बिजनौर में गौ-संरक्षण का ‘मास्टरप्लान’: 2 नई बृहद गौशालाओं के लिए भूमि चिन्हित करने के आदेश, जीरामजी योजना से चमकेगी किस्मत!
अवनीश त्यागी | TargetTvLive
बिजनौर। “गौ माता की सेवा केवल एक प्रशासनिक दायित्व नहीं, बल्कि परम पुण्य और सामाजिक उत्तरदायित्व का कार्य है।” इसी भावना के साथ बिजनौर कलेक्ट्रेट स्थित महात्मा विदुर सभागार में जनपद स्तरीय अनुश्रवण, मूल्यांकन एवं समीक्षा समिति की उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता करते हुए जिलाधिकारी उमेश प्रताप सिंह ने जनपद में निराश्रित गोवंश के स्थायी समाधान और उनके समुचित रखरखाव को लेकर सख्त व दूरगामी निर्देश जारी किए।
प्रशासनिक सक्रियता का बड़ा उदाहरण पेश करते हुए जिलाधिकारी ने जिले में दो नई बृहद गौशालाओं की स्थापना के लिए तत्काल प्रभाव से एक-एक हेक्टेयर भूमि चिन्हित करने के निर्देश दिए। ऑनलाइन माध्यम से जुड़े सभी उप जिलाधिकारियों को इस कार्य को सर्वोच्च प्राथमिकता पर पूरा करने को कहा गया है।
जीरामजी योजना से हाई-टेक होंगी गौशालाएं
बैठक में गौवंश के बेहतर संरक्षण, सुरक्षा और खान-पान की सुविधाओं पर विस्तृत रोडमैप तैयार किया गया। जिन गौशालाओं में बाउंड्री वॉल नहीं है, वहां बाउंड्री वॉल का निर्माण कराया जाएगा। ‘जीरामजी योजना’ के तहत गौशालाओं में आधुनिक केयरटेकर रूम, भूसा भंडारण कक्ष और पॉन्ड का निर्माण कराया जाएगा। इसके साथ ही गौशालाओं में सीसीटीवी कैमरों के नियमित संचालन और प्रबंधन की समीक्षा होगी, और गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) द्वारा संचालित गो सेवा केंद्रों का भी प्रशासनिक अधिकारी नियमित निरीक्षण करेंगे।
डीएम का कड़ा संदेश: “तहसील स्तर पर उप जिलाधिकारी प्रत्येक माह अनिवार्य रूप से समीक्षा बैठक करें और धरातल पर जाकर व्यवस्थाओं का जायजा लें। सफाई, चारा, सुरक्षा और पेयजल में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी।”
आंकड़े बोलते हैं: लक्ष्य से ढाई गुना अधिक सुपुर्दगी
मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. लोकेश अग्रवाल ने जनपद में गोवंश संरक्षण का आंकड़ा प्रस्तुत करते हुए बताया कि जिले में अभूतपूर्व कार्य हुआ है। जनपद की विभिन्न सरकारी गौशालाओं में दस हजार से अधिक और निजी पंजीकृत गौशालाओं में लगभग ढाई हजार गोवंश संरक्षित हैं, जिससे कुल मिलाकर तेरह हजार से अधिक गोवंशों का संरक्षण किया जा रहा है। शासन द्वारा सहभागिता योजना के तहत निर्धारित लक्ष्य से कहीं अधिक बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए, पशुप्रेमियों को ढाई हजार से अधिक गोवंश सुपुर्द किए जा चुके हैं। इस योजना के अंतर्गत प्रत्येक गोवंश के भरण-पोषण के लिए संबंधित लाभार्थी को प्रतिदिन पचास रुपये की दर से आर्थिक सहायता दी जा रही है।
बायोगैस प्लांट से पर्यावरण और ऊर्जा संरक्षण
समीक्षा बैठक के दौरान गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बायोगैस प्लांटों के संचालन की प्रगति की भी समीक्षा की गई। प्रशासन का उद्देश्य गौशालाओं को न केवल संरक्षण केंद्र बनाना है, बल्कि उन्हें जैविक खाद व स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन के केंद्र के रूप में विकसित करना है। बैठक में विभिन्न तहसीलों एवं विकासखंडों के पशु चिकित्सा अधिकारी, उप जिलाधिकारी और संबंधित विभागों के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।
TargetTvLive विश्लेषण
बिजनौर प्रशासन का यह कदम न केवल सड़कों पर घूमने वाले निराश्रित पशुओं की समस्या से राहत दिलाएगा, बल्कि किसानों की फसलों की सुरक्षा में भी मील का पत्थर साबित होगा। सहभागिता योजना की यह बंपर सफलता यह दर्शाती है कि आम जनता और पशुप्रेमी भी शासन की योजनाओं से जुड़कर गौ-सेवा में बढ़-चढ़कर योगदान दे रहे हैं।
रिपोर्ट: अवनीश त्यागी (TargetTvLive) स्थान: बिजनौर (उत्तर प्रदेश)












