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शामली में जोगियां समाज की जमीन पर अवैध कब्जे का मामला गरमाया 

शामली में जोगियां समाज की जमीन पर अवैध कब्जे का मामला गरमाया 

ग्राम बरलाजट में साधु-संतों की भूमि पर स्थानीय दबंगों के कब्जे का आरोप, महिलाओं से अभद्रता के भी आरोप, पीड़ितों ने जिलाधिकारी से लगाई गुहार

मुख्य बिंदु (Highlights)

  • स्थान: ग्राम बरलाजट, तहसील व जिला शामली

  • विवादित भूमि: खसरा नं. 318, रकबा 0.6250 हेक्टेयर, राजस्व अभिलेखों में जोगियां समाज के नाम दर्ज

  • आरोप:

    • विपक्षगण द्वारा भूमि पर अवैध कब्जा
    • साधु-संतों के ठहराव स्थल और उत्सवों में उपयोग होने वाली भूमि पर गोबर डालकर कृषि कार्य
    • रास्ता व नालियां बंद करने के प्रयास
    • पीड़ितों के परिवार पर मारपीट, धमकी और महिलाओं के साथ अभद्रता
  • मुख्य विपक्षगण के नाम: प्रदीप, रिंकू, रमेश, सुरेश, सुमित, रामपाल, पप्पे, गोलू, मनु, अंकित आदि

  • पीड़ितों का पक्ष:

    • कई बार शिकायत करने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं
    • गांव में विपक्षियों का दबदबा, भय और आतंक का माहौल
  • मांग: जिलाधिकारी से कब्जा मुक्त कराने और विपक्षियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई का अनुरोध

विस्तृत रिपोर्ट

शामली जिले के ग्राम बरलाजट में जोगियां समाज की पंजीकृत भूमि पर कब्जे का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। यह भूमि, जो राजस्व अभिलेखों में खसरा संख्या 318 के तहत 0.6250 हेक्टेयर दर्ज है, वर्षों से साधु-संतों के ठहराव और धार्मिक आयोजनों के लिए उपयोग में आती रही है।

लेकिन, गांव के कुछ दबंग परिवारों पर आरोप है कि उन्होंने इस जमीन पर अवैध रूप से कब्जा कर लिया है। पीड़ितों का कहना है कि विपक्षगण न केवल जमीन पर खेती कर रहे हैं, बल्कि गांव में जाने के रास्ते और नालियां भी बंद कर देते हैं। विरोध करने पर मारपीट, गाली-गलौज और महिलाओं से अभद्रता जैसी घटनाएं घटित होती हैं।

पीड़ितों—वासनु, गौतम, सुमित और काला—ने जिलाधिकारी को लिखित शिकायत में आरोप लगाया कि शिकायतें बार-बार करने के बावजूद प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने मांग की है कि तहसीलदार शामली को मौके पर बल प्रयोग कर कब्जा मुक्त कराने और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कदम उठाने के आदेश दिए जाएं।

संपादकीय टिप्पणी 

यह मामला न सिर्फ भूमि विवाद है बल्कि इसमें धार्मिक और सामाजिक भावना भी जुड़ी हुई है। साधु-संतों की परंपरागत भूमि पर कब्जे का आरोप स्थानीय स्तर पर गंभीर तनाव का कारण बन सकता है। इसमें महिलाओं के साथ अभद्रता और हिंसा के आरोप इसे कानून-व्यवस्था का भी मामला बनाते हैं।
अगर प्रशासन समय रहते कार्रवाई नहीं करता, तो यह विवाद बड़े आंदोलन में भी बदल सकता है।

 

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