Target Tv Live

“बिजनौर से 50 ‘आपदा मित्र’ रवाना: SDRF लखनऊ में होगा 12 दिन का स्पेशल ट्रेनिंग कैंप”

“बिजनौर से 50 ‘आपदा मित्र’ रवाना: SDRF लखनऊ में होगा 12 दिन का स्पेशल ट्रेनिंग कैंप”

जिलाधिकारी जसजीत कौर ने दिखाई हरी झंडी, आपदा प्रबंधन में जिले को मिलेगा 50 नए ‘फर्स्ट रिस्पांडर’—केंद्र सरकार की योजना से बढ़ेगी आपदा तैयारियों की क्षमता

बिजनौर, 28 नवंबर, 2025:
जिले की आपदा तैयारियों को मजबूत करने की दिशा में आज एक अहम कदम उठाया गया। जिलाधिकारी जसजीत कौर ने कलेक्ट्रेट परिसर से पहले चरण के 50 ‘आपदा मित्रों’ को हरी झंडी दिखाकर एसडीआरएफ लखनऊ के लिए रवाना किया। ये स्वयंसेवक 12 दिनों तक विशेष आपदा प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे और जिले में फर्स्ट रिस्पांडर की भूमिका निभाएंगे।

 क्या है ‘आपदा मित्र योजना’?

केंद्र सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत आम लोगों को प्रशिक्षित कर उन्हें स्थानीय स्तर पर आपदा के समय तत्काल सहायता देने योग्य बनाया जाता है। उद्देश्य है—

  • सामुदायिक जागरूकता बढ़ाना
  • आपदा के समय नुकसान में कमी लाना
  • स्थानीय स्तर पर त्वरित बचाव क्षमता विकसित करना

योजना आपदा मोचक निधि के तहत संचालित होती है।

 प्रशिक्षण में क्या-क्या सिखाया जाएगा?

प्रशिक्षण राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) के दिशा-निर्देशों के अनुसार होगा। 12 दिवसीय कोर्स में शामिल हैं—

  • ✔️ आपदा प्रबंधन एवं पूर्व तैयारी
  • ✔️ भूकंप में सुरक्षित उपाय
  • ✔️ खोज एवं बचाव (Search & Rescue)
  • ✔️ आग लगने पर त्वरित कार्रवाई
  • ✔️ बाढ़ और आकाशीय बिजली से बचाव
  • ✔️ CPR एवं बेसिक लाइफ सपोर्ट
  • ✔️ आपातकालीन परिस्थितियों में नेतृत्व

प्रशिक्षण पूरा होने पर सभी प्रशिक्षित स्वयंसेवकों को इमरजेंसी रेस्क्यू किट दी जाएगी, जिसमें शामिल हैं:
लाइफ जैकेट, फर्स्ट एड किट, टॉर्च, हेलमेट, कटर, रस्सी, सीटी, लाइटर आदि।

 कौन हैं ये ‘50 आपदा मित्र’?

अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व वान्या सिंह के अनुसार, इन स्वयंसेवकों का चयन—

  • NCC
  • NSS
  • NGOs (गैर-सरकारी संगठनों)
    से किया गया है।

ये स्वयंसेवक ट्रेनिंग के बाद जिले के विभिन्न क्षेत्रों में आपदा के पहले कदम के रूप में कार्य करेंगे।

क्यों है यह प्रशिक्षण बिजनौर के लिए महत्वपूर्ण?

बिजनौर जिला—

  • गंगा नदी व अन्य नदियों के कारण बाढ़ संभावित क्षेत्र है
  • मानसून के समय आकाशीय बिजली के कई मामले आते हैं
  • ग्रामीण क्षेत्रों में तत्काल मेडिकल सहायता की कमी रहती है
  • भूकंप ज़ोन-4 में होने से जोखिम अधिक

ऐसे में प्रशिक्षित आपदा मित्रों की उपलब्धता स्थानीय स्तर पर जान बचाने में निर्णायक भूमिका निभा सकती है।

 मौके पर मौजूद रहे अधिकारी

इस पूरे कार्यक्रम में—

  • जिला आपदा प्रबंधन विशेषज्ञ प्रशांत श्रीवास्तव
  • आपदा मित्र स्वयंसेवक
    मौजूद रहे।

50 युवा अब बिजनौर की नई आपदा सुरक्षा परत बनकर उभरेंगे। SDRF की उच्चस्तरीय ट्रेनिंग उन्हें किसी भी आपात स्थिति में तुरंत, प्रभावी और सुरक्षित प्रतिक्रिया देने के लिए सक्षम बनाएगी। यह कदम जिले को आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में और सशक्त बनाएगा।

Leave a Comment

यह भी पढ़ें