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बिजनौर BSA दफ्तर में ‘सुपर बाबू’ का राज: CDO का आदेश भी रद्दी के भाव!

‘सुपर बाबू’ राकेश पर BSA मेहरबान: CDO के आदेश दरकिनार, हल्दौर से ट्रांसफर के बिना BSA दफ्तर में जमाया ‘कब्जा’!

प्रतीकात्मक चित्र

रिपोर्ट: अवनीश त्यागी (एक्सक्लूसिव कवरेज – TargetTvLive)

खास खबर: जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) कार्यालय में नियमों को ताक पर रखकर चल रहे ‘सिंडिकेट’ की परतें अब तेजी से उधड़ने लगी हैं। TargetTvLive की इस विशेष रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि लगातार मिल रही शिकायतों के बावजूद मुख्य विकास अधिकारी (CDO) के सीधे निर्देशों की अनदेखी कर विवादित बाबू राकेश को कार्यालय में अभयदान दिया जा रहा है।

CDO के मौखिक आदेश भी बेअसर, 2 सप्ताह बाद भी नहीं हिला ‘राकेश बाबू’

विभागीय सूत्रों के अनुसार, विवादित बाबू राकेश के खिलाफ भ्रष्टाचार, लेन-देन और मनमानी की शिकायतों का संज्ञान लेते हुए मुख्य विकास अधिकारी (CDO) रण विजय सिंह ने कड़ा रुख अपनाया था।

  • स्पष्ट निर्देश: CDO ने BSA सचिन कसाना को मौखिक रूप से सख्त निर्देश दिए थे कि राकेश को तत्काल BSA कार्यालय से हटाकर किसी दूरस्थ विकासखंड (ब्लॉक) में तैनात किया जाए।
  • अड़ियल रवैया: CDO के आदेश जारी हुए 2 सप्ताह से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी अपने चहेते बाबू पर कार्रवाई करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं।

BSA की टालमटोल: “निदेशालय से लेंगे निर्देश”

जब इस संबंध में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी सचिन कसाना से बातचीत की गई, तो उनका जवाब हैरान करने वाला था। उन्होंने पल्ला झाड़ते हुए तर्क दिया कि:

“राकेश बाबू को किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरित करने या BSA कार्यालय से हटाने के संदर्भ में पहले राज्य निदेशालय स्तर से स्पष्ट निर्देश प्राप्त किए जाएंगे, जिसके बाद ही कोई निर्णय लिया जाएगा।”

इस जवाब ने प्रशासनिक गलियारों में नए सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों के निर्देशों को ठंडे बस्ते में डालकर निदेशालय का बहाना बनाना इस बात का सीधा संकेत है कि बाबू राकेश को ऊपरी स्तर से बड़ा संरक्षण प्राप्त है।

सबसे बड़ा सवाल: जब नियुक्ति ‘हल्दौर’ में, तो BSA दफ्तर पर कब्जा क्यों?

इस पूरे मामले का सबसे गंभीर और चौकाने वाला पहलू यह है कि राकेश बाबू की मूल नियुक्ति विकासखंड हल्दौर (Haldaur Block) में हुई है।

  1. अवैध संबद्धता: जब पदस्थापना ब्लॉक स्तर की है, तो किस नियम और किस सक्षम अधिकारी के आदेश पर उसे BSA कार्यालय की मलाईदार मेज पर बैठने की अनुमति दी गई?
  2. जांच का दायरा: हल्दौर से BSA दफ्तर में दी गई यह अवैध तैनाती अपने आप में एक स्वतंत्र और गंभीर जांच का विषय है।
  3. दोहरा चरित्र: एक तरफ निष्पक्षता का ढोल पीटा जाता है, दूसरी तरफ मूल तैनाती स्थल से इतर दफ्तर में बैठकर बाबू पूरे विभाग की डोर थामे हुए है।

‘वक्त का हर शह गुलाम…’ और ‘हाथी के दांत’

  • “वक्त से दिन और रात… वक्त का हर शै पे राज!” फिल्म का यह नगमा राकेश बाबू के दबदबे को बयां करता है। खुद फर्जी नियुक्ति के गंभीर आरोपों से घिरा होने और जांच फाइलों में दबने के बावजूद वह पूरे महकमे को चला रहा है।
  • वहीं, BSA सचिन कसाना का “ना काहू से दोस्ती, ना काहू से बैर” का दावा पूरी तरह “हाथी के दांत दिखाने के और, खाने के और” साबित हो रहा है। निरस्त की गई विवादित नियुक्तियां (जैसे DC ट्रेनिंग पद पर बुक सप्लायर मुकुल का मामला) और ‘डिस्पैच रजिस्टर’ के पन्ने चिल्ला-चिल्लाकर प्रशासनिक लीपापोती की गवाही दे रहे हैं।

रिपोर्ट: अवनीश त्यागी (एक्सक्लूसिव कवरेज – TargetTvLive)

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