शिकायतों का निस्तारण अब ओटीपी आधारित होगा, फर्जी निस्तारण पर रोक
- शिकायत की जांच में दोनों पक्षों को बुलाना अनिवार्य, तभी निस्तारण मान्य
- ओटीपी के जरिए शिकायतकर्ता की संतुष्टि दर्ज करने के निर्देश
- अदालत में लंबित मामलों पर स्पष्ट जानकारी देना होगी अनिवार्य
- गंभीरता और गुणवत्ता से निस्तारण न करने पर हो सकती है सख्त कार्रवाई
बिजनौर, 04 सितंबर 2025। जिलाधिकारी जसजीत कौर के निर्देशों के क्रम में अपर जिलाधिकारी (न्यायिक) आंशिक दीक्षित की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में गुरुवार शाम आईजीआरएस (Integrated Grievance Redressal System) से संबंधित कार्यों की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए कि शिकायतों का निस्तारण केवल कागजी कार्रवाई न होकर, शिकायतकर्ता की संतुष्टि के आधार पर ही मान्य होगा।
बैठक की प्रमुख बातें:
शिकायत निस्तारण में लापरवाही पर एडीएम की नाराजगी खंड विकास अधिकारियों द्वारा शिकायतों के गुणवत्तापूर्ण निस्तारण न करने पर एडीएम ने असंतोष जताया।
निस्तारण की नई प्रक्रिया पर निर्देश
- शिकायत की मौके पर जांच से पहले शिकायतकर्ता और आरोपित पक्ष को सूचित करना अनिवार्य।
- दोनों पक्षों की उपस्थिति में पूछताछ के बाद ही जांच प्रक्रिया पूर्ण की जाए।
- जांच उपरांत शिकायतकर्ता से उसके पंजीकृत मोबाइल नंबर पर कॉल कर ओटीपी द्वारा संतुष्टि की पुष्टि की जाए।
- तभी अधिकारी अपनी टिप्पणी दर्ज कर शिकायत को पोर्टल पर निस्तारित मानें।
न्यायिक मामलों में स्पष्टता यदि शिकायत का प्रकरण अदालत में विचाराधीन है, तो शिकायतकर्ता को स्थिति से अवगत कराया जाए और निस्तारण न होने का कारण स्पष्ट रूप से बताया जाए।
मुख्यमंत्री कार्यालय की नियमित मॉनिटरिंग एडीएम ने बताया कि मुख्यमंत्री कार्यालय स्तर से आईजीआरएस पर प्राप्त शिकायतों की स्थिति की निरंतर मॉनिटरिंग की जाती है। इसलिए सभी अधिकारी शिकायत निस्तारण को प्राथमिकता और गंभीरता से लें।
बैठक में मौजूद अधिकारी
आईएएस/बीडीओ कुणाल रस्तोगी, जिला विकास अधिकारी रचना गुप्ता, बेसिक शिक्षा अधिकारी योगेंद्र सिंह सहित सभी संबंधित अधिकारी बैठक में उपस्थित रहे।
👉 यह बैठक स्पष्ट करती है कि सरकार जन शिकायत निस्तारण को केवल औपचारिकता न मानकर, पारदर्शी व संतोषजनक प्रक्रिया का हिस्सा बनाने की दिशा में कड़ा रुख अपना रही है।











