यूपी में साइबर सुरक्षा और फॉरेंसिक साइंस को लेकर बड़ा कदम : सीएम योगी ने किया अंतरराष्ट्रीय समिट का शुभारम्भ
लखनऊ, 18 अगस्त 2025।
उत्तर प्रदेश अब केवल कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर ही नहीं, बल्कि साइबर सुरक्षा, फॉरेंसिक विज्ञान और टेक्नोलॉजी के नए दौर की ओर भी तेजी से बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को यूपी स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस के तीसरे स्थापना दिवस पर “साइबर युद्ध के आयाम, बहुपक्षीय कानूनी ढांचे, फॉरेंसिक और रणनीतिक प्रतिकार” विषयक तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय समिट का शुभारंभ किया।
इस मौके पर सीएम ने एडवांस्ड डीएनए डायग्नोस्टिक सेंटर, एआई-ड्रोन-रोबोटिक्स लैब ‘तरकश’ और अटल पुस्तकालय का उद्घाटन किया। साथ ही प्रदेशभर में अपराध जांच को सशक्त बनाने के लिए 75 नई मोबाइल फॉरेंसिक वैन को हरी झंडी दिखाई और छात्र-छात्राओं को टैबलेट वितरित किए।
समिट और घोषणाओं की मुख्य बातें
- तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय समिट : साइबर युद्ध, फॉरेंसिक और रणनीतिक प्रतिकार पर मंथन
- एडवांस्ड डीएनए डायग्नोस्टिक सेंटर का उद्घाटन : विश्वस्तरीय डीएनए जांच सुविधा
- ‘तरकश’ लैब : एआई, ड्रोन और रोबोटिक्स टेक्नोलॉजी के लिए अत्याधुनिक लैब
- अटल पुस्तकालय : पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर आधुनिक लाइब्रेरी
- 75 मोबाइल फॉरेंसिक वैन : हर जनपद में अपराध जांच के लिए नई यूनिट
- साइबर पुलिसिंग : सभी जनपदों में साइबर थाने, 1,587 थानों में साइबर हेल्प डेस्क
- भविष्य की तैयारी : शीघ्र ही साइबर मुख्यालय की स्थापना
विश्लेषण : क्यों अहम है यह पहल?
- साइबर खतरे पर नियंत्रण
- ऑपरेशन सिन्दूर जैसे उदाहरण बताते हैं कि भविष्य के युद्ध केवल हथियारों से नहीं, बल्कि साइबर हमलों से भी लड़े जाएंगे।
- यूपी में साइबर थाने और हेल्प डेस्क से आम नागरिकों को ऑनलाइन फ्रॉड से राहत मिलेगी।
- अपराध जांच की रफ्तार तेज
- पहले फॉरेंसिक रिपोर्ट आने में सालों लग जाते थे, अब मोबाइल फॉरेंसिक वैन घटनास्थल पर तत्काल साक्ष्य जुटाएंगी।
- इससे अपराधियों को सजा दिलाने में आसानी होगी।
- टेक्नोलॉजी के साथ पुलिस की ट्रेनिंग
- ड्रोन, रोबोटिक्स और एआई के प्रयोग से पुलिस की कार्यशैली 21वीं सदी के मानकों पर खड़ी होगी।
- महाकुंभ जैसे आयोजनों में तकनीक का प्रयोग इसकी सफलता को साबित कर चुका है।
- वैश्विक स्तर की सोच
- तीन दिवसीय समिट से यूपी न सिर्फ राष्ट्रीय बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराएगा।
- इससे फॉरेंसिक और साइबर सुरक्षा में रिसर्च व इनोवेशन को बढ़ावा मिलेगा।
ग्राउंड रिपोर्ट : यूपी में फॉरेंसिक और साइबर का इन्फ्रास्ट्रक्चर
- 2017 से पहले प्रदेश में सिर्फ 4 फॉरेंसिक लैब थीं।
- अब तक 12 ‘ए’ ग्रेड लैब तैयार, 6 और निर्माणाधीन।
- हर जनपद में पहले से एक मोबाइल फॉरेंसिक यूनिट, अब 75 नई यूनिट जुड़ीं।
- हर जिले में साइबर थाना, हर थाने में हेल्प डेस्क।
मुख्यमंत्री योगी के प्रमुख बयान
- “ज्ञान के लिए हमें अपने चारों ओर के दरवाजे खुले रखने होंगे। जब भी मंथन हुआ, उससे अमृत निकला है। यही मंथन आज साइबर और फॉरेंसिक के क्षेत्र में हो रहा है।”
- “उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस पुलिस और भावी पीढ़ी को न्यू-एज कोर्सेज और तकनीक से जोड़ रहा है।”
- “अब अपराधियों को सजा दिलाना आसान होगा। पहले फॉरेंसिक रिपोर्ट आने में सालों लगते थे, अब घंटों में साक्ष्य जुटाए जा सकेंगे।”
उत्तर प्रदेश ने साइबर सुरक्षा और फॉरेंसिक साइंस के क्षेत्र में देश को दिशा देने की ठानी है।
तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय समिट से न सिर्फ प्रदेश पुलिस, बल्कि आम जनता को भी तकनीक आधारित सुरक्षा व्यवस्था का भरोसा मिलेगा।
यह पहल यूपी को डिजिटल इंडिया और सुरक्षित भारत के विजन की ओर एक बड़ा कदम साबित कर सकती है
हेडलाइंस जैसे क्लिक-योग्य टाइटल्स
- “यूपी में साइबर सुरक्षा का महाकुंभ: सीएम योगी ने खोला नया अध्याय”
- “फॉरेंसिक से साइबर तक, अब अपराधियों को बख्शा नहीं जाएगा”
- “AI-ड्रोन-रोबोटिक्स से लैस होगी यूपी पुलिस, 75 नई फॉरेंसिक वैन रवाना”











