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अवैध मिट्टी खनन प्रशासन की मिलीभगत: ऑडियो में उजागर हुआ SDM का भ्रष्टाचार

अवैध मिट्टी खनन प्रशासन की मिलीभगत: ऑडियो में उजागर हुआ SDM का भ्रष्टाचार

BIJNOR . अवैध मिट्टी खनन को लेकर प्रशासन की भूमिका हमेशा संदेह के घेरे में रही है। लेकिन जब भ्रष्टाचार को लेकर किए गए आरोपों की पुष्टि खुद प्रशासनिक अधिकारियों की बातचीत से होने लगे, तो मामला और गंभीर हो जाता है। हाल ही में सामने आई एक ऑडियो रिकॉर्डिंग ने इस मुद्दे पर प्रशासन की संदिग्ध भूमिका को उजागर कर दिया है। इस ऑडियो में एक पत्रकार और उप जिलाधिकारी (SDM) के बीच हुई बातचीत रिकॉर्ड है, जिसमें SDM खुद को बचाने के लिए कुतर्कों का सहारा लेते नजर आ रहे हैं।

ऑडियो का खुलासा: जब SDM खुद फंसते नजर आए

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पत्रकार: सर, आपके इलाके में मिट्टी खनन की शिकायत की थी। 

SDM: हमने चैक कराया था कोई अवैध खनन नहीं किया जा रहा है। उनके पास रव्वना बैगरा सब था।

पत्रकार: लेकिन लोडर का इस्तेमाल भी किया जा रहा है, लोडर का इस्तेमाल किया जा सकता है,लोडर सेमी ऑटोमैटिक में आता है। बस JCB नहीं चलनी चाहिए…

पत्रकार:  बिना नंबर के ट्रैक्टर चल रहे हैं। 

SDM (गुस्से मे) इसके लिए ARTO से बात कीजिए।

ऑडियो से हुआ खुलासा: SDM के संरक्षण में चल रहा अवैध खनन

इस बातचीत से स्पष्ट हो जाता है कि SDM न केवल अवैध खनन से वाकिफ हैं, बल्कि वे इसे रोकने में दिलचस्पी भी नहीं रखते। बल्कि यह कहना अनुचित नहीं होगा कि अवैधानिक खनन को उनका पूरा संरक्षण हासिल है। जेसीबी मशीनों पर तो प्रतिबंध की बात मानी, लेकिन लोडर को सेमी ऑटोमैटिक बता कर, उसके इस्तेमाल की खुली छूट दी है। जबकि खनन परमिशन में स्पष्ट लिखा होता है कि केवल हस्तचलन विधि से ही मिट्टी निकालने की अनुमति है। 

सूत्रों के अनुसार, अवैध खनन करने वाले ठेकेदारों से SDM को माहवारी (नियमित रिश्वत) मिलती है, जिसके कारण वे इस गोरखधंधे पर आंख मूंदे बैठे हैं। जब कोई खननकर्ता माहवारी देना बंद कर देता है, तो प्रशासन उसी के ट्रैक्टर-ट्रॉली को जब्त कर कार्रवाई का दिखावा करता है। लेकिन जिनसे माहवारी मिलती रहती है, उनके लोडर और मशीनें बेरोकटोक चलती रहती हैं।

प्रशासन की मिलीभगत पर उठते सवाल

इस मामले में कई गंभीर सवाल खड़े होते हैं:

1. अगर SDM को खनन स्थल की निगरानी की जिम्मेदारी दी गई है, तो वे मशीनों के उपयोग को लेकर चुप क्यों हैं?

2. जेसीबी और लोडर, दोनों ही मशीनें हैं—फिर एक पर रोक और दूसरी पर चुप्पी क्यों?

3. जब पत्रकार ने गैर-पंजीकृत ट्रैक्टर-ट्रॉलियों पर सवाल उठाया, तो SDM ने ARTO पर जिम्मेदारी डालकर खुद को बचाने की कोशिश क्यों की?

4. क्या प्रशासन की कार्रवाई सिर्फ दिखावे के लिए होती है, ताकि असली दोषी बच सकें?

क्या हो सकता है समाधान ?

1. स्वतंत्र जांच: इस मामले की जांच किसी निष्पक्ष एजेंसी से कराई जाए, ताकि प्रशासनिक मिलीभगत का खुलासा हो सके।

2. सख्त कानून और जवाबदेही: ऐसे अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए जो अवैध खनन को संरक्षण देते हैं।

3. जनता की भागीदारी: स्थानीय लोगों और पत्रकारों को गुमनाम तरीके से शिकायत दर्ज कराने की सुविधा दी जाए।

4. तकनीकी निगरानी: खनन स्थलों की निगरानी के लिए ड्रोन और सैटेलाइट सर्विलांस का उपयोग किया जाए।

यह ऑडियो रिकॉर्डिंग इस बात का पुख्ता सबूत है कि SDM की भूमिका संदिग्ध है और वे अवैध खनन को संरक्षण दे रहे हैं। अब देखना यह होगा कि प्रशासन और सरकार इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई करती है या फिर यह मामला भी अन्य घोटालों की तरह धीरे-धीरे दबा दिया जाएगा। जनता को इस भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठानी होगी, ताकि प्राकृतिक संसाधनों की यह लूट रोकी जा सके।

 

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