अवनीश त्यागी की विश्लेषणात्मक विशेष रिपोर्ट | गन्ना तौल घोटाला
नांगल B क्रय केंद्र पर घटतोली के बाद भी FIR क्यों नहीं ?
बरकातपुर शुगर मिल्स मामला: क्या दबाव, मिलीभगत या तंत्र की जड़ता ने कानून को बांध रखा है ?
नांगल B गन्ना क्रय केंद्र (बरकातपुर शुगर मिल्स) पर घटतोली पकड़े जाने के बावजूद एक सप्ताह बीत जाने के बाद भी FIR दर्ज न होना केवल प्रशासनिक शिथिलता नहीं, बल्कि सरकारी तंत्र की गंभीर विफलता का संकेत देता है। सवाल उठता है—जब अपराध प्रथम दृष्टया सामने है, तो कानून की पहिया क्यों थमी हुई है?
मामले का सार
- स्थान: नांगल B गन्ना क्रय केंद्र, बरकातपुर शुगर मिल्स
- आरोप: गन्ना तौल में घटतोली
- स्थिति: घटतोली पकड़े जाने के बाद भी FIR लंबित
- समय: एक सप्ताह से अधिक बीत चुका
कानून के सामने तंत्र क्यों झुका?
घटना के बाद अपेक्षा थी कि तत्काल FIR, दोषियों की पहचान, और दंडात्मक कार्रवाई होगी। लेकिन चुप्पी यह संकेत देती है कि कहीं न कहीं दबाव का खेल चल रहा है।
संभावित कारण: क्या-क्या हो सकता है?
- सांगठनिक दबाव: क्या गन्ना सहकारी समिति किसी बाहरी संगठन के दबाव में है?
- अनैतिक प्रशासनिक दबाव: क्या जिला गन्ना अधिकारी प्रभु नारायण सिंह की ओर से दबाव डाला गया?
- धनबल का प्रभाव: क्या आर्थिक लेन-देन ने कार्रवाई की धार कुंद कर दी?
- मिलीभगत: क्या विभागीय मुखिया की मौन स्वीकृति ने दोषियों को संरक्षण दिया?
- मानसिक दासता: क्या अफसरशाही अब दबाव में काम करने की अभ्यस्त हो चुकी है?
एक सप्ताह बाद भी FIR नहीं—क्यों गंभीर है यह चूक?
- कानून की विश्वसनीयता पर चोट
- किसानों के भरोसे का क्षरण
- दोषियों के हौसले बुलंद
- भविष्य में ऐसे अपराधों को खुली छूट
किसानों का सवाल, प्रशासन की चुप्पी
घटतोली सीधे-सीधे किसानों की मेहनत पर डाका है। तौल में हेराफेरी का अर्थ है—कम भुगतान, ज्यादा शोषण। ऐसे में FIR न होना यह संदेश देता है कि किसान की आवाज़ तंत्र में गुम हो जाती है।
जिम्मेदारी किसकी?
- गन्ना सहकारी समिति: शिकायत और कानूनी प्रक्रिया शुरू करने में विफल क्यों?
- जिला गन्ना विभाग: विभागीय मुखिया की भूमिका पर सवाल
- प्रशासन: कानून लागू कराने में देरी क्यों?
क्या होना चाहिए था?
- तत्काल FIR दर्ज
- स्वतंत्र जांच और तौल मशीनों का सत्यापन
- दोषियों का निलंबन/कार्रवाई
- किसानों को नुकसान की भरपाई
निष्कर्ष: चुप्पी भी अपराध है
नांगल B क्रय केंद्र प्रकरण में घटतोली पकड़े जाने के बाद भी FIR न होना किसी एक अधिकारी की भूल नहीं, बल्कि पूरे तंत्र की सामूहिक विफलता है। यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो यह मामला न्याय की हत्या और किसान हितों के साथ खुला मज़ाक बन जाएगा।
अब सवाल साफ है—क्या प्रशासन जागेगा, या दबाव के आगे कानून यूं ही झुकता रहेगा?













