🔴 RTI में लापरवाही की भारी कीमत
सूचना आयोग का सख्त संदेश: बिजनौर के जनसूचना अधिकारी पर ₹25,000 का अर्थदंड, वेतन से होगी वसूली
✍️ डिजिटल डेस्क | विशेष रिपोर्ट
सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI Act) को हल्के में लेना अब सरकारी अफसरों को महंगा पड़ने लगा है। उत्तर प्रदेश सूचना आयोग ने एक अहम और नजीर बनने वाले आदेश में बिजनौर के जनसूचना अधिकारी (PIO) पर ₹25,000 का अर्थदंड ठोक दिया है। यह जुर्माना न सिर्फ कागजों तक सीमित रहेगा, बल्कि सीधे वेतन से काटकर वसूला जाएगा।
यह फैसला उन तमाम सरकारी विभागों के लिए कड़ा संदेश है, जो RTI आवेदनों को टालने या नजरअंदाज करने की प्रवृत्ति रखते हैं।
📌 क्या है पूरा मामला?
बिजनौर निवासी अनुज सोती द्वारा दाखिल एक RTI अपील (संख्या: S-7-1642/A/2022) पर सुनवाई करते हुए, राज्य सूचना आयुक्त मोहम्मद नदीम ने पाया कि—
- संबंधित जनसूचना अधिकारी ने
- समय पर सूचना नहीं दी
- RTI अधिनियम की वैधानिक समयसीमा का उल्लंघन किया
- कोई संतोषजनक कारण प्रस्तुत नहीं किया
इन्हीं आधारों पर सूचना आयोग ने RTI Act की धारा 20(1) के तहत कार्रवाई करते हुए ₹250 प्रतिदिन की दर से अधिकतम ₹25,000 का जुर्माना लगाया।
आयोग का सख्त आदेश: वेतन से होगी वसूली
सूचना आयोग ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि—
“अर्थदंड की राशि संबंधित अधिकारी के वेतन से वसूल कर राज्य कोष में जमा कराई जाए।”
इसके लिए पर्यावरण विभाग, उत्तर प्रदेश शासन के प्रमुख सचिव को निर्देशित किया गया है कि वे—
- जुर्माने की वसूली सुनिश्चित करें
- तीन माह के भीतर अनुपालन रिपोर्ट आयोग को भेजें
क्यों अहम है यह फैसला?
👉 RTI व्यवस्था की मजबूती
यह आदेश साफ करता है कि सूचना आयोग अब केवल नोटिस जारी करने तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रत्यक्ष दंडात्मक कार्रवाई कर रहा है।
👉 अफसरों की जवाबदेही तय
अब RTI को नजरअंदाज करना
➡️ नौकरी पर सीधा असर डाल सकता है
➡️ वेतन कटौती तक पहुंच सकता है
👉 आम नागरिकों को भरोसा
इस फैसले से यह संदेश गया है कि
“सूचना मांगना आपका अधिकार है और उसे न देना अपराध।”
किन मदों में जमा होगा जुर्माना?
जुर्माने की राशि राज्य के निम्न खाते में जमा होगी—
- 0070 – अन्य प्रशासनिक सेवाएं
- 60 – अन्य सेवाएं
- 800 – अन्य प्राप्तियां
- 15 – RTI अधिनियम, 2005 के अंतर्गत अर्थदंड
विश्लेषण: क्या बदलेगा सिस्टम?
विशेषज्ञों का मानना है कि—
- यदि ऐसे आदेश नियमित रूप से लागू हुए
- और वसूली वास्तव में वेतन से हुई
तो
✔️ RTI फाइलें धूल नहीं खाएंगी
✔️ अफसर समय पर जवाब देने को मजबूर होंगे
✔️ पारदर्शिता बढ़ेगी
लेकिन सवाल यह भी है कि—
क्या सभी मामलों में इतनी ही सख्ती होगी, या यह एक अपवाद बनकर रह जाएगा?
निष्कर्ष: RTI को हल्के में लेना अब भारी पड़ेगा
उत्तर प्रदेश सूचना आयोग का यह आदेश सिस्टम के लिए चेतावनी और आम नागरिकों के लिए राहत है। यह साबित करता है कि अगर नागरिक लगातार और कानूनी तरीके से लड़ाई लड़ें, तो व्यवस्था को झुकना ही पड़ता है।
RTI अब सिर्फ एक कानून नहीं, बल्कि जवाबदेही का हथियार बनता दिख रहा है।
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