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“स्पेशल इन्वेस्टिगेशन” नूरपुर में नकली पान मसाला फैक्ट्री का भंडाफोड़

           “स्पेशल इन्वेस्टिगेशन”

नूरपुर में नकली पान मसाला फैक्ट्री का भंडाफोड़

“गगन” ब्रांड के नाम पर चल रहा था लाखों का फर्जी कारोबार — जांच में विभागीय मिलीभगत के चौंकाने वाले खुलासे

नूरपुर (बिजनौर), 07 अक्टूबर 2025 — संवाददाता विशेष रिपोर्ट

छापेमारी का बड़ा खुलासा

नूरपुर कस्बे के मोहल्ला गांधी नगर में सोमवार को हुई छापेमारी ने पूरे जिले में हड़कंप मचा दिया।
GST और खाद्य विभाग की संयुक्त टीम ने एक मकान में चल रही नकली पान मसाला फैक्ट्री को पकड़ा, जहाँ “गगन” ब्रांड के नाम पर नकली गुटका व पाउच तैयार किए जा रहे थे।

टीम ने मौके से बरामद किया —

  • 🧳 15 बोरे तैयार नकली माल
  • 🧂 9 कट्टे कच्चा मसाला व रॉ मटेरियल
  • ⚙️ पैकिंग मशीनें, तौल कांटा, और सीलिंग उपकरण
  • 🧵 “गगन” ब्रांड के खाली पाउच व रैपर रोल्स

बरामद सामग्री की कीमत लगभग ₹2,90,447 आँकी गई है।
फैक्ट्री को सील कर नमूने प्रयोगशाला भेजे गए हैं।

‘महीनों से चल रहा था कारोबार’ — सूत्रों का दावा

सूत्रों की मानें तो यह फैक्ट्री कई महीनों से संचालित थी।
मुख्य खाद्य निरीक्षक संजीव सिंह पर आरोप है कि उन्हें इसकी पूरी जानकारी थी,
लेकिन हर महीने मिलने वाली “माहवारी” रकम के चलते कोई कार्रवाई नहीं हुई।

“यह कारोबार कोई एक दिन की सेटिंग नहीं थी। विभाग के अंदर तक इसकी जड़ें थीं,”
— एक वरिष्ठ अधिकारी, नाम न बताने की शर्त पर

स्थानीय व्यापारियों ने बताया कि उन्होंने कई बार मुख्य खाद्य निरीक्षक संजीव सिंह और जिला अभिहित अधिकारी नादिर अली से मौखिक शिकायतें कीं,
लेकिन कोई कार्रवाई अमल में नहीं आई।
अब छापेमारी के बाद यह पूरा नेटवर्क खुलकर सामने आया है।

आरोपी और नेटवर्क का खुलासा

छापेमारी के दौरान टीम ने एक आरोपी युसूफ को गिरफ्तार किया।
उससे पूछताछ में सामने आया कि गिरोह का संचालन —

  • अब्दुल रहमान (कबीरनगर निवासी),
  • साजिद और ताहिर (रटौल, गाजियाबाद निवासी)
    — मिलकर कर रहे थे।

यह गिरोह सस्ते रासायनिक पाउडर और मिलावटी सुपारी से नकली पान मसाला तैयार कर
नूरपुर, चांदपुर, धामपुर और सहारनपुर तक सप्लाई करता था।

INFOGRAPHIC: कैसे चलता था नकली गुटका नेटवर्क

चरण गतिविधि जिम्मेदार उद्देश्य
1️⃣ सस्ता रॉ मटेरियल खरीद अब्दुल रहमान लागत घटाना
2️⃣ पैकिंग व सीलिंग युसूफ नकली “गगन” ब्रांड तैयार
3️⃣ डिस्ट्रीब्यूशन साजिद, ताहिर थोक बाजारों तक सप्लाई
4️⃣ सुरक्षा कवच विभागीय संपर्क छापेमारी से बचाव
5️⃣ बिक्री स्थानीय विक्रेता आधे दाम पर बाजार कब्जा

विभागीय कार्रवाई और आगे की जांच

कार्रवाई में शामिल रहे अधिकारी —
एसआईबी अधिकारी विपिन तिवारी, अनिल राय और खाद्य रसद अधिकारी संजीव सिंह
टीम ने सभी सामग्री जब्त कर ली है।
GST विभाग ने टैक्स चोरी व ब्रांड फ्रॉड के तहत अलग से मामला दर्ज किया है।

