नदी में डूबा पुल : एक दर्जन गांवों का टूटा संपर्क, ग्रामीणों की परेशानियां बढ़ीं
प्रतापगढ़ से रिपोर्ट
भारी बारिश ने प्रतापगढ़ के जलालपुर ग्राम सभा की जीवनरेखा माने जाने वाले चमरौधा नदी पुल को डूबो दिया है। पुल डूबने से एक दर्जन से अधिक गांवों का आपसी संपर्क पूरी तरह से टूट गया है। ग्रामीणों की खेती-बाड़ी, रिश्तेदारी और रोजमर्रा की जरूरतें बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं।
मुख्य बिंदु
- पुल डूबा: जलालपुर गांव स्थित चमरौधा नदी पर बना पुल भारी बारिश में जलमग्न।
- एक दर्जन गांव प्रभावित: उमरी, डढ़वा, मोती का पुरवा, जमादार का पुरवा, अंतू नगर पंचायत, बाबू का पुरवा, गाजीपुर चंडौका सहित कई गांवों का संपर्क टूटा।
- विकल्पहीन स्थिति: ग्रामीणों को अब 10 किमी दूर कांधरपुर, कोहंडौर या चंदौका होकर आना-जाना पड़ रहा है।
- बार-बार की समस्या: हर बरसात में पुल डूब जाता है, कारण — पुल की ऊंचाई कम होना।
- ग्रामीणों की आवाज़: वर्षों से ऊंचाई बढ़ाने या नया पुल बनाने की मांग, पर अधिकारियों ने ध्यान नहीं दिया।
- निर्माण इतिहास: करीब 15 वर्ष पहले तत्कालीन विधायक बृजेश मिश्रा सौरभ ने ग्रामीणों की मांग पर कराया था निर्माण।
समस्या का विश्लेषण
यह पुल न केवल आवागमन का मुख्य मार्ग है, बल्कि दोनों किनारों के गांवों की आर्थिक और सामाजिक कड़ी भी है। खेती-बाड़ी, बाजार तक पहुंच और रिश्तेदारी के कार्यक्रमों के लिए यही एकमात्र रास्ता है। पुल डूबते ही ग्रामीणों का जीवन ठहर जाता है।
प्रशासनिक लापरवाही
ग्रामीणों ने कई बार मौखिक और लिखित शिकायतें अधिकारियों को दीं। मांग साफ रही — या तो मौजूदा पुल की ऊंचाई बढ़ाई जाए, या फिर नया पुल बनाया जाए। लेकिन समाधान आज तक नहीं हुआ।
बड़ा सवाल
- हर बरसात में डूबने वाले पुल का स्थायी समाधान कब निकलेगा?
- क्या ग्रामीणों की आवाज़ शासन-प्रशासन तक पहुंचेगी?
- क्या आपदा बनने से पहले कोई ठोस कदम उठाया जाएगा?
चमरौधा नदी का पुल सिर्फ एक कंक्रीट ढांचा नहीं है, बल्कि दर्जनों गांवों की जीवन-रेखा है। इसकी ऊंचाई न बढ़ाने या नया पुल न बनाने की वजह से हर साल हजारों लोग संकट झेलते हैं। अब देखना है कि क्या इस बार प्रशासन सुनवाई करता है या ग्रामीणों को फिर बरसात बीतने का इंतजार करना पड़ेगा।
आपके हिसाब से इस समस्या का हल क्या होना चाहिए — नया पुल या ऊंचाई बढ़ाकर मजबूती?











