📍 बिजनौर | विशेष, विश्लेषणात्मक रिपोर्ट: अवनीश त्यागी
बिजनौर के 5 बड़े रिश्वत कांड
हर साल घूस, हर विभाग दागदार—अलमारी खुली, पर सिस्टम अब भी सवालों के घेरे में
बिजनौर में रिश्वतखोरी अब किसी एक विभाग या एक कर्मचारी तक सीमित नहीं रह गई है। बीते कुछ वर्षों में सामने आए पांच बड़े रिश्वत कांड इस बात के साफ संकेत हैं कि जिले में भ्रष्टाचार एक सतत और संगठित समस्या बन चुका है।
ताजा मामला सदर तहसील में लेखपाल के रिश्वत लेते पकड़े जाने का है, लेकिन जब पीछे मुड़कर देखा जाए तो तस्वीर कहीं ज्यादा गंभीर नजर आती है।
पहले जानिए—पांच रिश्वत कांड, जो बने सुर्खियां
रिश्वत कांड–1 | शिक्षा विभाग: 50 हजार की घूस
- पद: डीसी मिड-डे मील
- राशि: ₹50,000
- समय: बीएसए रहते जयकरण यादव का कार्यकाल
- आरोप: भुगतान और व्यवस्थाओं के बदले रिश्वत
- हकीकत: गिरफ्तारी हुई, लेकिन पूरे नेटवर्क की जांच अधूरी
➡️ शिक्षा विभाग का यह मामला आज भी सबसे बड़ा और सबसे ज्यादा सवालों वाला माना जाता है।
रिश्वत कांड–2 | DIOS कार्यालय: 10 हजार और बंद चार्ज
- तारीख: 30 जनवरी 2025
- आरोपी: बाबू देवेंद्र सिंह
- राशि: ₹10,000
- आरोप: निलंबित कर्मचारी की फाइल आगे बढ़ाने के बदले रिश्वत
- नवीनतम स्थिति:
- अलमारी वर्षों बाद खोल दी गई
- लेकिन आज तक किसी दूसरे बाबू को चार्ज नहीं दिया गया
➡️ सवाल यह है कि जब रिकॉर्ड सामने है, तो जिम्मेदारी तय क्यों नहीं?
रिश्वत कांड–3 | सिंचाई विभाग: 20 हजार में बिल पास
- तारीख: 27 फरवरी 2025
- आरोपी: उज्ज्वल कंसल, खंड लेखा अधिकारी
- स्थान: धामपुर सिंचाई खंड
- राशि: ₹20,000
- आरोप: बिल पास कराने के बदले घूस
➡️ एंटी करप्शन की कार्रवाई ने साबित किया कि तकनीकी विभाग भी भ्रष्टाचार से अछूते नहीं।
रिश्वत कांड–4 | तहसील चांदपुर: कुर्की का सौदा
- तारीख: 17 जुलाई 2024
- आरोपी: महीपाल सिंह, संग्रह अमीन
- राशि: ₹3,000
- आरोप: कुर्की कार्रवाई में राहत देने के बदले रिश्वत
➡️ आम नागरिकों पर सीधी कार्रवाई करने वाला अमला खुद घूस में लिप्त पाया गया।
रिश्वत कांड–5 | नगीना तहसील: किसान की जमीन, लेखपाल की जेब
- तारीख: 25 सितंबर 2023
- आरोपी: लेखपाल
- राशि: ₹20,000
- आरोप: दाखिल-खारिज के बदले किसान से वसूली
➡️ जमीन से जुड़े मामलों में रिश्वतखोरी की पुरानी बीमारी फिर उजागर हुई।
पांच कांड, एक पैटर्न
इन पांचों मामलों में कुछ बातें समान हैं—
- ✔️ रिश्वत काम कराने की शर्त बनी
- ✔️ कार्रवाई नीचे के कर्मचारियों तक सीमित रही
- ✔️ बड़े स्तर पर जवाबदेही तय नहीं हुई
- ✔️ जांच अक्सर अधूरी या धीमी रही
अलमारी खुली, लेकिन सवाल जिंदा
DIOS कार्यालय की अलमारी खुलना एक अहम कदम जरूर है, लेकिन चार्ज न दिए जाने से यह संदेश जाता है कि
रिकॉर्ड दिखाने की तैयारी है, मगर जिम्मेदारी लेने की नहीं।
प्रशासनिक जानकार मानते हैं कि चार्ज मिलते ही
- फाइल मूवमेंट
- पुराने भुगतान
- नोटशीट की भूमिका
जैसे कई तथ्य सामने आ सकते हैं—शायद इसी आशंका ने प्रक्रिया को रोक रखा है।
जनता क्या कहती है?
“हर बार कोई न कोई पकड़ा जाता है, लेकिन रिश्वत खत्म नहीं होती। इसका मतलब है कि जड़ अब भी सुरक्षित है।”
— स्थानीय नागरिक
अब प्रशासन के सामने सीधे सवाल
- इन पांचों मामलों की संयुक्त समीक्षा कब होगी?
- क्या DIOS कार्यालय की फाइलों की स्वतंत्र जांच होगी?
- क्या जिम्मेदारी सिर्फ बाबुओं तक रहेगी या अफसरों तक भी पहुंचेगी?
✍️ निष्कर्ष
बिजनौर के ये पांच रिश्वत कांड सिर्फ अलग-अलग घटनाएं नहीं, बल्कि एक ही सिस्टम की अलग-अलग तस्वीरें हैं।
जब तक
✔️ जांच समयबद्ध नहीं होगी,
✔️ चार्ज और जिम्मेदारी तय नहीं होगी,
✔️ और सजा का डर नहीं बनेगा,
तब तक रिश्वतखोरी के नए कांड सामने आते रहेंगे—
और हर कार्रवाई सिर्फ एक और खबर बनकर रह जाएगी।
🖋️ रिपोर्ट: अवनीश त्यागी










