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एक तरफ बर्बाद होता खाना, दूसरी तरफ भूखे पेट! जानिए 16 अक्टूबर का यह दिन क्यों है हर इंसान के लिए सबसे बड़ा सरोकार

World Food Day:

एक तरफ बर्बाद होता खाना, दूसरी तरफ भूखे पेट! जानिए 16 अक्टूबर का यह दिन क्यों है हर इंसान के लिए सबसे बड़ा सरोकार

By अवनीश त्यागी | TargetTvLive : 16 अक्टूबर | BIJNOR 

क्या आपने कभी सोचा है कि रोज़ हमारी थालियों से कितना भोजन कबाड़ और कूड़ेदान में चला जाता है, जबकि इसी दुनिया में हर रात लाखों मासूम भूखे पेट सोने को मजबूर हैं?

हर साल 16 अक्टूबर को मनाया जाने वाला विश्व खाद्य दिवस (World Food Day) महज एक औपचारिक तारीख नहीं है, बल्कि यह उन करोड़ों जिंदगियों की खामोश चीख है जो कुपोषण और भुखमरी की भीषण त्रासदी झेल रहे हैं। यह दिन पूरी इंसानियत को झकझोर कर याद दिलाता है कि पेट भरना केवल इंसान की जरूरत नहीं, बल्कि उसका मौलिक और बुनियादी अधिकार है।

16 अक्टूबर का इतिहास: 1945 से जारी वैश्विक जंग

विश्व खाद्य दिवस मनाने की नींव संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) की स्थापना के साथ रखी गई थी। वर्ष 1945 में इसी ऐतिहासिक तारीख को FAO का गठन हुआ था। तब से लेकर आज तक यह दिन दुनिया के 150 से अधिक देशों में खाद्य सुरक्षा, भुखमरी के खात्मे और एकजुटता का सबसे बड़ा वैश्विक मंच बन चुका है।

TargetTvLive की विशेष रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक खाद्य संकट का समाधान केवल अनाज का उत्पादन बढ़ाने से नहीं होगा, बल्कि वितरण प्रणाली में पारदर्शिता लाने और हर स्तर पर भोजन की बर्बादी रोकने से ही संभव है।

भुखमरी के खिलाफ लड़ाई के तीन मुख्य आधार

दुनिया को भुखमरी के दलदल से बाहर निकालने के लिए तीन मोर्चों पर एक साथ काम करने की सख्त जरूरत है:

  • ‘ज़ीरो हंगर’ यानी भूख का अंत: वैश्विक स्तर पर संसाधनों और खाद्यान्न का सही व निष्पक्ष वितरण बेहद जरूरी है, ताकि दुनिया का कोई भी नागरिक भूख से न तड़पे।
  • पोषणयुक्त और सुरक्षित भोजन की गारंटी: केवल पेट भरना काफी नहीं है। हर इंसान को ऐसा भोजन मिलना चाहिए जो आवश्यक पोषक तत्वों (Nutrients) से भरपूर हो और स्वास्थ्य के लिए पूरी तरह सुरक्षित हो।
  • जलवायु-अनुकूल एवं टिकाऊ कृषि प्रणाली: बदलते मौसम और जलवायु परिवर्तन के इस दौर में हमें ऐसी आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाना होगा, जो हमारी मिट्टी और पर्यावरण को बिना नुकसान पहुँचाए आने वाले दशकों तक निर्बाध अनाज पैदा कर सकें।

यह दिन क्यों है हर आम नागरिक का सरोकार?

भोजन कोई दान या दया की वस्तु नहीं, बल्कि हर नागरिक का जन्मसिद्ध अधिकार है। आज संयुक्त राष्ट्र का विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) जैसे शीर्ष वैश्विक संगठन इस दिन के जरिए दुनिया भर की सरकारों को अपनी खाद्य और कृषि नीतियों को दुरुस्त करने की चेतावनी देते हैं। इसके साथ ही, यह अभियान शादी-समारोहों और दैनिक जीवन में होने वाली भोजन की बर्बादी के खिलाफ एक सामाजिक क्रांति का आह्वान करता है।

TargetTvLive की अपील: बदलाव की शुरुआत अपनी थाली से करें

यदि हम वैश्विक खाद्य संकट और कुपोषण को खत्म करना चाहते हैं, तो इसकी शुरुआत हमें अपने घर की थाली से करनी होगी। जितनी भूख हो उतना ही परोसें, स्थानीय व टिकाऊ कृषि उत्पादों को प्राथमिकता दें, और जरूरतमंदों तक भोजन पहुँचाने वाले सामाजिक अभियानों में अपना योगदान दें।

TargetTvLive आपसे अपील करता है कि इस विश्व खाद्य दिवस पर भोजन का सम्मान करने का संकल्प लें और ‘भूखमुक्त विश्व’ के निर्माण में अपना कदम बढ़ाएं।

 आपकी राय हमारे लिए महत्वपूर्ण है

क्या भारत में शादियों और कार्यक्रमों में होने वाली भोजन की बर्बादी को रोकने के लिए सख्त कानूनी प्रावधान होने चाहिए? अपनी बेबाक राय नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें!

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