सफाई मजदूरों का शोषण कब खत्म होगा?
मुख्यमंत्री को भेजे ज्ञापन में 10 बड़ी मांगें, नगर निकायों में मानदेय से लेकर पदोन्नति तक सवालों की बौछार
बिजनौर/लखनऊ | 21 नवम्बर 2025
सफाई कर्मियों की समस्याओं को लेकर सफाई कर्मचारी आंदोलन ने एक बार फिर सरकार और प्रशासन के सामने बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। संगठन के राष्ट्रीय संयोजक बेजवाड़ा विल्सन एवं प्रदेश इकाई के प्रतिनिधि राजीव प्रसाद वाल्मीकि ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को संबोधित विस्तृत ज्ञापन जिलाधिकारी बिजनौर के माध्यम से भेजा है। ज्ञापन में नगर निकायों और पंचायतों में सफाई मजदूरों के साथ हो रहे कथित शोषण, मानदेय में अनियमितता और सुविधाओं की कमी को लेकर 10 अहम मुद्दे उठाए गए हैं।
नगर निकायों में सफाई कर्मियों का शोषण? मुख्यमंत्री को 10 सूत्रीय मांगपत्र, वेतन–वर्दी व पदोन्नति पर बड़ा सवाल
1️⃣ “शासनादेश लागू नहीं… मजदूर परेशान”
2️⃣ “समान काम–समान वेतन की मांग तेज”
3️⃣ “पीएफ–ESI कटौती की मांग फिर गर्माई”
4️⃣ “मैनुअल स्कैवेंजिंग पीड़ितों का पुनर्वास लटका”**
📌 मुख्य रिपोर्ट
सफाई कर्मचारी आंदोलन के प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि प्रदेश की अधिकांश नगर पालिका परिषदों एवं पंचायतों में सफाई कर्मियों को शासन के निर्देशों के अनुरूप मानदेय, सुविधाएं और सुरक्षा उपकरण नहीं मिल पा रहे हैं। ज्ञापन में कहा गया है कि केंद्र व राज्य सरकारों द्वारा स्वच्छता कार्य से जुड़े कर्मचारियों को सम्मान दिए जाने के बावजूद स्थानीय निकायों के कुछ अधिकारी शोषणात्मक रवैया अपनाए हुए हैं।
ज्ञापन में शामिल 10 प्रमुख मांगें
1️⃣ संविदा सफाई कर्मचारियों को सातवां वेतन
06 मार्च 2023 के शासनादेश के अनुसार सभी 2006 निकायों के संविदा सफाई कर्मचारियों को सातवें वेतनमान के लाभ तत्काल लागू किए जाएं।
2️⃣ समय पर वर्दी—सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए जाएं
कई जगहों पर वर्दी वर्षों से नहीं मिली। संगठन ने कहा कि यह न सिर्फ अधिकारों का हनन है बल्कि सुरक्षा मानकों का उल्लंघन भी।
3️⃣ मैनुअल स्कैवेंजिंग प्रभावितों का पुनर्वास लंबित
पुनर्वास योजनाएं कागजों में सीमित हैं। प्रभावित परिवारों का तत्काल पुनर्वास कराने की मांग।
4️⃣ नमस्ते भारत योजना में शहरी–ग्रामीण सफाईकर्मियों को जोड़ा जाए
स्वच्छता से जुड़े लोगों को योजना में शामिल कर लाभ दिलाने की अपील।
5️⃣ पीएफ व ESI अनिवार्य किया जाए
नगर निकायों में कार्यरत कर्मचारियों की पीएफ और ईएसआई कटौती अभी भी नाम मात्र पर है।
6️⃣ मृत्यु पर अंतिम संस्कार हेतु ₹15,000 क्षतिपूर्ति
सरकारी आदेशानुसार संविदा, आउटसोर्सिंग और स्थाई सभी सफाई कर्मियों के लिए आर्थिक सहायता सुनिश्चित की जाए।
7️⃣ पदोन्नति की सुविधा—लिपिक व ASI पदों पर प्रोन्नति
योग्यता व अनुभव के आधार पर पदोन्नति प्रक्रिया शुरू करने की मांग।
8️⃣ प्रत्येक माह डीएम की अध्यक्षता में बैठक
समस्याओं के निस्तारण हेतु मासिक बैठक अनिवार्य की जाए—जिसमें EO और सफाई प्रतिनिधि मौजूद रहें।
9️⃣ सफाई कर्मियों के बच्चों की शिक्षा के लिए विशेष नीति
शिक्षा को सशक्त बनाने के लिए अलग बजट और योजना लागू करने की मांग।
🔟 आउटसोर्सिंग सफाई कर्मियों को समान काम–समान वेतन
स्थाई कर्मचारियों के बराबर वेतन और सुविधाएं देने पर ज़ोर।
आंदोलन की चेतावनी
राजीव प्रसाद वाल्मीकि और संगठन के अन्य प्रतिनिधियों ने स्पष्ट कहा कि यदि मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई, तो आंदोलन तीव्र किया जाएगा। सफाई कर्मियों के अधिकारों को लेकर प्रदेश भर में जनकेंद्रित अभियान चलाने की तैयारी है।
📍 विशेषज्ञों की राय
स्थानीय प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि यदि ज्ञापन में सूचीबद्ध बिंदुओं पर नीति-स्तर पर सुधार होता है, तो सफाई व्यवस्था और श्रमिक कल्याण—दोनों में उल्लेखनीय सुधार हो सकता है। विशेष रूप से—
✔ सातवां वेतन
✔ सुरक्षा उपकरण
✔ पुनर्वास
✔ समान काम–समान वेतन
—ये मुद्दे लंबे समय से विवाद में रहे हैं।
📌 निष्कर्ष
सफाई कर्मचारी आंदोलन का यह ज्ञापन फिर से साफ कर देता है कि स्वच्छता मिशन की सफलता सिर्फ कचरा उठाने वाले हाथों पर नहीं, बल्कि उनके सम्मान और अधिकारों की रक्षा पर भी निर्भर करती है। अब देखने वाली बात यह है कि क्या सरकार इन मांगों पर ठोस कदम उठाती है या फिर यह पत्र भी फाइलों में ही दबकर रह जाएगा।











