महिला कर्मचारी ने लगाया उत्पीड़न का आरोप, अधिशासी अभियंता बोले—काम नहीं करतीं, जांच में देंगे जवाब

बिजनौर सिंचाई विभाग में आरोप-प्रत्यारोप से बढ़ा विवाद, महिला कर्मचारी ने की जांच की मांग; अधिकारी ने कामकाज पर उठाए सवाल
बिजनौर। सिंचाई विभाग के कार्यालय में एक महिला कर्मचारी की शिकायत के बाद विवाद सामने आया है। महिला कर्मचारी ने अधिकारियों और कर्मचारियों पर मानसिक रूप से परेशान करने तथा तबादले का दबाव बनाने के आरोप लगाए हैं। वहीं, अधिशासी अभियंता करण सिंह का कहना है कि महिला कर्मचारी काम नहीं करतीं और काम के लिए कहने पर आरोप लगाने लगती हैं। दोनों पक्षों के अलग-अलग दावों के बीच अब मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी हो गई है।
अवनीश त्यागी | TargetTvLive
महिला कर्मचारी ने शिकायत में क्या कहा?
मध्य गंगा नहर निर्माण खंड-5 में तैनात महिला कर्मचारी सुषमा गौतम ने 17 अक्टूबर 2026 को दिए अपने प्रार्थनापत्र में कार्यालय में परेशान किए जाने और मानसिक तनाव देने के आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा है कि कामकाज और पत्राचार को लेकर उन्हें लगातार परेशान किया जा रहा है। शिकायत में तबादले का दबाव बनाने का आरोप भी लगाया गया है।
महिला कर्मचारी ने मामले की जांच कराने और आंतरिक शिकायत समिति के माध्यम से कार्रवाई करने की मांग की है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की जांच करने का भी अनुरोध किया है।
अधिशासी अभियंता ने आरोपों को नकारा
महिला कर्मचारी की शिकायत पर अधिशासी अभियंता कर्णपाल सिंह ने कहा कि संबंधित कर्मचारी अपना काम नहीं करती हैं और अनर्गल आरोप लगाती रहती हैं। उनका कहना है कि जब भी उन्हें काम दिया जाता है, वह काम पूरा नहीं करतीं। काम से संबंधित पत्र लिखने वाले बाबू पर भी वह आरोप लगाने लगती हैं।
कर्णपाल सिंह के मुताबिक, अब उनके स्थान पर काम कराने के लिए दूसरे ड्राफ्टिंग कर्मचारी की व्यवस्था कर दी गई है। उन्होंने कहा कि इस मामले में उनके पास तथ्य उपलब्ध हैं और जब जांच होगी तो वह अपना जवाब देंगे।
जांच से ही सामने आएगी सच्चाई
इस मामले में महिला कर्मचारी और अधिशासी अभियंता के दावे एक-दूसरे से अलग हैं। महिला कर्मचारी जहां खुद को परेशान किए जाने की शिकायत कर रही हैं, वहीं अधिशासी अभियंता ने उनके कामकाज पर सवाल उठाए हैं।
ऐसे में जरूरी है कि विभाग शिकायत और जवाब, दोनों को ध्यान में रखकर जांच करे। कार्यालय के पत्राचार, दिए गए काम और उनके निस्तारण से जुड़े रिकॉर्ड की जांच होने पर स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
फिलहाल उपलब्ध दस्तावेजों में किसी जांच का अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है। इसलिए किसी भी पक्ष के आरोपों को जांच से पहले सही या गलत ठहराना उचित नहीं होगा।
अब विभाग की कार्रवाई पर नजर
महिला कर्मचारी ने निष्पक्ष जांच की मांग की है, जबकि अधिशासी अभियंता ने जांच होने पर अपना पक्ष रखने की बात कही है। अब देखना होगा कि विभाग इस शिकायत पर क्या कदम उठाता है और जांच के जरिए विवाद का समाधान कैसे होता है।
सरकारी कार्यालयों में कर्मचारियों के कामकाज की जवाबदेही जरूरी है, लेकिन किसी कर्मचारी की उत्पीड़न संबंधी शिकायत की निष्पक्ष सुनवाई भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। दोनों पहलुओं की जांच होने से ही मामले की वास्तविक स्थिति सामने आ सकेगी।
रिपोर्ट: अवनीश त्यागी | TargetTvLive.com












