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जेल के अंदर पहुंची न्याय की रोशनी, बंदियों को बताए गए उनके अधिकार और मुफ्त कानूनी सुविधाएं

जेल में बंद हैं, लेकिन वकील नहीं? बिजनौर में बंदियों के लिए बड़ी राहत, मुफ्त मिलेगी कानूनी मदद और अधिवक्ता

जिला कारागार बिजनौर में विधिक जागरूकता शिविर, बंदियों को बताए गए उनके अधिकार और न्याय पाने के आसान रास्ते
रिपोर्ट: अवनीश त्यागी | TargetTvLive

बिजनौर। न्याय केवल पैसे वालों का अधिकार नहीं है, बल्कि हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। इसी सोच को धरातल पर उतारते हुए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) बिजनौर ने जिला कारागार में विधिक जागरूकता शिविर आयोजित कर बंदियों को उनके कानूनी अधिकारों की जानकारी दी। शिविर में सबसे अहम बात यह रही कि जिन बंदियों के पास मुकदमे की पैरवी के लिए वकील नहीं है या जो आर्थिक तंगी के कारण अधिवक्ता नहीं कर पा रहे हैं, उन्हें सरकार की ओर से निःशुल्क कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के निर्देश पर आयोजित इस कार्यक्रम में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव स्वाति चंद्रा ने जेल का निरीक्षण किया और बंदियों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं।

“वकील नहीं है तो भी मिलेगा न्याय”

शिविर के दौरान सचिव स्वाति चंद्रा ने बंदियों को बताया कि यदि किसी की जमानत केवल इसलिए नहीं हो पा रही है क्योंकि उसके पास वकील नहीं है, तो उसे परेशान होने की जरूरत नहीं है। ऐसे बंदी जिला कारागार के माध्यम से जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को आवेदन देकर निःशुल्क अधिवक्ता की सुविधा प्राप्त कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि न्याय व्यवस्था का उद्देश्य किसी भी व्यक्ति को केवल आर्थिक कारणों से न्याय से वंचित होने देना नहीं है। इसलिए जरूरतमंद और पात्र व्यक्तियों को मुफ्त कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जाती है।

जेलों में जागरूकता क्यों है जरूरी?

देश की कई जेलों में ऐसे विचाराधीन बंदी हैं जो कानूनी जानकारी के अभाव में लंबे समय तक मुकदमों का सामना करते रहते हैं। कई बार उन्हें यह भी पता नहीं होता कि वे सरकारी योजनाओं के तहत मुफ्त कानूनी सहायता पाने के हकदार हैं।

ऐसे में बिजनौर में आयोजित यह शिविर केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि उन लोगों तक न्याय पहुंचाने का प्रयास है जो अक्सर व्यवस्था की जानकारी न होने के कारण पीछे रह जाते हैं।

बंदियों को दी गई महत्वपूर्ण जानकारी

शिविर में बंदियों को बताया गया कि—

✔ आर्थिक रूप से कमजोर व्यक्ति निःशुल्क कानूनी सहायता पाने के पात्र हैं।
✔ जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा मुफ्त अधिवक्ता उपलब्ध कराया जाता है।
✔ जमानत और मुकदमे से जुड़ी कानूनी प्रक्रियाओं में सहायता प्राप्त की जा सकती है।
✔ हर व्यक्ति को निष्पक्ष सुनवाई और न्याय पाने का अधिकार है।
✔ जेल से ही आवेदन कर कानूनी मदद प्राप्त की जा सकती है।

अधिकारियों ने भी बढ़ाया हौसला

कार्यक्रम में जेल अधीक्षक राजेश कुमार सिंह, चीफ लीगल एड डिफेंस काउंसिल प्रवीण सिंह देशवाल, डिप्टी चीफ नवीन कुमार राजपूत, असिस्टेंट लीगल एड डिफेंस काउंसिल कमाल अजीम, उप जेलर सुरेंद्र तथा निखिल निमेश सहित कई अधिकारी मौजूद रहे। सभी ने बंदियों को कानूनी सहायता योजनाओं का लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया।

TargetTvLive विश्लेषण

बिजनौर जिला कारागार में आयोजित यह पहल उन बंदियों के लिए उम्मीद की नई किरण बन सकती है जो केवल संसाधनों की कमी के कारण न्यायिक प्रक्रिया में पिछड़ जाते हैं। कानून की जानकारी और मुफ्त कानूनी सहायता का अधिकार कई लोगों की जिंदगी बदल सकता है। यही कारण है कि ऐसे जागरूकता शिविर न केवल कानूनी जानकारी देते हैं, बल्कि न्याय और मानवाधिकारों को मजबूत करने का भी काम करते हैं।

आज जब न्याय तक समान पहुंच की बात की जा रही है, तब बिजनौर में आयोजित यह शिविर इस दिशा में एक महत्वपूर्ण और सराहनीय कदम माना जा रहा है।

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