के नए अवसर गांवों तक पहुंचें
  • शिक्षा और कौशल विकास सिर्फ योजनाओं में नहीं, धरातल पर दिखें
  • उद्योग, स्टार्टअप और MSME को वास्तविक सहूलियत मिले

बिजनौर जैसे जिलों में यह लक्ष्य इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट, कृषि-आधारित अर्थव्यवस्था और युवा रोजगार से सीधे जुड़ा है।

सम्मान और लाभ वितरण: योजनाओं की तस्वीर

कार्यक्रम में शिक्षा, खेल, उद्योग और स्वच्छता जैसे क्षेत्रों में बेहतर कार्य करने वालों को सम्मानित किया गया। साथ ही टूल किट, लैपटॉप, प्रधानमंत्री आवास की चाबी और ट्राईसाइकिल का वितरण भी हुआ।
यह पहल सरकार की कल्याणकारी छवि को मजबूत करती है, लेकिन यह भी जरूरी है कि लाभ वितरण के बाद उसकी निरंतर मॉनिटरिंग हो।

लखनऊ से लाइव प्रसारण, लेकिन सवाल स्थानीय

लखनऊ में आयोजित राज्य स्तरीय समारोह का सजीव प्रसारण कार्यक्रम का अहम हिस्सा रहा। इससे स्पष्ट हुआ कि सरकार प्रदेशभर में एकसमान संदेश देना चाहती है।
हालांकि, स्थानीय स्तर पर जनता की अपेक्षा यही है कि बड़े मंचों के भाषणों के साथ-साथ स्थानीय समस्याओं— रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे— पर ठोस कार्यवाही भी दिखे।

समापन में सम्मान, लेकिन निगाहें भविष्य पर

कार्यक्रम के अंत में जिला प्रशासन द्वारा अतिथियों को प्रतीक चिन्ह और विदुर ब्रांड सामग्री आधारित किट देकर सम्मानित किया गया। समारोह सुव्यवस्थित और भव्य रहा, लेकिन उत्तर प्रदेश स्थापना दिवस का असली मूल्यांकन आने वाले वर्षों में होगा, जब यह देखा जाएगा कि—

क्या उत्तर प्रदेश वास्तव में “उत्तम प्रदेश” की परिभाषा को जमीन पर उतार पाता है या नहीं?

उत्सव से आगे जवाबदेही की जरूरत

उत्तर प्रदेश स्थापना दिवस 2026 का बिजनौर आयोजन संदेश देता है कि सरकार विकास को लेकर आश्वस्त है। अब चुनौती यह है कि यह भरोसा नतीजों में बदले
प्रदेश के नागरिक सिर्फ उत्सव नहीं, स्पष्ट परिणाम, पारदर्शिता और जवाबदेही चाहते हैं— क्योंकि वन ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी तभी बनेगी, जब हर जिला विकास की धुरी बनेगा।

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