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उत्तर प्रदेश में विद्युत कर्मियों का निजीकरण के खिलाफ संघर्ष जारी

उत्तर प्रदेश में विद्युत कर्मियों का निजीकरण के खिलाफ संघर्ष जारी
119वें दिन भी प्रदेशव्यापी विरोध प्रदर्शन

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण के विरोध में विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति का आंदोलन लगातार 119वें दिन भी जारी रहा। कर्मचारियों का कहना है कि निजीकरण की प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार किया जा रहा है, और इसकी पुष्टि ट्रांजैक्शन कंसल्टेंट की नियुक्ति से जुड़ी अनियमितताओं से होती है। संघर्ष समिति ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इस प्रक्रिया को तत्काल निरस्त करने की मांग की है, यह दावा करते हुए कि यह उनकी “जीरो टॉलरेंस नीति” की खुल्लम-खुल्ला अवहेलना है।

निजीकरण के नाम पर भ्रष्टाचार?

संघर्ष समिति का आरोप है कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण की प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है। ट्रांजैक्शन कंसल्टेंट की नियुक्ति में किए गए बदलावों ने संदेह को और गहरा दिया है। पहले जारी आरएफपी (रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल) में कनफ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट का प्रावधान था, लेकिन बाद में इसे हटा दिया गया।

विशेष रूप से, जिस कंपनी ग्रांट थॉर्टन को ट्रांजैक्शन कंसल्टेंट नियुक्त किया जा रहा है, वही कंपनी उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन के तहत मीटरिंग का कार्य भी कर रही है। संघर्ष समिति ने यह भी उजागर किया कि कंपनी ने पावर कॉरपोरेशन के साथ हुए एक गुप्त समझौते का हवाला देकर अपने मौजूदा कार्यों का खुलासा करने से इनकार किया है। यह सवाल खड़ा करता है कि जब एक ही कंपनी वितरण निगमों में मीटरिंग कर रही है, तो उसे निजीकरण की प्रक्रिया का भी हिस्सा क्यों बनाया जा रहा है?

बिजली कर्मियों का बढ़ता विरोध

संघर्ष समिति का कहना है कि इलेक्ट्रिसिटी एक्ट 2003 के सेक्शन 131 के तहत निजीकरण से पहले संबंधित वितरण निगमों की परिसंपत्तियों का उचित मूल्यांकन किया जाना चाहिए था, जो नहीं किया गया। साथ ही, निगमों की राजस्व क्षमता का भी आकलन नहीं किया गया। इससे स्पष्ट संकेत मिलता है कि लाखों करोड़ रुपये की परिसंपत्तियों को बेचा जा रहा है, और इसमें बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार होने की आशंका है।

इस विरोध को तेज करने के लिए संघर्ष समिति ने 29 मार्च को वाराणसी में एक बिजली महापंचायत आयोजित करने की घोषणा की है। इसमें निजीकरण की प्रक्रिया में हो रहे भ्रष्टाचार के और भी खुलासे किए जाएंगे। समिति के नेताओं ने दावा किया कि किसी भी कीमत पर निजीकरण को सफल नहीं होने दिया जाएगा।

प्रदेशभर में प्रदर्शन जारी

आज प्रदेश के प्रमुख शहरों—वाराणसी, आगरा, मेरठ, कानपुर, गोरखपुर, प्रयागराज, मिर्जापुर, आजमगढ़, बस्ती, अलीगढ़, मथुरा, झांसी, बांदा, बरेली, अयोध्या, ओबरा, पिपरी और अनपरा—में विद्युत कर्मियों ने विरोध सभाएँ कीं। इन सभाओं में बड़ी संख्या में कर्मचारी शामिल हुए और सरकार से निजीकरण की प्रक्रिया को तत्काल रोकने की मांग की।

क्या सरकार झुकेगी?

योगी सरकार पहले भी कई बार निजीकरण के पक्ष में अपना रुख स्पष्ट कर चुकी है, लेकिन जब सरकारी कर्मचारियों की एकजुटता इतनी मजबूत हो, तो सरकार के लिए इसे नजरअंदाज करना आसान नहीं होगा। यदि सरकार निजीकरण की इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने पर अड़ी रहती है, तो आने वाले दिनों में यह आंदोलन और उग्र हो सकता है।

(लेखक की राय: सरकार को चाहिए कि वह कर्मचारियों की चिंताओं को गंभीरता से ले और निजीकरण की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाए। यदि भ्रष्टाचार के आरोप सही हैं, तो यह प्रदेश की ऊर्जा व्यवस्था के लिए गंभीर संकट खड़ा कर सकता है।)

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