कोचिंग सेंटरों पर प्रशासन का शिकंजा, मानक टूटे तो ₹1 लाख तक जुर्माना
16 साल से कम उम्र के बच्चों के प्रवेश पर रोक, स्कूल टाइम में कोचिंग चलाने पर भी पाबंदी; फायर सेफ्टी और इमरजेंसी एग्जिट अनिवार्य
बिजनौर। जिले में मानकों को दरकिनार कर संचालित हो रहे कोचिंग सेंटर अब प्रशासन के रडार पर हैं। छात्र-छात्राओं की सुरक्षा से लेकर फीस की पारदर्शिता और संस्थानों के पंजीकरण तक, प्रशासन ने कोचिंग संचालकों के लिए नियमों की पूरी तस्वीर साफ कर दी है। नियमों का उल्लंघन मिला तो 25 हजार से लेकर एक लाख रुपये तक जुर्माना लगाने के साथ अवैध संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
कलेक्ट्रेट स्थित महात्मा विदुर सभागार में गुरुवार को जिलाधिकारी उमेश प्रताप सिंह की अध्यक्षता में जिलेभर के कोचिंग संचालकों के साथ समीक्षा बैठक हुई। बैठक में डीएम ने स्पष्ट कहा कि विद्यार्थियों की सुरक्षा से किसी भी स्तर पर समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। शासन की गाइडलाइन का पालन कराना प्रशासन की प्राथमिकता है और इसके लिए संस्थानों की नियमित निगरानी के साथ औचक निरीक्षण भी कराया जाएगा।
लखनऊ की घटना से सबक लेने की जरूरत
जिलाधिकारी ने हाल ही में लखनऊ में हुई दुखद घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए पहले से सुरक्षा इंतजाम पुख्ता करना जरूरी है। उन्होंने कोचिंग संचालकों को अग्निशमन व्यवस्था, आपातकालीन निकास और भवन सुरक्षा से जुड़े निर्धारित मानकों का अनिवार्य रूप से पालन करने के निर्देश दिए।
सभी संचालकों को शासन की गाइडलाइन के अनुपालन के संबंध में अंडरटेकिंग/शपथ पत्र भी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
16 साल से कम उम्र के बच्चों की एंट्री पर रोक
बैठक में सबसे महत्वपूर्ण निर्देशों में 16 वर्ष से कम आयु के बच्चों के प्रवेश पर रोक शामिल रही। इसके साथ ही स्कूल के निर्धारित समय में कोचिंग कक्षाएं संचालित नहीं की जा सकेंगी।
प्रशासन का जोर इस बात पर भी रहा कि कोचिंग संस्थान विद्यार्थियों और अभिभावकों को फीस, शिक्षकों तथा संस्थान से जुड़ी अन्य महत्वपूर्ण जानकारी स्पष्ट रूप से उपलब्ध कराएं।
फीस से लेकर शिकायत तक—सब कुछ होगा पारदर्शी
प्रशासन ने कोचिंग संचालकों के लिए कई अनिवार्य व्यवस्थाएं तय की हैं—
- फीस और अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां वेबसाइट पर प्रदर्शित करनी होंगी।
- विद्यार्थियों को फीस जमा करने पर अनिवार्य रूप से रसीद देनी होगी।
- प्रत्येक संस्थान में शिकायत पेटी लगानी होगी।
- सभी कोचिंग संस्थानों का DIOS कार्यालय में पंजीकरण आवश्यक होगा।
- झूठे, भ्रामक अथवा विद्यार्थियों को आकर्षित करने वाले गलत दावों वाले विज्ञापनों पर कार्रवाई होगी।
फायर सेफ्टी में लापरवाही नहीं चलेगी
बैठक में अग्निशमन विभाग के अधिकारी ने कोचिंग संस्थानों में आवश्यक सुरक्षा इंतजामों की जानकारी दी। भूतल पर संचालित संस्थानों में फायर एक्सटिंग्विशर समेत निर्धारित अग्निशमन उपकरण उपलब्ध रखना जरूरी होगा।
निर्धारित मानकों के अनुसार—
5,000 लीटर पानी का टैंक भूतल एवं प्रथम तल तक संचालित संस्थानों के लिए तथा 10,000 लीटर क्षमता का टैंक द्वितीय तल तक संचालित संस्थानों के लिए आवश्यक होगा।
इसके अलावा आपात स्थिति में विद्यार्थियों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए भवन के पीछे अथवा बगल में स्टील की इमरजेंसी सीढ़ी की व्यवस्था करनी होगी। परिसर में प्रवेश और निकास के लिए अलग-अलग द्वार रखने पर भी जोर दिया गया।
तहसील स्तर पर होंगी कार्यशालाएं
अपर जिलाधिकारी प्रशासन अंशिका दीक्षित ने बताया कि कोचिंग संचालकों को अग्निशमन एवं सुरक्षा मानकों की जानकारी देने के लिए तहसील स्तर पर कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी। इन कार्यशालाओं के माध्यम से संचालकों को निर्धारित मानकों और उनकी अनुपालन प्रक्रिया से अवगत कराया जाएगा।
बैठक के अंत में डीएम ने संबंधित अधिकारियों को नियमित निगरानी और निरीक्षण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने साफ किया कि मानकों की अनदेखी करने वाले संस्थानों के खिलाफ नियमानुसार तत्काल कार्रवाई की जाए।
बैठक में जिला विद्यालय निरीक्षक डी.के. सक्सेना, विभिन्न विभागों के अधिकारी और जिलेभर के कोचिंग संस्थानों के संचालक मौजूद रहे।
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