PM की अपील के बाद बिजनौर में बड़ा फैसला! अब नहीं बिकेगा बुलियन और गोल्ड बार? सर्राफा कारोबारियों ने लिया देशहित का संकल्प
विदेशी मुद्रा बचाने की कवायद या सोने के कारोबार पर असर? बिजनौर में प्रशासन और सर्राफा व्यापारियों की अहम बैठक
बिजनौर | TargetTvLive | अवनीश त्यागी
देश की मौजूदा अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और बढ़ते आर्थिक दबाव के बीच केंद्र और राज्य सरकार अब सोने की खरीद पर सामाजिक जागरूकता अभियान चलाने के मूड में दिखाई दे रही है। प्रधानमंत्री की अपील और मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद बिजनौर प्रशासन ने सर्राफा कारोबारियों के साथ बड़ी बैठक कर ऐसा संदेश दिया है, जिसकी चर्चा अब बाजार से लेकर सोशल मीडिया तक तेज हो गई है।
जिलाधिकारी कार्यालय बिजनौर में आयोजित इस अहम बैठक में प्रशासन ने सर्राफा व्यापारियों से “देशहित को सर्वोपरि” रखते हुए कुछ समय तक ठोस सोना यानी बुलियन और गोल्ड बार की बिक्री रोकने की अपील की। प्रशासन का मानना है कि इससे सोने के आयात में कमी आएगी और विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ रहा दबाव कम होगा।
क्या है पूरा मामला?
उपायुक्त (प्रशासन) राज्य कर बिजनौर संजय सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए प्रधानमंत्री द्वारा नागरिकों से अनावश्यक सोना खरीदने से बचने की अपील की गई है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री द्वारा सभी जिलाधिकारियों और पुलिस अधिकारियों को स्थानीय सर्राफा व्यापारियों के साथ बैठक कर जागरूकता बढ़ाने के निर्देश दिए गए।
16 मई 2026 को आयोजित इस बैठक में जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक ने साफ कहा कि आने वाले कुछ महीनों तक बुलियन और गोल्ड बार की बिक्री कम करना राष्ट्रीय आर्थिक हित में जरूरी कदम हो सकता है।
क्यों बढ़ी सरकार की चिंता?
भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना आयातक देशों में शामिल है। हर साल भारी मात्रा में सोना विदेशों से आयात किया जाता है, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार पर बड़ा असर पड़ता है। अंतरराष्ट्रीय तनाव और डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति को देखते हुए सरकार फिलहाल आयात पर दबाव कम करने की रणनीति पर काम करती दिखाई दे रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर लोग नए सोने की खरीद कम करें और पुराने आभूषणों को रिसाइकिल या रिडिजाइन करवाएं, तो इससे बाजार भी चलता रहेगा और विदेशी मुद्रा की बचत भी होगी।
प्रशासन की अपील: “पुराना सोना बनाइए नया”
बैठक में व्यापारियों और आम जनता से अपील की गई कि लोग पुराने स्वर्ण आभूषणों को रिसाइकिल कर नए डिजाइन में तैयार करवाएं। इससे नई खरीद की जरूरत कम होगी और स्थानीय ज्वैलरी उद्योग भी प्रभावित नहीं होगा।
प्रशासन ने मीडिया और सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों को जागरूक करने की भी बात कही।
सर्राफा व्यापारियों ने क्या कहा?
बैठक में मौजूद सर्राफा एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने प्रशासन को आश्वस्त किया कि वे सरकार के आह्वान के साथ हैं और देशहित में हर जरूरी सहयोग करेंगे।
बैठक में कपिल अग्रवाल सर्राफ (जिलाध्यक्ष), विष्णु अग्रवाल (महामंत्री), अक्षत अग्रवाल (मंत्री) सहित कई प्रमुख व्यापारी मौजूद रहे। राज्य कर विभाग के अधिकारियों ने भी बैठक में भाग लिया।
बाजार पर क्या पड़ेगा असर?
यदि आने वाले समय में बुलियन और गोल्ड बार की बिक्री वास्तव में सीमित होती है, तो इसका असर सीधे निवेश बाजार और सर्राफा कारोबार पर पड़ सकता है। हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि यह कदम अस्थायी रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।
दूसरी ओर, शादी-विवाह सीजन और पारंपरिक खरीदारी पर इसका कितना प्रभाव पड़ेगा, इस पर भी बाजार की नजर बनी हुई है।
सोशल मीडिया पर तेज हुई चर्चा
बिजनौर में हुई इस बैठक के बाद सोशल मीडिया पर भी बहस तेज हो गई है। कुछ लोग इसे देशहित में जरूरी कदम बता रहे हैं, तो कुछ इसे व्यापारिक गतिविधियों पर दबाव के रूप में देख रहे हैं। हालांकि प्रशासन ने साफ किया है कि फिलहाल यह जागरूकता और स्वैच्छिक सहयोग का अभियान है।
निष्कर्ष
बिजनौर में हुई यह बैठक सिर्फ स्थानीय प्रशासनिक कार्रवाई नहीं, बल्कि देश की आर्थिक रणनीति से जुड़ा बड़ा संकेत मानी जा रही है। आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि जनता और बाजार इस अपील को कितना समर्थन देते हैं।
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