बिजनौर में प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों पर प्रशासन का शिकंजा! नियम तोड़े तो होगी सख्त कार्रवाई, CDO ने जारी किए कड़े निर्देश
चीनी मिलों, डिस्टलरी और पेपर मिलों को चेतावनी, औद्योगिक अपशिष्ट और राख के निस्तारण में लापरवाही पड़ सकती है भारी
TargetTvLive | रिपोर्ट : अवनीश त्यागी
Highlights
- नियमों का उल्लंघन करने वाली औद्योगिक इकाइयों पर होगी कार्रवाई।
- चीनी मिलों, डिस्टलरी और पेपर उद्योगों को जारी हुए सख्त निर्देश।
- ईटीपी स्लज की वैज्ञानिक जांच कराना होगा अनिवार्य।
- औद्योगिक राख के निस्तारण का रखना होगा माहवार रिकॉर्ड।
- नदियों और जल स्रोतों में औद्योगिक अपशिष्ट छोड़ने पर होगी सख्त कार्रवाई।
- ऑनलाइन प्रदूषण मॉनिटरिंग सिस्टम अपनाने के निर्देश।
- पर्यावरण और जनस्वास्थ्य से समझौता नहीं करेगा प्रशासन।
बिजनौर, 30 जुलाई। जनपद बिजनौर में बढ़ते औद्योगिक प्रदूषण को लेकर जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपना लिया है। अब प्रदूषण नियंत्रण के नियमों की अनदेखी करने वाली औद्योगिक इकाइयों के खिलाफ कार्रवाई तय मानी जा रही है। मुख्य विकास अधिकारी रणविजय सिंह ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि चीनी मिलों, डिस्टलरी एवं पेपर उद्योगों को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सभी नियमों और अधिनियमों का शत-प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित करना होगा। किसी भी प्रकार की लापरवाही या नियमों के उल्लंघन पर संबंधित इकाई के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।
कलेक्ट्रेट स्थित महात्मा विदुर सभागार में आयोजित महत्वपूर्ण बैठक के दौरान प्रशासन ने औद्योगिक इकाइयों को पर्यावरण संरक्षण और जनस्वास्थ्य के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने के निर्देश दिए। बैठक में प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
प्रदूषण से प्रभावित होता है पूरा समाज
मुख्य विकास अधिकारी ने कहा कि औद्योगिक प्रदूषण केवल एक फैक्ट्री या उसके आसपास के क्षेत्र को प्रभावित नहीं करता, बल्कि इसका दुष्प्रभाव जल स्रोतों, पर्यावरण, कृषि भूमि और आमजन के स्वास्थ्य पर भी पड़ता है। इसलिए प्रत्येक औद्योगिक इकाई को प्रदूषण नियंत्रण मानकों का गंभीरता से पालन करना होगा।
उन्होंने कहा कि फैक्ट्रियों में स्थापित एफ्लूएंट ट्रीटमेंट प्लांट (ईटीपी) की नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाए तथा उससे निकलने वाले स्लज (औद्योगिक अपशिष्ट) की वैज्ञानिक जांच कराई जाए।
ईटीपी स्लज की होगी वैज्ञानिक जांच
बैठक में उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी गिरीश आर्य ने बताया कि ईटीपी से निकलने वाले स्लज की जांच अत्यंत आवश्यक है। इससे यह पता लगाया जा सकता है कि उसमें प्रदूषक तत्वों की मात्रा कितनी है और उसका निस्तारण किस प्रकार किया जाना चाहिए।
उन्होंने बताया कि कुछ औद्योगिक इकाइयां ईटीपी स्लज का अन्य कार्यों में भी उपयोग करती हैं। ऐसे में उसकी गुणवत्ता की जांच और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। यदि निर्धारित मानकों का पालन नहीं किया गया तो पर्यावरणीय नुकसान की संभावना बढ़ सकती है।
औद्योगिक राख के निस्तारण पर प्रशासन की पैनी नजर
प्रशासन ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाली राख (फ्लाई ऐश) का निस्तारण निर्धारित नियमों के अनुरूप किया जाए। इसके लिए प्रत्येक इकाई को माहवार वास्तविक रिकॉर्ड तैयार कर संबंधित विभाग को उपलब्ध कराना होगा।
बैठक में यह भी कहा गया कि राख के अनुचित निस्तारण से वायु प्रदूषण और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। इसलिए इसकी नियमित निगरानी की जाएगी।
नदियों में अपशिष्ट छोड़ने वालों पर रहेगी सख्त निगरानी
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों ने निर्देश दिए कि किसी भी परिस्थिति में औद्योगिक अपशिष्ट जल को नदियों, नालों अथवा अन्य जल स्रोतों में नहीं छोड़ा जाएगा। जल प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
औद्योगिक इकाइयों को यह भी निर्देशित किया गया कि वे ऑनलाइन प्रदूषण मॉनिटरिंग सिस्टम के माध्यम से अपने पर्यावरणीय प्रदर्शन का नियमित मूल्यांकन करें।
बॉयलरों की ऊंचाई भी होगी मानकों के अनुरूप
बैठक में डिस्टलरी एवं अन्य औद्योगिक इकाइयों में स्थापित बॉयलरों की ऊंचाई निर्धारित मानकों के अनुरूप रखने के निर्देश दिए गए। अधिकारियों ने कहा कि निर्धारित मानकों के अनुरूप तकनीकी व्यवस्थाएं अपनाना प्रत्येक उद्योग की जिम्मेदारी है।
बैठक में मौजूद रहे ये अधिकारी
बैठक में अपर जिलाधिकारी (प्रशासन), जनपद की विभिन्न चीनी मिलों, पेपर मिलों एवं डिस्टलरी इकाइयों के प्रबंधक एवं प्रभारी अधिकारी तथा संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
Hashtags
#BijnorNews #IndustrialPollution #UPNews #PollutionControl #Environment #TargetTvLive #LatestNews #IndustrialSafety












