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महिला किसानों का ‘दम’ देखकर गदगद हुए वैज्ञानिक KVK नगीना में रचा गया इतिहास, जाने कैसे बदल रही है बिजनौर की खेती 

महिला किसानों का ‘दम’ देखकर गदगद हुए वैज्ञानिक केवीके नगीना में रचा गया इतिहास, जाने कैसे बदल रही है बिजनौर की खेती 

खेती में ‘नारी शक्ति’ का नया दौर: केवीके नगीना में महिला किसान दिवस पर सजा सम्मान का मंच, वैज्ञानिक खेती से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम

विशेष विश्लेषणात्मक रिपोर्ट: अवनीश त्यागी : TargetTvLive (डिजिटल न्यूज़ डेस्क)

बिजनौर, 16 अक्टूबर 2026।

भारतीय कृषि का ताना-बाना अब केवल पारंपरिक हल और कुदाल तक सीमित नहीं रह गया है; इसमें तकनीक, आधुनिकता और सबसे बढ़कर ‘महिला सशक्तिकरण’ का एक नया अध्याय जुड़ चुका है। अंतर्राष्ट्रीय महिला किसान वर्ष–2026 के उपलक्ष्य में कृषि विभाग, जनपद बिजनौर द्वारा कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके), नगीना के प्रांगण में आयोजित ‘महिला किसान दिवस’ केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि यह ग्रामीण भारत में आ रहे उस बड़े आर्थिक बदलाव की बानगी था, जिसकी धुरी देश की महिला किसान बन रही हैं।

TargetTvLive के इस विशेष विश्लेषण में जानिए कि किस तरह बिजनौर की महिला कृषक कृषि क्षेत्र में क्रांति की नई इबारत लिख रही हैं।

पारंपरिक हल से ‘ड्रोन और डेटा’ तक: कृषि में बढ़ता महिलाओं का वर्चस्व

कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में जुटी महिला कृषकों की उत्साहजनक भागीदारी ने यह साबित कर दिया कि वे अब कृषि कार्यों में केवल सहयोगी की भूमिका में नहीं हैं। बीज चयन से लेकर फसल सुरक्षा, कटाई-पश्चात प्रबंधन और विपणन (मंडी प्रबंधन) तक हर कदम पर उनका नेतृत्व उभरकर सामने आ रहा है।

उप कृषि निदेशक बिजनौर डॉ. घनश्याम वर्मा ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए इस बात पर विशेष बल दिया कि खाद्य सुरक्षा, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पारिवारीक आर्थिक समृद्धि की असली रीढ़ हमारी महिला किसान हैं।

“जब एक महिला किसान वैज्ञानिक पद्धतियों को सीखती है, तो वह केवल खेत की पैदावार नहीं बढ़ाती, बल्कि पूरे परिवार और भावी पीढ़ी की सोच को बदल देती है।” — डॉ. घनश्याम वर्मा, उप कृषि निदेशक

वैज्ञानिक दृष्टिकोण: लागत कम, मुनाफा ज्यादा

केवीके नगीना के वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिकों—डॉ. के.के. सिंह, डॉ. पिंटू कुमार, डॉ. प्रतिमा गुप्ता एवं डॉ. शिवांगी ने सत्र के दौरान महिला कृषकों को आधुनिक खेती के गुर सिखाए।

वैज्ञानिकों का मुख्य जोर निम्नलिखित बिंदुओं पर रहा:

  1. उन्नत बीज एवं मृदा परीक्षण: बिना योजना के खाद और दवाइयों के उपयोग से बचकर खेती की लागत (Cost of Production) को नियंत्रित करना।
  2. फसल विविधीकरण (Crop Diversification): केवल पारंपरिक फसलों पर निर्भर न रहकर सब्जियों, औषधीय पौधों और कृषि-आधारित व्यवसायों (जैसे मौनपालन, मशरूम उत्पादन) से जुड़ना।
  3. आधुनिक कृषि उपकरण: श्रम को कम करने और दक्षता बढ़ाने के लिए नवीन कृषि तकनीकों को अपनाना।

प्रगतिशील कृषक शरद कुमार सिंह ने भी अपने जमीनी अनुभवों को साझा करते हुए महिला किसानों को नई तकनीकों के प्रयोग हेतु प्रेरित किया।

प्रतिभा को पहचान: कृषि प्रतियोगिता में महिलाओं ने दिखाया दम

कार्यक्रम की सबसे आकर्षक कड़ी रही—महिला कृषि ज्ञान प्रतियोगिता। इस प्रतियोगिता में ग्रामीण महिलाओं ने वैज्ञानिक खेती, कीट प्रबंधन और कटाई-पश्चात सुरक्षा से जुड़े सवालों के जिस कुशलता से जवाब दिए, उसने उपस्थित विशेषज्ञों को भी प्रभावित किया।

उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली विजेता महिला कृषकों को मंच से सम्मानित किया गया:

  • कमलेश देवी (पत्नी विजय सिंह चौहान)
  • ममता (पत्नी विजय कुमार)
  • जगवती (पत्नी सतपाल)
  • दीक्षा (पत्नी हिमां सिंह)
  • कुमारी स्वामी (पुत्री प्रेम सिंह)

उप कृषि निदेशक और केवीके की वरिष्ठ महिला वैज्ञानिकों द्वारा इन्हें प्रशस्ति पत्र और पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। यह सम्मान केवल इन पाँच महिलाओं का नहीं, बल्कि संपूर्ण बिजनौर की उस नारी शक्ति का प्रतीक है जो खेतों में पसीना बहाकर देश का अन्न भंडार भर रही है।

TargetTvLive दृष्टिकोण: आत्मनिर्भरता का नया मॉडल

डिजिटल दौर में कृषि विकास की मुख्यधारा से महिलाओं को जोड़ना एक निर्णायक मोड़ है। केवीके नगीना में आयोजित ‘महिला किसान दिवस’ इस बात का स्पष्ट संकेत है कि जब महिला कृषकों को सही मार्गदर्शन, वैज्ञानिक ज्ञान और प्रोत्साहन मिलता है, तो वे न केवल आत्मनिर्भर बनती हैं बल्कि पूरे ग्रामीण परिदृश्य को बदलने का सामर्थ्य रखती हैं।

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