विद्युत निजीकरण पर घमासान: निदेशक वित्त के खिलाफ कर्मचारियों का बड़ा आरोप, दस्तावेज़ सील करने की मांग तेज़

30 जुलाई, 2025 | लखनऊ ब्यूरो रिपोर्ट
मुख्य बातें (News Highlights)
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निजीकरण प्रक्रिया पर रोक की मांग, पूरे प्रदेश में 245वें दिन भी विद्युत कर्मचारियों का प्रदर्शन जारी।
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निदेशक वित्त निधि नारंग पर भारी वित्तीय अनियमितताओं और निजीकरण के नाम पर घोटाले के आरोप।
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कार्यालय को सील करने और गोपनीय दस्तावेजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु ऊर्जा विभाग को पत्र।
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से सभी फैसलों को निरस्त कराने और उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग।
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ग्रांट थॉर्टन कंसल्टेंसी पर गंभीर सवाल, झूठा शपथपत्र देने के बावजूद बनाए रखा गया कंसल्टेंट।
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वाराणसी से नोएडा तक कर्मचारियों ने ज़ोरदार विरोध प्रदर्शन किया।
समाचार विस्तार से (Analytical Report):
उत्तर प्रदेश की बिजली व्यवस्था में निजीकरण की कोशिशों को लेकर चल रहा घमासान और तेज हो गया है। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने एक बार फिर निजीकरण की समस्त प्रक्रिया को रद्द करने, और निदेशक वित्त श्री निधि नारंग द्वारा लिए गए सभी निर्णयों को तत्काल निरस्त करने की मांग उठाई है।
संघर्ष समिति ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को धन्यवाद देते हुए अपील की है कि श्री नारंग के कार्यकाल में हुए टेंडर और वित्तीय फैसलों की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए, क्योंकि कर्मचारियों के अनुसार इसमें भारी घोटाले की आशंका है।
गंभीर आरोप और मांगें:
- श्री नारंग के नेतृत्व में बनी टेंडर मूल्यांकन समिति ने जिन दस्तावेजों के आधार पर निजीकरण की प्रक्रिया चलाई, वह कुछ चुनिंदा निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए तैयार किए गए।
- ग्रांट थॉर्टन पर झूठा शपथ पत्र देने के बावजूद कंसल्टेंट बनाए रखने और उसे क्लीन चिट देने पर नाराजगी।
- ऊर्जा विभाग को पत्र लिखकर संघर्ष समिति ने निदेशक वित्त के कार्यालय को तत्काल सील करने की मांग की है क्योंकि वे कथित रूप से गोपनीय दस्तावेजों की फोटोकॉपी कर बाहर ले जाने की कोशिश कर रहे हैं।
- यह भी आरोप है कि पावर कॉरपोरेशन की गोपनीयता और पारदर्शिता को गंभीर खतरा है।
प्रदेशव्यापी विरोध प्रदर्शन के केंद्र:
प्रदर्शन आज इन प्रमुख शहरों में ज़ोरशोर से हुआ:
👉 वाराणसी, आगरा, मेरठ, कानपुर, गोरखपुर, मिर्जापुर, अलीगढ़, मथुरा, झांसी, बरेली, अयोध्या, नोएडा, गाजियाबाद, अनपरा, ओबरा समेत 30+ शहर।
संघर्ष समिति की चेतावनी:
संघर्ष समिति ने स्पष्ट कहा है कि जब तक निजीकरण की प्रक्रिया को पूरी तरह से रद्द नहीं किया जाता और श्री नारंग व संबंधित अधिकारियों की जांच नहीं होती, तब तक आंदोलन और तेज़ होगा।
📞 शैलेन्द्र दुबे, संयोजक – 9415006225
यह मुद्दा न केवल उत्तर प्रदेश की ऊर्जा व्यवस्था बल्कि सरकारी पारदर्शिता और जवाबदेही के भविष्य को भी प्रभावित कर सकता है। अब देखना यह है कि सरकार इन मांगों पर क्या रुख अपनाती है।
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