बिजनौर में महिलाओं की सुरक्षा पर बड़ा संदेश: कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न कानून को लेकर चला जागरूकता अभियान
चांदपुर में विधिक सेवा प्राधिकरण की पहल, लौटते समय वृद्धाश्रम का औचक निरीक्षण भी चर्चा में
रिपोर्ट: अवनीश त्यागी | TargetTvLive
बिजनौर। महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान को लेकर सरकार एवं न्यायिक संस्थाओं की सक्रियता अब ज़मीनी स्तर पर तेज होती दिखाई दे रही है। बिजनौर के चांदपुर तहसील परिसर में शुक्रवार को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में “कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न (निषेध, प्रतिषेध एवं निवारण) अधिनियम-2013” को लेकर महिलाओं और आम लोगों को विस्तार से जानकारी दी गई।
यह कार्यक्रम केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं रहा, बल्कि महिलाओं को उनके अधिकारों और कानूनी सुरक्षा के प्रति जागरूक करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ। कार्यक्रम के बाद अधिकारियों द्वारा वृद्धाश्रम के औचक निरीक्षण ने भी प्रशासनिक सक्रियता का संदेश दिया।
महिलाओं को बताया गया—कानून कैसे देता है सुरक्षा
उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के निर्देश पर आयोजित इस कार्यक्रम का संचालन जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बिजनौर की सचिव सुश्री नैन्सी धुन्ना की अध्यक्षता में किया गया।
उन्होंने महिलाओं को संबोधित करते हुए बताया कि कार्यस्थल पर किसी भी प्रकार के यौन उत्पीड़न की शिकायत को कानून बेहद गंभीरता से लेता है। अधिनियम-2013 के तहत शिकायतकर्ता और आरोपी दोनों की पहचान गोपनीय रखी जाती है, ताकि पीड़िता सामाजिक दबाव या मानसिक उत्पीड़न का शिकार न हो।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि जांच समिति शिकायत को सही पाती है तो आरोपी कर्मचारी या अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी की जा सकती है।
क्यों अहम है यह कानून?
विशेषज्ञों के अनुसार आज भी बड़ी संख्या में महिलाएं कार्यस्थल पर मानसिक और सामाजिक दबाव के कारण शिकायत दर्ज नहीं करा पातीं। ऐसे में इस तरह के जागरूकता कार्यक्रम महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ाने और उन्हें कानूनी अधिकारों से परिचित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
यह अधिनियम महिलाओं को सुरक्षित, सम्मानजनक और भयमुक्त कार्य वातावरण देने के उद्देश्य से बनाया गया है। खास बात यह रही कि कार्यक्रम में महिलाओं के साथ-साथ बालिकाओं और पराविधिक स्वयंसेवकों की भी सक्रिय भागीदारी देखने को मिली।
वृद्धाश्रम का औचक निरीक्षण, व्यवस्थाओं का लिया जायजा
कार्यक्रम के बाद अधिकारियों ने विदुर कुटी दारानगर गंज स्थित वृद्धाश्रम का औचक निरीक्षण भी किया। निरीक्षण के दौरान केंद्र प्रभारी अनुपस्थित मिलीं, जिस पर प्रशासनिक स्तर पर सवाल खड़े हो सकते हैं।
हालांकि मौके पर मौजूद कर्मचारियों ने बताया कि वृद्धजनों के लिए भोजन, रहने की व्यवस्था, कपड़े और बिस्तर पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। अधिकारियों ने वृद्धजनों से सीधे बातचीत कर व्यवस्थाओं की जानकारी ली। वृद्धाश्रम में मौजूद बुजुर्गों ने किसी प्रकार की शिकायत नहीं की।
प्रशासनिक सक्रियता का दिखा दोहरा संदेश
एक ओर महिलाओं की सुरक्षा और कानूनी जागरूकता पर जोर, दूसरी ओर वृद्धाश्रम का औचक निरीक्षण—इन दोनों घटनाओं ने प्रशासन की सामाजिक सरोकारों के प्रति सक्रियता को उजागर किया है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि ऐसे कार्यक्रम लगातार ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों तक पहुंचें, तो महिलाओं के खिलाफ होने वाले उत्पीड़न के मामलों में कमी लाने और पीड़िताओं को न्याय दिलाने में बड़ी मदद मिल सकती है।
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बिजनौर में आयोजित यह कार्यक्रम केवल कानूनी जानकारी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि समाज में महिलाओं की गरिमा, सुरक्षा और बुजुर्गों के सम्मान को लेकर प्रशासनिक संवेदनशीलता का भी संदेश दे गया।
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