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यूपी में बिजली विरोध पर विवाद-संघर्ष समिति का बड़ा हमला, दस्तावेज सार्वजनिक करने की मांग

यूपी में बिजली विरोध पर विवाद-संघर्ष समिति का बड़ा हमला, दस्तावेज सार्वजनिक करने की मांग

लखनऊ , 10 अगस्त 2025
उत्तर प्रदेश विधानसभा के वैचारिक सत्र से पहले विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघ समिति ने प्रदेश के सभी खंडों और खंडों को पत्र जारी कर खंड एवं दक्षिण विद्युत वितरण निगमों की विचारधारा का कड़ा विरोध किया है। समिति का आरोप है कि यह पूरी तरह से प्रक्रियात्मक अपारदर्शी , संदेहास्पद और जनविरोधी है।

 मुख्य आरोप और दावा

  • विवेचक का निर्णय निरस्त करने की मांग – समिति का कहना है कि विवेचक और विनिवेश की गंध वाली प्रक्रिया शुरू हो गई है।
  • मुनाफ़ा में चल रहा निगम
    • विद्युत विद्युत वितरण निगम: ₹2253 करोड़ लाभ (2024-25)
    • दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम: ₹3011 करोड़ लाभ (2024-25)
    • दोनों कुल मिलाकर: ₹5264 करोड़
  • अत्यंत कम आरक्षित क्षेत्र – लगभग ₹1 लाख करोड़ मूल्य वाली संपत्ति ₹6500 करोड़ में बिक्री की तैयारी।
  • ज़मीन के किराए का आरोप – 42 स्मारकों की ज़मीन पर निजी मकानों को किराए पर देने की योजना ₹1 लीज।
  • दस्तावेज़ छुपाने का आरोपड्राफ्ट स्टैंडर्ड बिडिंग दस्तावेज़ 2025 न तो सार्वजनिक किया गया, न ही राज्य में बेचा गया।
  • कन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट – ट्रांजेक्शन कंसल्टेंट की निविदा प्रक्रिया में ‘कंफ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट’ की शुरुआत बताई गई।
  • डेजी कंसल्टेंट – मेसर्स ग्रांट थॉर्टन ने अमेरिका में 40,000 डॉलर की कंपनी अडानी पावर के लिए भी काम किया।
  • बिजली के झटके में विस्फोट – प्रोटोटाइप के बाद 2-3 गुना बढ़ने का दावा, उदाहरण:
    • मुंबई में निजी क्षेत्र दर ₹15.71 प्रति यूनिट
    • यूपी में अधिकतर घरेलू दाम ₹6.50 प्रति यूनिट

संघर्ष समिति की मांगें

  1. व्युत्पत्ति का पूरा दस्तावेज़ और ड्राफ्ट बिडिंग दस्तावेज़ 2025 सार्वजनिक किया जाएगा।
  2. एकजुटता और राजस्व क्षमता का सही आकलन मानक बिना कोई हो।
  3. न्यूनतम-विधायक अपने पद का उपयोग कर इस जनविरोधी निर्णय को रोकें।

 विश्लेषण

यह विवाद यूपी के बिजली क्षेत्र में संपत्ति, संपत्ति के आकलन और हितों के मुद्दे पर सीधे विधानसभा सत्र से पहले गरमा रहा है। समिति के आरोप अगर सही साबित होते हैं, तो यह सिर्फ बिजली क्षेत्र का नहीं बल्कि सरकारी एजेंसियों के संरक्षण और निजी घरों को लाभ के बड़े पैमाने पर ‘मेगा लूट’ का मामला बन सकता है। वहीं, सरकार की तरफ से अब तक इस पर स्पष्ट जवाब नहीं आया है, जिससे राजनीतिक उछाल और वृद्धि के आसार हैं।

 

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