Target Tv Live

पर्वतीय क्षेत्रों में ढींगरी मशरूम उत्पादन: आजीविका के नए आयाम

पर्वतीय क्षेत्रों में ढींगरी मशरूम उत्पादन: आजीविका के नए आयाम

पौड़ी जनपद के एकेश्वर विकासखंड में किसानों द्वारा ढींगरी मशरूम उत्पादन की पहल ने स्थानीय स्तर पर आजीविका के नए अवसरों को जन्म दिया है। पारंपरिक कृषि पर निर्भर सीमांत किसान अब नवीन सोच और योजनाओं के माध्यम से अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत कर रहे हैं। इस दिशा में “द हंस फाउंडेशन” का योगदान महत्वपूर्ण है, जिसने 25 गांवों के 284 उत्पादक समूह सदस्यों के साथ मिलकर ग्रामीण आजीविका के विविध साधनों पर काम किया है।

तीन गांवों में शुरू हुआ मशरूम उत्पादन

चैधार, मैडगांव, और हलूणी गांवों में 31 उत्पादक समूहों फ़को लेकर मशरूम उत्पादन यूनिट स्थापित की गई हैं। इन समूहों के सदस्यों को मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। इसके तहत विपकास, कोसी (अल्मोड़ा), और स्थानीय संस्थानों से प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद किसानों ने ढींगरी मशरूम उत्पादन शुरू किया है।

स्थानीय बाजार में मांग और कीमत

किसानों द्वारा उत्पादित मशरूम को स्थानीय बाजारों जैसे सतपुली, एकेश्वर, संगलाकोटी और ग्रामीण क्षेत्रों में बेचा जा रहा है। यह मशरूम 150 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बेचा जा रहा है, जिससे किसानों को सीधा लाभ हो रहा है। स्थानीय मांग में वृद्धि और उच्च गुणवत्ता के कारण इस पहल ने क्षेत्रीय रोजगार और आर्थिक समृद्धि को बढ़ावा दिया है।

प्रशिक्षण और प्रबंधन का योगदान

द हंस फाउंडेशन के परियोजना प्रबंधक श्री दिलीप कुलेगी के अनुसार, परियोजना के तहत किसानों को मशरूम उत्पादन के तकनीकी पहलुओं से परिचित कराया गया। प्रशिक्षण के माध्यम से किसानों ने न केवल उत्पादन बढ़ाया, बल्कि विपणन में भी दक्षता हासिल की।

आर्थिक और सामाजिक प्रभाव

यह पहल न केवल किसानों की आय बढ़ाने में सहायक है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार के नए अवसर भी प्रदान कर रही है। इस परियोजना से जुड़े किसानों का आत्मविश्वास बढ़ा है, और वे कृषि को एक नई दिशा देने में सक्षम हो रहे हैं।

पर्वतीय क्षेत्रों में ढींगरी मशरूम उत्पादन की यह पहल ग्रामीण विकास और रोजगार सृजन का एक सफल उदाहरण है। यदि ऐसी परियोजनाओं को और विस्तार दिया जाए, तो यह न केवल किसानों की आय बढ़ाने में सहायक होगा, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी सुदृढ़ करेगा। “द हंस फाउंडेशन” की यह पहल स्थायी विकास और सामुदायिक सहभागिता की दिशा में एक प्रेरणादायक कदम है।

 

Leave a Comment

यह भी पढ़ें