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मासूम से दरिंदगी के बाद आधी रात चला बुल्डोजर, आरोपी का घर मिनटों में बना मलबा

अमरोहा में मासूम से दरिंदगी: आधी रात बुल्डोजर, फिर गिरफ्तारी; आखिर कैसे बेनकाब हुआ आरोपी? पढ़िए पूरी इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट

दलित बच्ची से हैवानियत के मामले में प्रशासन का बड़ा एक्शन, अवैध मकान ध्वस्त करने के बाद आरोपी गिरफ्तार; पूरे प्रदेश की नजर इस केस पर
रिपोर्ट: एम पी सिंह | TargetTvLive

अमरोहा। उत्तर प्रदेश के अमरोहा जनपद में आठ वर्षीय दलित मासूम बच्ची के साथ कथित दरिंदगी की घटना ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। इस मामले में जहां एक ओर प्रशासन ने आधी रात को आरोपी के अवैध निर्माण पर बुल्डोजर चलाकर सख्त संदेश दिया, वहीं दूसरी ओर पुलिस ने फरार चल रहे आरोपी को गिरफ्तार कर बड़ी सफलता हासिल की है।

घटना के बाद से पूरे इलाके में गुस्सा, आक्रोश और चिंता का माहौल बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि जिस बच्ची के हाथों में किताबें और खिलौने होने चाहिए थे, वह आज अस्पताल के बिस्तर पर जिंदगी की लड़ाई लड़ रही है।

क्या है पूरा मामला?

जानकारी के अनुसार अमरोहा के एक गांव में रहने वाली आठ वर्षीय दलित बच्ची के साथ पड़ोस में रहने वाले युवक पर गंभीर अपराध करने का आरोप लगा। घटना की जानकारी सामने आते ही परिजनों में कोहराम मच गया और पूरे गांव में तनाव का माहौल बन गया।

पीड़ित परिवार ने तत्काल पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद मामला तेजी से पुलिस और प्रशासन के उच्च अधिकारियों तक पहुंचा। बच्ची को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां चिकित्सकों की निगरानी में उसका इलाज जारी है।

पुलिस जांच में क्या सामने आया?

सूत्रों के अनुसार प्रारंभिक जांच में आरोपी की भूमिका संदिग्ध पाए जाने के बाद पुलिस ने उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), पॉक्सो एक्ट और एससी/एसटी एक्ट की गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया।

मामला दलित परिवार से जुड़ा होने और पीड़िता की कम उम्र को देखते हुए पुलिस ने इसे अत्यंत संवेदनशील श्रेणी में रखा। वरिष्ठ अधिकारियों ने जांच की निगरानी अपने स्तर से शुरू कर दी।

आधी रात क्यों चला बुल्डोजर?

घटना के बाद आरोपी फरार हो गया था। इस बीच प्रशासनिक जांच में आरोपी फरमान पुत्र अहमद अली निवासी मदारीपुर का मकान कथित रूप से अवैध निर्माण की श्रेणी में पाया गया।

इसके बाद देर रात प्रशासनिक टीम, राजस्व विभाग और भारी पुलिस बल की मौजूदगी में कार्रवाई की गई। बुल्डोजर की गड़गड़ाहट के बीच आरोपी का अवैध निर्माण ध्वस्त कर दिया गया।

स्थानीय लोगों के अनुसार कार्रवाई इतनी तेज गति से हुई कि कुछ ही समय में पूरा निर्माण मलबे में तब्दील हो गया। प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई नियमों और जांच रिपोर्ट के आधार पर की गई।

गिरफ्तारी तक कैसे पहुंची पुलिस?

आरोपी के फरार होने के बाद पुलिस की कई टीमें गठित की गईं। मोबाइल लोकेशन, संभावित संपर्कों और रिश्तेदारों के यहां लगातार दबिश दी गई। कई घंटों तक चले सर्च ऑपरेशन के बाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी से पूछताछ की जा रही है और मामले से जुड़े सभी तथ्यों को वैज्ञानिक एवं कानूनी तरीके से जांचा जा रहा है ताकि अदालत में मजबूत साक्ष्य प्रस्तुत किए जा सकें।

दलित परिवार में डर, गांव में गुस्सा

घटना के बाद पीड़ित परिवार सदमे में है। गांव के लोगों का कहना है कि ऐसे मामलों में केवल गिरफ्तारी ही पर्याप्त नहीं है बल्कि पीड़ित परिवार को सुरक्षा, आर्थिक सहायता और मनोवैज्ञानिक सहयोग भी मिलना चाहिए।

कई सामाजिक संगठनों ने भी प्रशासन से मांग की है कि मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में कराई जाए ताकि पीड़िता को जल्द न्याय मिल सके।

कानून व्यवस्था पर भी उठे सवाल

यह घटना एक बार फिर उन सवालों को सामने लाती है कि आखिर बच्चों के खिलाफ होने वाले जघन्य अपराधों को रोकने के लिए समाज और प्रशासन को और क्या कदम उठाने होंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल सख्त कानून पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि सामाजिक जागरूकता, पारिवारिक सतर्कता और त्वरित न्याय व्यवस्था भी उतनी ही जरूरी है।

TargetTvLive Investigation

इस पूरे प्रकरण में प्रशासन ने दो स्तरों पर कार्रवाई की—पहला, आरोपी के खिलाफ कठोर कानूनी धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया; दूसरा, अवैध निर्माण के खिलाफ बुल्डोजर कार्रवाई की गई। अब आरोपी की गिरफ्तारी के बाद मामले का केंद्र बिंदु न्यायिक प्रक्रिया बन गया है।

हालांकि सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न अब भी वही है—क्या पीड़ित बच्ची और उसके परिवार को शीघ्र न्याय मिल पाएगा?

प्रदेश भर की नजर इस केस पर टिकी हुई है। समाज चाहता है कि यह मामला केवल एक और अपराध बनकर फाइलों में न दब जाए, बल्कि ऐसा उदाहरण बने जिससे भविष्य में कोई भी मासूम इस तरह की दरिंदगी का शिकार न हो।

(नोट: पीड़िता की पहचान कानूनन गोपनीय है। पॉक्सो एक्ट और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार पीड़ित बच्ची की पहचान उजागर नहीं की जा सकती।)

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