बिजनौर में किसानों का फूटा गुस्सा! भूसा, आवारा पशु और गन्ना भुगतान समेत 5 बड़े मुद्दों पर प्रशासन को चेतावनी
भारतीय किसान संघ ने सौंपा ज्ञापन, कहा— समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो बढ़ेगा किसानों का संकट
बिजनौर। खेतों में फसल बचाने की जंग, पशुओं के चारे की बढ़ती चिंता, सिंचाई के लिए पानी का इंतजार और गन्ने के बकाया भुगतान की मार झेल रहे किसानों की आवाज अब और बुलंद होती दिखाई दे रही है। जनपद बिजनौर के विकास खंड मोहम्मदपुर देवमल में भारतीय किसान संघ ने किसानों की ज्वलंत समस्याओं को लेकर प्रशासन के सामने मोर्चा खोल दिया है।
संघ के पदाधिकारियों ने गुरुवार को जिलाधिकारी को संबोधित ज्ञापन उपजिलाधिकारी बिजनौर को सौंपते हुए पांच महत्वपूर्ण मांगों पर तत्काल कार्रवाई की मांग की। किसान नेताओं का कहना है कि यदि इन समस्याओं का जल्द समाधान नहीं किया गया तो खेती-किसानी पर गहरा संकट खड़ा हो सकता है।
भूसा उद्योगों में नहीं, पशुओं के पेट में जाए
भारतीय किसान संघ ने ज्ञापन में कहा कि गेहूं का भूसा पशुधन के लिए जीवनरेखा है, लेकिन बड़ी मात्रा में इसका उपयोग औद्योगिक इकाइयों द्वारा किया जा रहा है। इससे बाजार में भूसे की उपलब्धता कम हो रही है और कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। इसका सीधा असर किसानों और पशुपालकों पर पड़ रहा है। संघ ने मांग की कि भूसे का उपयोग केवल पशुओं के चारे के रूप में सुनिश्चित किया जाए।
आवारा पशु बन रहे किसानों की सबसे बड़ी परेशानी
किसानों ने प्रशासन का ध्यान आवारा पशुओं की बढ़ती समस्या की ओर भी खींचा। उनका कहना है कि दिन-रात की मेहनत से तैयार की गई फसलें आवारा पशुओं के कारण बर्बाद हो रही हैं। कई किसान पूरी रात खेतों की रखवाली करने को मजबूर हैं, फिर भी नुकसान नहीं रुक रहा। संघ ने इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए ठोस और प्रभावी योजना लागू करने की मांग की है।
जल जीवन मिशन के अधूरे कार्यों पर उठे सवाल
ज्ञापन में जल जीवन मिशन के तहत चल रहे अधूरे कार्यों को लेकर भी नाराजगी जताई गई। किसान नेताओं का कहना है कि कई स्थानों पर योजनाएं अभी तक पूरी नहीं हो सकी हैं, जिससे ग्रामीणों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा। साथ ही खरीफ फसलों की तैयारी को देखते हुए समय पर नहरों में पानी छोड़े जाने की मांग भी उठाई गई है।
ओवरलोड वाहनों से बढ़ रहा खतरा
भारतीय किसान संघ ने जिले की सड़कों पर दौड़ रहे ओवरलोड और तेज रफ्तार वाहनों पर भी चिंता व्यक्त की। संघ का कहना है कि ऐसे वाहन सड़क दुर्घटनाओं का कारण बन रहे हैं और ग्रामीण सड़कों को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं। किसानों ने प्रशासन से ऐसे वाहनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
गन्ना भुगतान को लेकर फिर गरमाया मुद्दा
ज्ञापन का सबसे अहम मुद्दा बिलाई शुगर मिल पर किसानों का बकाया गन्ना भुगतान रहा। किसान नेताओं ने कहा कि महीनों से भुगतान लंबित होने के कारण किसान आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं। खेती के खर्च, बच्चों की पढ़ाई और घरेलू जरूरतों को पूरा करना मुश्किल होता जा रहा है। संघ ने प्रशासन से कठोर कार्रवाई कर किसानों का बकाया भुगतान जल्द दिलाने की मांग की है।
प्रशासन से जताया भरोसा, लेकिन समाधान की उम्मीद भी
भारतीय किसान संघ ने कहा कि संगठन को प्रशासन से पूरा विश्वास है कि किसानों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए शीघ्र प्रभावी कदम उठाए जाएंगे। संघ का मानना है कि खेती और किसान दोनों की सुरक्षा प्रदेश की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
ज्ञापन सौंपने वालों में खंड अध्यक्ष कमल चौधरी, खंड मंत्री सीमा त्यागी सहित संगठन के अन्य पदाधिकारी शामिल रहे। ज्ञापन की प्रतिलिपि प्रदेश एवं प्रांत कार्यालय को भी भेजी गई है।
किसानों की आवाज या आने वाले बड़े आंदोलन का संकेत?
राजनीतिक और कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि जिन मुद्दों को भारतीय किसान संघ ने उठाया है, वे केवल बिजनौर तक सीमित नहीं हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अधिकांश जिलों में किसान आवारा पशुओं, सिंचाई संकट और गन्ना भुगतान जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। यदि इन मुद्दों का समाधान समय रहते नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में किसान आंदोलन की आवाज और तेज हो सकती है।
रिपोर्ट: अवनीश त्यागी
TargetTvLive
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