बिजली विभाग पर गंभीर आरोप, सप्लाई शुरू होने से पहले ही चोरी हो गई लाखों की लाइन
पितलहेड़ी के किसान ने जमा कराया था पूरा एस्टीमेट, भाकियू ने कहा- जवाब मिलने तक नहीं हटेंगे धरने से
रिपोर्ट: अवनीश त्यागी | TargetTvLive
बिजनौर। अकबराबाद बिजलीघर क्षेत्र के गांव पितलहेड़ी में बिजली लाइन चोरी का मामला अब किसानों के आक्रोश का कारण बन गया है। भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) का अनिश्चितकालीन धरना शनिवार को लगातार दूसरे दिन भी जारी रहा। किसानों ने बिजली विभाग पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि यदि समय पर बिजली आपूर्ति शुरू कर दी जाती तो यह घटना कभी नहीं होती।
किसानों के अनुसार ग्राम पितलहेड़ी निवासी किसान मुनेंद्र सिंह काकरान ने अपने खेत तक बिजली पहुंचाने के लिए 460 मीटर लंबी 11 हजार वोल्ट की लाइन का पूरा एस्टीमेट विभाग में जमा कराया था। विभाग ने लाइन भी तैयार कर दी, लेकिन महीनों तक उसे चालू नहीं किया गया। किसान लगातार अधिकारियों के चक्कर लगाते रहे, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हुई।
तैयार लाइन से पहले ही गायब हो गया तार
किसानों का आरोप है कि जब लाइन पूरी तरह तैयार थी और केवल सप्लाई शुरू की जानी थी, तभी रात के अंधेरे में पूरी लाइन का तार चोरी हो गया। इस घटना ने किसानों को हैरान और परेशान कर दिया है। उनका कहना है कि जिस लाइन के लिए उन्होंने अपनी जेब से पैसा खर्च किया, वह बिजली मिलने से पहले ही गायब हो गई।
किसानों ने विभागीय भूमिका पर उठाए सवाल
धरनास्थल पर मौजूद किसानों ने सवाल उठाया कि जब लाइन तैयार थी तो उसे चालू करने में इतनी देरी क्यों की गई। किसानों का आरोप है कि विभागीय उदासीनता के कारण ही यह नुकसान हुआ है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
“बिजली दो या जवाब दो” के नारे के साथ जारी आंदोलन
भाकियू नेताओं ने साफ कहा कि जब तक नई लाइन डालकर बिजली आपूर्ति बहाल नहीं की जाती, तब तक धरना जारी रहेगा। किसानों का कहना है कि यह केवल एक किसान की समस्या नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के किसानों के सम्मान और अधिकारों का सवाल है।
बड़ी संख्या में जुटे किसान
धरने में जिला उपाध्यक्ष मुनेंद्र सिंह काकरान, ऋषिपाल सिंह, शुभम चौधरी, अतुल कुमार, शीशपाल सिंह, राजेंद्र कुमार, विपिन कुमार, राहुल कुमार सहित बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।
TargetTvLive विश्लेषण
यह मामला सिर्फ बिजली लाइन चोरी का नहीं, बल्कि किसानों की समस्याओं के प्रति विभागीय संवेदनशीलता का भी है। जब किसान निर्धारित शुल्क जमा कर सभी औपचारिकताएं पूरी कर चुके थे, तब बिजली आपूर्ति शुरू करने में हुई देरी कई सवाल खड़े करती है। अब देखना होगा कि प्रशासन किसानों की मांगों को कितनी गंभीरता से लेता है और दोषियों तक कब पहुंच पाता है।
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