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फिर शुरू हुआ संचारी रोग अभियान, लेकिन सबसे बड़ा सवाल—क्या इस बार सच में होगा फॉगिंग, लार्वा साइड का छिड़काव या फिर फाइलों में …?

फिर शुरू हुआ संचारी रोग नियंत्रण अभियान, लेकिन बड़ा सवाल—क्या इस बार फाइलों से निकलकर गांवों तक पहुंचेगी फॉगिंग?

 

रैली, शपथ और जागरूकता के बीच जमीनी अमल पर उठे सवाल, पिछले अभियानों की पुनरावृत्ति न हो इसकी चुनौती
अवनीश त्यागी। TargetTvLive

बिजनौर। बरसात के मौसम के साथ ही मच्छरजनित और अन्य संचारी रोगों का खतरा बढ़ने लगा है। इसी को देखते हुए बुधवार को बिजनौर में विशेष संचारी रोग नियंत्रण एवं दस्तक अभियान का शुभारंभ जिलाधिकारी जसजीत कौर ने कलेक्ट्रेट परिसर से किया। उन्होंने आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की जागरूकता रैली को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया तथा अधिकारियों, कर्मचारियों और स्वास्थ्य कर्मियों को स्वच्छता एवं संचारी रोग नियंत्रण की शपथ भी दिलाई।

जिलाधिकारी ने कहा कि संचारी रोगों की रोकथाम केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है, बल्कि इसमें जनसहभागिता, साफ-सफाई और समय पर उपचार की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने लोगों से अपने घर और आसपास स्वच्छ वातावरण बनाए रखने तथा बुखार से पीड़ित व्यक्ति को तत्काल सरकारी अस्पताल पहुंचाने की अपील की।

अभियान के शुभारंभ कार्यक्रम में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. कौशलेंद्र सिंह, जिला मलेरिया अधिकारी मंजूषा गुप्ता, जिला अर्थ एवं संख्या अधिकारी लक्ष्मी देवी सहित स्वास्थ्य विभाग, आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

हर साल की तरह शुरुआत उत्साहपूर्ण, लेकिन सवाल जमीनी अमल का

अभियान की शुरुआत भले ही रैली, शपथ और जनजागरूकता कार्यक्रमों के साथ हुई हो, लेकिन सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि क्या इस बार यह अभियान वास्तव में गांव-गांव तक प्रभावी रूप से पहुंचेगा?

पिछले वर्षों के अनुभव बताते हैं कि विशेष संचारी रोग नियंत्रण अभियान का अधिकांश हिस्सा उद्घाटन कार्यक्रमों, रैलियों और सरकारी बैठकों तक ही सीमित दिखाई दिया। ग्रामीण क्षेत्रों के अनेक लोगों का कहना रहा कि जहां नियमित फॉगिंग होनी चाहिए थी, वहां मशीनें शायद ही कभी पहुंचीं। लार्वीसाइड का छिड़काव भी कई स्थानों पर केवल सरकारी अभिलेखों तक सीमित रहने के आरोप लगते रहे हैं।

बजट खर्च, लेकिन असर कितना?

हर वर्ष इस अभियान पर सरकारी स्तर पर पर्याप्त बजट खर्च किया जाता है। फॉगिंग मशीनों का संचालन, एंटी-लार्वा दवा का छिड़काव, जलभराव वाले स्थानों की सफाई और स्वास्थ्य टीमों की सक्रियता जैसी व्यवस्थाएं कागजों में निर्धारित रहती हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर इनकी प्रभावशीलता अक्सर सवालों के घेरे में रही है।

यदि ग्रामीण इलाकों में समय पर फॉगिंग नहीं होगी, नालियों और जलभराव की सफाई नहीं होगी तथा लार्वा नष्ट करने की कार्रवाई नियमित नहीं होगी, तो केवल जागरूकता रैलियां संचारी रोगों पर प्रभावी नियंत्रण नहीं कर पाएंगी।

इस बार प्रशासन के सामने असली परीक्षा

विशेषज्ञों का मानना है कि संचारी रोग नियंत्रण अभियान की सफलता का पैमाना उद्घाटन समारोह नहीं, बल्कि गांवों और कस्बों में दिखाई देने वाला वास्तविक कार्य होगा। यदि प्रत्येक ग्राम पंचायत और नगर क्षेत्र में नियमित फॉगिंग, लार्वीसाइड छिड़काव, साफ-सफाई और स्वास्थ्य विभाग की निगरानी सुनिश्चित होती है, तभी इस अभियान का उद्देश्य पूरा माना जाएगा।

निष्कर्ष

बिजनौर में विशेष संचारी रोग नियंत्रण एवं दस्तक अभियान की शुरुआत हो चुकी है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि क्या इस बार प्रशासन पिछली कमियों से सबक लेकर अभियान को धरातल तक पहुंचाएगा या फिर यह भी पूर्व वर्षों की तरह रैली, शपथ और सरकारी फाइलों तक सीमित रह जाएगा। जनता को उम्मीद है कि इस बार अभियान केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि वास्तविक जनस्वास्थ्य अभियान साबित होगा।

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