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रामगंगा बांध कॉलोनी में मखना हाथी की मौजूदगी: मानव-वन्यजीव संघर्ष की बढ़ती चुनौती

रामगंगा बांध कॉलोनी में मखना हाथी की मौजूदगी: मानव-वन्यजीव संघर्ष की बढ़ती चुनौती

 

कालागढ़ (बिजनौर) | विशेष रिपोर्ट।  रामगंगा बांध परियोजना के आवासीय परिसर में पिछले कई दिनों से एक मखना हाथी (बिना दाँत वाला नर हाथी) का लगातार विचरण स्थानीय प्रशासन और निवासियों—दोनों के लिए चिंता का विषय बन गया है। शुक्रवार को महिला और बच्चों को दौड़ाने की घटना ने इस समस्या को केवल डर की घटना नहीं, बल्कि एक गंभीर मानव-वन्यजीव संघर्ष के रूप में रेखांकित कर दिया है।

घटना नहीं, प्रवृत्ति है समस्या

यह मामला किसी एक दिन की घटना तक सीमित नहीं है। स्थानीय लोगों के अनुसार हाथी कई दिनों से कॉलोनी, गलियों और खुले स्थानों में देखा जा रहा है। हाथी का बार-बार आबादी में प्रवेश इस बात का संकेत है कि यह उसका अस्थायी नहीं बल्कि नियमित मार्ग बनता जा रहा है। विश्लेषण बताता है कि जब कोई वन्यजीव बार-बार किसी रिहायशी क्षेत्र में लौटता है, तो दुर्घटना की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।

डर से बदली जीवनशैली

हाथी की मौजूदगी का सीधा असर लोगों की दिनचर्या पर पड़ा है। शाम होते ही लोग घरों में सिमट जाते हैं। बच्चों को बाहर भेजना बंद कर दिया गया है और बुजुर्गों की आवाजाही सीमित हो गई है। यह केवल भय का माहौल नहीं, बल्कि सामाजिक और मानसिक असुरक्षा की स्थिति है, जो लंबे समय तक बनी रही तो इसके दूरगामी प्रभाव पड़ सकते हैं।

क्यों आ रहा है हाथी आबादी में?

वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार हाथियों का रिहायशी क्षेत्रों की ओर आना प्रायः

  • जंगलों में भोजन और पानी की कमी,
  • प्राकृतिक गलियारों (कॉरिडोर) का बाधित होना,
  • मानव गतिविधियों का जंगल की सीमा तक फैलना
    जैसे कारणों से जुड़ा होता है।
    रामगंगा बांध परियोजना क्षेत्र जंगल से सटा होने के कारण पहले से ही संवेदनशील रहा है। ऐसे में हाथी का यहां बार-बार आना क्षेत्रीय पारिस्थितिकी असंतुलन की ओर इशारा करता है।

प्रशासनिक तैयारी और सीमाएं

वन विभाग का कहना है कि हाथी को आबादी से दूर रखने के लिए टीम तैनात की गई है और लगातार निगरानी की जा रही है। हालांकि विश्लेषण यह सवाल भी उठाता है कि क्या केवल निगरानी पर्याप्त है?
विशेषज्ञ मानते हैं कि बिना दीर्घकालिक रणनीति—जैसे सुरक्षित हाथी कॉरिडोर, वैकल्पिक जल-भोजन स्रोत और स्थानीय स्तर पर चेतावनी तंत्र—ऐसी घटनाएं बार-बार दोहराई जा सकती हैं।

स्थानीय मांग बनाम दीर्घकालिक समाधान

स्थानीय निवासी हाथी को तुरंत जंगल में वापस भेजने की मांग कर रहे हैं, जो स्वाभाविक है। लेकिन दीर्घकालिक दृष्टि से यह आवश्यक है कि हाथी के लौटने के मूल कारणों को भी समझा जाए। केवल एक बार हटाना समस्या का स्थायी समाधान नहीं है।

  • कालागढ़ का यह मामला एक चेतावनी है कि विकास परियोजनाओं और वन्यजीव संरक्षण के बीच संतुलन न बनने पर मानव-वन्यजीव संघर्ष और गहरा सकता है। यदि समय रहते ठोस और वैज्ञानिक उपाय नहीं अपनाए गए, तो यह संकट केवल भय तक सीमित न रहकर जान-माल के नुकसान में भी बदल सकता है।
    अब आवश्यकता है तात्कालिक सुरक्षा के साथ-साथ दीर्घकालिक पर्यावरणीय योजना की—ताकि इंसान और वन्यजीव दोनों सुरक्षित रह सकें।

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