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गन्ने का भाव ₹550 करो, वरना उग्र आंदोलन! BKU टिकैत ने अमरोहा में घेरा प्रशासन, 6 सूत्रीय मांगों की पूरी इनसाइड स्टोरी

गन्ने का भाव ₹550 करो, वरना उग्र आंदोलन! BKU टिकैत ने अमरोहा में घेरा प्रशासन, 6 सूत्रीय मांगों की पूरी इनसाइड स्टोरी

डिजिटल न्यूज डेस्क, TargetTvLive (जितेंद्र शर्मा)।

उत्तर प्रदेश के पेराई सत्र 2026-27 की शुरुआत से ठीक पहले पश्चिमी यूपी में किसान राजनीति की गरमाहट अचानक बढ़ गई है। अमरोहा जिले के मंडी धनौरा में भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) ने गन्ने का राज्य परामर्शित मूल्य (SAP) 550 रुपये प्रति क्विंटल घोषित करने की मांग को लेकर प्रशासनिक महकमे में हलचल तेज कर दी है। प्रदेश उपाध्यक्ष चौधरी आलोक कुमार के नेतृत्व में एकजुट हुए दर्जनों किसान नेताओं ने उपजिलाधिकारी (SDM) शैलेश कुमार दुबे को 6 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपकर शासन को स्पष्ट अल्टीमेटम दे दिया है—“समाधान नहीं, तो बड़ा आंदोलन।”

यह केवल एक ज्ञापन की औपचारिकता नहीं, बल्कि आगामी पेराई सत्र और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को लेकर किसानों के पनपते असंतोष का सीधा संकेत है।

गन्ने का गणित: ₹550 प्रति क्विंटल की मांग के पीछे का तर्क

भाकियू टिकैत की सबसे प्रमुख मांग वर्ष 2026-27 के लिए गन्ने का समर्थन मूल्य ₹550 प्रति क्विंटल करने और मिलों पर अटके पुराने बकाया का ब्याज सहित भुगतान कराने की है।

  • लागत में वृद्धि: खाद, डीजल, कीटनाशक और श्रम की लागत में लगातार बढ़ोतरी के कारण किसान मौजूदा दरों पर गन्ने की खेती को घाटे का सौदा बता रहे हैं।
  • समयबद्ध पर्चियां: संगठन ने वेव शुगर मिल धनौरा समेत जिले की सभी चीनी मिलों से 25 अक्टूबर तक गन्ने की पर्चियां जारी करने की शर्त रखी है, ताकि सत्र के समय पर शुरू होने में कोई अड़चन न आए।

बुनियादी ढांचे से लेकर आवारा पशुओं तक: स्थानीय मुद्दों का बड़ा पैकेज

किसानों ने सिर्फ फसलों के दाम ही नहीं, बल्कि जनजीवन को प्रभावित करने वाले अन्य ज्वलंत मुद्दों पर भी प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया है। ज्ञापन में प्रमुख रूप से मांग की गई है कि पेराई सत्र 2026-27 के लिए गन्ने का मूल्य ₹550 प्रति क्विंटल घोषित किया जाए और पुराना बकाया ब्याज सहित दिया जाए। साथ ही, वेव शुगर मिल धनौरा व अन्य मिलों द्वारा आगामी 25 अक्टूबर तक किसानों को अनिवार्य रूप से गन्ने की पर्चियां जारी की जाएं।

क्षेत्रीय विकास और आवागमन को सुगम बनाने के लिए धनौरा-फीना मार्ग से धनौरा-अमरोहा रोड तक बैराज मध्य गंगा नहर की दोनों पटरियों के रास्तों को तुरंत पक्का किया जाए। इसके अलावा, विकास खंड धनौरा के ग्राम डींगरा बिजली घर से ग्राम पारा खालसा तक प्रस्तावित लेकिन रुके हुए सड़क निर्माण कार्य को युद्धस्तर पर दोबारा शुरू कराया जाए। किसानों की सुरक्षा के लिहाज से आवारा पशुओं, बंदरों, कुत्तों और तेंदुए के आतंक से निजात दिलाने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की गई है। अंत में, धनौरा-अमरोहा रोड के किनारे नगरपालिका द्वारा लगातार डाले जा रहे कचरे पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई ताकि आसपास के इलाकों में फैल रही गंदगी और बीमारियों के खतरे को रोका जा सके।

राजनीतिक व प्रशासनिक विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण

1. क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और बुनियादी ढांचा: डींगरा बिजली घर से पारा खालसा मार्ग का निर्माण कार्य रुका होने से दर्जनों गांवों का आवागमन बाधित है। वहीं, बैराज मध्य गंगा नहर की दोनों पटरियों को पक्का करने की मांग न केवल किसानों की उपज को मिल तक पहुंचाने का समय घटाएगी, बल्कि क्षेत्र के ग्रामीण ट्रांसपोर्टेशन का कायाकल्प भी करेगी।

2. नागरिक स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण: धनौरा-अमरोहा रोड पर नगरपालिका द्वारा खुले में कचरा फेंके जाने से आसपास के क्षेत्रों में बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। किसानों द्वारा इस मुद्दे को ज्ञापन में प्राथमिकता देना दर्शाता है कि यूनियन अब शुद्ध रूप से कृषि संबंधी मुद्दों तक सीमित न रहकर नागरिक अधिकारों के लिए भी मुखर हो रही है।

3. तेंदुए का खौफ: पश्चिम यूपी के तराई और नहर पट्टी से सटे इलाकों में तेंदुए और आवारा पशुओं की मौजूदगी ने किसानों का खेतों में रात को पानी लगाना या काम करना जानलेवा बना दिया है।

किसान नेताओं की चेतावनी और भावी रणनीति

प्रशासन को ज्ञापन सौंपने के दौरान किसान नेताओं के तेवर काफी सख्त नजर आए। यूनियन ने साफ कर दिया है कि यदि तय समयसीमा के भीतर ज्ञापन में उठाई गई मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन को तहसील स्तर से बढ़ाकर जिला और प्रदेश स्तर तक ले जाया जाएगा।

“किसानों की उपेक्षा अब बर्दाश्त नहीं होगी। यदि समय रहते चीनी मिलों ने भुगतान और पर्ची प्रक्रिया पूरी नहीं की तथा स्थानीय सड़कों व सुरक्षा का समाधान नहीं हुआ, तो भाकियू टिकैत सड़कों पर उतरकर उग्र प्रदर्शन करेगी, जिसकी पूरी जवाबदेही शासन-प्रशासन की होगी।” — चौधरी आलोक कुमार, प्रदेश उपाध्यक्ष (भाकियू टिकैत)

उपस्थिति: इस मौके पर प्रदेश उपाध्यक्ष चौधरी आलोक कुमार, संजय सिंह अम्हेड़ा, हेमराज सिंह, धर्मसिंह, अतर सिंह, बलजीत सिंह, बालेश कुमार, झूंडे सिंह, नीटू सिंह, रणवीर सिंह, सतपाल सिंह चौहान, महीपाल, अरविंद सिंह, प्रेम सिंह, रामवीर सिंह और चंद्रप्रकाश समेत भारी संख्या में किसान एवं यूनियन पदाधिकारी मौजूद रहे।

(यह विशेष रिपोर्ट TargetTvLive के लिए जितेंद्र शर्मा द्वारा तैयार की गई है। कृषि, प्रशासन और ग्रामीण यूपी से जुड़ी हर छोटी-बड़ी अपडेट के लिए बने रहिए हमारे साथ।)

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