अब जांच विभागीय मिलीभगत तक पहुँच रही है।
संजीव सिंह और नादिर अली से स्पष्टीकरण मांगे जाने की संभावना जताई जा रही है।

खाद्य विभाग की जांच रिपोर्ट (प्राथमिक निष्कर्ष)

  • 🧪 नमूने: गुटका पाउच, तंबाकू मिश्रण, रॉ मटेरियल, फ्लेवरिंग पाउडर
  • 🔬 रिपोर्ट स्थिति: प्रयोगशाला परीक्षण जारी
  • 🧯 प्रारंभिक अनुमान: मिलावटी व स्वास्थ्य के लिए हानिकारक तत्वों की संभावना
  • 🚫 फैक्ट्री स्थिति: सील, प्रवेश निषेध
  • 💰 आर्थिक मूल्य: ₹2.90 लाख (बरामद माल)

स्वास्थ्य पर मंडरा रहा खतरा

विशेषज्ञों के अनुसार नकली पान मसाले में पाए जाते हैं —

  • ☣️ डाईएथिलीन ग्लाइकॉल (विषाक्त तत्व)
  • 🧪 सिंथेटिक फ्लेवर और कलरिंग एजेंट
  • 🌰 मिलावटी सुपारी पाउडर और केमिकल सुगंध

इनके सेवन से हो सकता है —

  • मुँह व गले का कैंसर
  • लीवर व किडनी फेल्योर
  • हृदय संबंधी बीमारियाँ और नशे की लत

टाइमलाइन चार्ट: कैसे पनपा यह नेटवर्क

समयावधि घटनाक्रम
जनवरी 2025 नूरपुर में नकली पाउच का बाजार बढ़ा
मार्च 2025 स्थानीय डिस्ट्रीब्यूटर ने शिकायत की
मई 2025 अधिकारियों को फैक्ट्री की जानकारी मिली
जून–सितंबर 2025 कथित रूप से “माहवारी” में समझौता चलता रहा
अक्टूबर 2025 GST की स्वतंत्र टीम को सूचना मिली
07 अक्टूबर 2025 छापेमारी, फैक्ट्री सील, नेटवर्क उजागर

अधिकारियों की प्रतिक्रिया

GST अधिकारी विपिन तिवारी ने कहा —

“कार्रवाई पारदर्शी तरीके से हुई है। टैक्स चोरी और ब्रांड फ्रॉड की जांच जारी है।
अगर विभागीय मिलीभगत पाई जाती है, तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी।”

वरिष्ठ प्रशासनिक सूत्र का कहना है —

“अब जांच केवल नकली फैक्ट्री तक सीमित नहीं रहेगी।
यह पता लगाया जा रहा है कि किस स्तर तक अधिकारियों की भूमिका रही।”

विश्लेषण: ‘सिस्टम की साजिश’ या ‘लापरवाही की आड़’?

नूरपुर का यह मामला सिर्फ नकली पान मसाला बनाने का नहीं,
बल्कि भ्रष्ट सिस्टम की परतें खोलने वाला दर्पण है।

अगर आरोप सही पाए जाते हैं तो यह साबित करेगा कि —

“जनस्वास्थ्य की रक्षा करने वाले ही ज़हर बेचने वालों के साझेदार बन गए थे।”

यह छापेमारी एक मिसाल बन सकती है —
जहाँ न केवल फैक्ट्री मालिक, बल्कि फाइलों में बैठे सुरक्षाकवच अधिकारी भी जवाबदेह ठहराए जाएँ।

📍 क्विक फैक्ट्स (संक्षेप में)

  • 📌 स्थान: गांधी नगर, नूरपुर (बिजनौर)
  • अधिकारियों की टीम: विपिन तिवारी, अनिल राय, संजीव सिंह
  • जब्ती: 15 बोरे तैयार माल, 9 कट्टे कच्चा माल
  • मूल्य: ₹2.90 लाख
  • धाराएँ: ब्रांड फ्रॉड, टैक्स चोरी, सार्वजनिक स्वास्थ्य अधिनियम
  • जांच: विभागीय और GST दोनों स्तरों पर जारी

समापन पंक्ति

नूरपुर की इस छापेमारी ने न केवल नकली पान मसाला माफिया का चेहरा बेनकाब किया,
बल्कि उस प्रशासनिक चुप्पी को भी उजागर किया है जो वर्षों से इन धंधों की ढाल बनी हुई थी।
अब देखना यह है कि जांच फैक्ट्री से आगे “फाइलों” तक पहुँचती है या नहीं।

 

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