विशेष रिपोर्ट
कृषि विकास की नई पहल
बिजनौर ने फॉर्मर रजिस्ट्री में मारी बाज़ी, बना पूरे प्रदेश में नंबर वन!
✍️ रिपोर्ट: अवनीश त्यागी
उत्तर प्रदेश में किसानों की डिजिटल पहचान को मज़बूती देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है—फॉर्मर रजिस्ट्री अभियान। और इस रेस में बिजनौर ज़िले ने सभी जिलों को पछाड़ते हुए प्रदेश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है।
मुख्य आंकड़े:
- बिजनौर में कुल 4,13,609 किसान पंजीकृत हैं।
- इनमें से 2,38,456 किसानों की फॉर्मर रजिस्ट्री पूर्ण हो चुकी है।
- इस तरह बिजनौर ने 57.65% की रजिस्ट्रेशन दर के साथ प्रदेश में टॉप किया है।
- प्रदेशभर की औसत रजिस्ट्री दर मात्र 49.82% है।
क्या है फॉर्मर रजिस्ट्री और क्यों है ज़रूरी?
फॉर्मर रजिस्ट्री किसानों की एक डिजिटल पहचान प्रणाली है, जिससे केंद्र और राज्य सरकार की कृषि योजनाओं का सीधा लाभ सुनिश्चित किया जा सके।
यदि कोई किसान इस रजिस्ट्रेशन से वंचित रहता है तो किसान सम्मान निधि जैसी योजनाएं बाधित हो सकती हैं।
घनश्याम वर्मा,उप निदेशक (कृषि प्रसार) की अपील:
“जिन किसानों ने अभी तक रजिस्ट्रेशन नहीं कराया है, वे जल्द से जल्द यह प्रक्रिया पूरी कर लें।”
✅ रजिस्ट्रेशन के लिए आवश्यक दस्तावेज़:
- आधार कार्ड
- आधार से लिंक मोबाइल नंबर
- खतौनी की प्रति
- नजदीकी जन सेवा केंद्र से रजिस्ट्रेशन कराएं
🛑 बिना रजिस्ट्रेशन नुकसान तय:
फॉर्मर रजिस्ट्री न कराने वाले किसानों की केंद्र सरकार की योजनाओं से मिलने वाली वित्तीय सहायता रुक सकती है, जिसका सीधा असर उनकी खेती और जीवन पर पड़ सकता है।
🟢 बिजनौर मॉडल बन रहा प्रेरणा:
बिजनौर की यह उपलब्धि राज्य के अन्य जिलों के लिए प्रेरणास्रोत बन सकती है। प्रशासन की सक्रियता और किसानों की जागरूकता ने यह मुकाम हासिल किया है।
बिजनौर ने यह साबित कर दिया है कि जब किसान और प्रशासन साथ चलें, तो डिजिटल क्रांति खेतों तक पहुंच सकती है। अब ज़रूरत है कि शेष 1.75 लाख किसान भी जल्द से जल्द रजिस्ट्रेशन कर, योजनाओं का लाभ उठाएं।
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