श्रद्धा और भक्तिभाव से मनाई गई महर्षि बाल्मीकि जयंती
आदि कवि बाल्मीकि के जीवन संदेश से मिली मानवता के लिए प्रेरणा
मुरादाबाद, 07 अक्टूबर 2025 (संवाददाता) –
जनपद मुरादाबाद के कस्बा बहेड़ी ब्रह्मनान में महर्षि बाल्मीकि जयंती का भव्य आयोजन श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ संपन्न हुआ। महाकाव्य रामायण के रचियता और संस्कृत साहित्य के आदि कवि महर्षि बाल्मीकि के जीवन और शिक्षाओं को समर्पित यह कार्यक्रम लोगों के लिए आध्यात्मिक और नैतिक संदेश का स्रोत बना।
🔹 मुख्य आकर्षण
- कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती और महर्षि बाल्मीकि के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन से हुआ।
- पं. राधेश्याम शर्मा ने महर्षि बाल्मीकि की शिक्षाओं, कर्म, परिवर्तन, सत्य, प्रेम और बंधुत्व भाव पर प्रकाश डाला।
- महर्षि बाल्मीकि को सम्पूर्ण मानवता का पूजनीय बताते हुए किसी जाति या धर्म के बंधन से परे उनके योगदान को सम्मानित किया गया।
- विशेष रूप से कार्यक्रम में इशांत कुमार बाल्मीकि, राजू बाल्मीकि, अमन बाल्मीकि, शशि देवी, ग्राम प्रधान अल्पना शर्मा, चन्द्रपाल बाल्मीकि, शनि बाल्मीकि, लाला ओमप्रकाश रुहेला और केशव ठाकुर मुख्य रूप से उपस्थित रहे।
🔹 महर्षि बाल्मीकि का संदेश
- सत्य और धर्म के पालन की प्रेरणा।
- समानता और बंधुत्व का संदेश सभी मानव जाति के लिए।
- सत्कर्म और नैतिक जीवन के माध्यम से समाज में परिवर्तन की आवश्यकता।
- काव्य और साहित्य के माध्यम से संस्कृति का संवर्धन।
🔹 लोकप्रिय प्रतिक्रियाएँ
- उपस्थित लोगों ने महर्षि बाल्मीकि के व्यक्तित्व और उनके रामायण के योगदान को याद करते हुए उन्हें आध्यात्मिक मार्गदर्शक करार दिया।
- ग्राम प्रधान अल्पना शर्मा ने कहा कि यह आयोजन युवाओं में नैतिक और सांस्कृतिक चेतना जगाने का अवसर है।
- सभी उपस्थितजन ने आदर और श्रद्धा के भाव के साथ महर्षि बाल्मीकि को याद किया।
🔹 निष्कर्ष
महर्षि बाल्मीकि जयंती का यह आयोजन न केवल संस्कृत साहित्य और रामायण के महत्व को उजागर करता है, बल्कि समाज में एकता, मानवता और नैतिक मूल्यों के प्रचार का भी माध्यम बना। पं. राधेश्याम शर्मा द्वारा प्रस्तुत संदेश ने यह साबित किया कि महर्षि बाल्मीकि की शिक्षाएँ आज भी सभी आयु वर्ग के लोगों के लिए प्रासंगिक और प्रेरणादायक हैं











