बिजनौर महिंद्रा तिरुपति शोरूम पर भारतीय किसान यूनियन का धरना
वन विभाग की ज़मीन पर अवैध कब्ज़े के आरोप
BIJNOR. बिजनौर के तिरुपति महिंद्रा शोरूम के खिलाफ भारतीय किसान यूनियन (BKU) ने कड़ा रुख अपनाते हुए तालाबंदी कर दी है। यह विरोध प्रदर्शन शोरूम प्रबंधन की लापरवाही और वन विभाग की ज़मीन पर अवैध कब्ज़े के खिलाफ किया गया।
क्या है मामला?
BKU के जिला अध्यक्ष सोनू चौधरी की स्कॉर्पियो गाड़ी में तकनीकी खराबी के चलते आग लग गई थी। यह गाड़ी पिछले 15 दिनों से तिरुपति महिंद्रा शोरूम में खड़ी है, लेकिन अब तक शोरूम प्रबंधन की ओर से कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इसी के विरोध में भारतीय किसान यूनियन के कार्यकर्ताओं ने शोरूम पर तालाबंदी कर दी और धरने पर बैठ गए।
वन विभाग की ज़मीन पर अवैध कब्ज़े के आरोप
इस विवाद में एक और गंभीर मुद्दा सामने आया है। BKU ने आरोप लगाया है कि महिंद्रा तिरुपति शोरूम ने वन विभाग की जमीन पर अवैध रूप से कब्ज़ा कर गेट बना लिया है और शोरूम का सामने वाला हिस्सा भी वन विभाग की ज़मीन पर स्थित है। जिला अध्यक्ष सोनू चौधरी ने इस मामले की शिकायत महेश गौतम (रेंजर) से की, जिसके बाद वन विभाग ने इस कब्ज़े पर नोटिस जारी किया।
धरना स्थल पर बड़ी संख्या में किसान नेता मौजूद
इस धरने में भारतीय किसान यूनियन के कई प्रमुख नेता मौजूद रहे, जिनमें तहसील अध्यक्ष कमल सिंह, जिला महासचिव सुनील प्रधान, विजय पहलवान, ब्लॉक अध्यक्ष अमरपाल सिंह, मंडल उपाध्यक्ष शिवकुमार, मोहम्मद याकूब, मोहम्मद हनीफ, संजीव कुमार, हरीराज सिंह, वीरेंद्र सिंह, अंकुर चौधरी, मुकुल चौधरी, गजेंद्र सिंह टिकैत, मुकुल शेरावत और अजय बालियां शामिल रहे।
क्या होगी आगे की कार्रवाई?
इस विरोध प्रदर्शन के बाद अब महिंद्रा तिरुपति शोरूम प्रबंधन पर दबाव बढ़ गया है। BKU ने साफ किया है कि जब तक गाड़ी से जुड़े मामले में संतोषजनक जवाब नहीं दिया जाता और वन विभाग की ज़मीन पर अवैध कब्ज़ा हटाया नहीं जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
वन विभाग भी इस मामले में अब सक्रिय हो चुका है और जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। यदि अवैध कब्ज़े की पुष्टि होती है, तो कानूनी कार्रवाई की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।
निष्कर्ष
बिजनौर में महिंद्रा तिरुपति शोरूम के खिलाफ उठी इस आवाज़ ने न सिर्फ एक वाहन से जुड़ी समस्या को उजागर किया, बल्कि वन विभाग की ज़मीन पर अवैध कब्ज़े जैसे गंभीर मुद्दे को भी सामने रखा। भारतीय किसान यूनियन की इस कार्रवाई का असर प्रशासन और शोरूम प्रबंधन पर क्या पड़ता है, यह देखना दिलचस्प होगा।











