गन्ना किसानों के लिए खुशखबरी! ₹15 में मिलेगा फेरोमेन ट्रैप, कीट पर बड़ा वार

अगोला बेधक कीट से बचाने को चीनी मिल का मेगा अभियान, पत्तियां तोड़ो और पाओ ₹2 प्रति पत्ती का भुगतान

चाँगीपुर/बिजनौर। गन्ना किसानों की मेहनत पर हर साल पानी फेरने वाले अगोला बेधक कीट के खिलाफ अब बिंदल शुगर मिल चाँगीपुर ने निर्णायक जंग छेड़ दी है। मिल प्रबंधन ने खेतों में बढ़ते कीट प्रकोप को देखते हुए किसानों के लिए ऐसा अभियान शुरू किया है, जिसकी पूरे क्षेत्र में जोरदार चर्चा हो रही है।
किसानों को अब न केवल कीट नियंत्रण की आधुनिक तकनीक दी जा रही है, बल्कि सीधे आर्थिक लाभ भी पहुंचाया जा रहा है। यही कारण है कि यह योजना किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय होती जा रही है।
मिल के वरिष्ठ महाप्रबंधक राहुल चौधरी ने बताया कि इस समय गन्ने की फसल अगोला बेधक कीट के सबसे बड़े खतरे से गुजर रही है। यदि समय रहते रोकथाम नहीं की गई तो किसानों की पूरी मेहनत पर असर पड़ सकता है। उन्होंने किसानों से अपील करते हुए कहा कि वे क्लोरेंट्रानीलीप्रोल (CTPR) 150 एमएल दवा को 400 लीटर पानी में घोलकर गन्ने की लाइन के पास जड़ों में ड्रेचिंग जरूर करें। इससे कीट पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि चूसक कीटों से फसल को बचाने के लिए किसान कीटनाशक और घुलनशील NPK का स्प्रे करें, ताकि गन्ना मजबूत हो और उत्पादन बेहतर मिले।
₹15 में मिलेगा फेरोमेन ट्रैप, किसानों में मची होड़
मुख्य गन्ना प्रबंधक इन्द्रवीर सिंह ने बताया कि चीनी मिल द्वारा जैविक और यांत्रिक नियंत्रण को बढ़ावा देने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत किसानों को 50 प्रतिशत अनुदान पर मात्र ₹15 में फेरोमेन ट्रैप दिए जा रहे हैं।
ये ट्रैप अगोला बेधक कीट को पकड़ने और उसके प्रकोप को कम करने में बेहद कारगर माने जाते हैं। खास बात यह है कि मिल प्रबंधन खेतों में कीट के अंड समूह वाली पत्तियां तोड़ने पर किसानों को ₹2 प्रति पत्ती के हिसाब से भुगतान भी कर रहा है।
ग्रामीण इलाकों में यह योजना चर्चा का बड़ा विषय बन गई है। किसान इसे “कम खर्च में ज्यादा फायदा” वाली योजना बता रहे हैं।
किसानों को राहत, उत्पादन बढ़ने की उम्मीद
क्षेत्रीय किसानों का कहना है कि हर साल कीट प्रकोप से गन्ने की फसल को भारी नुकसान होता था, लेकिन इस बार मिल प्रबंधन की सक्रियता से उम्मीद जगी है कि नुकसान कम होगा और उत्पादन बढ़ेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसान समय रहते यह उपाय अपनाते हैं तो गन्ने की गुणवत्ता और पैदावार दोनों में बड़ा सुधार हो सकता है। साथ ही रासायनिक दवाओं पर निर्भरता भी कम होगी।
खेती में बदल रही तस्वीर
बिंदल शुगर मिल का यह अभियान सिर्फ कीट नियंत्रण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह किसानों को आधुनिक खेती की ओर ले जाने की बड़ी पहल माना जा रहा है। खेतों में तकनीक, जागरूकता और आर्थिक सहयोग का यह मॉडल आने वाले समय में दूसरे क्षेत्रों के लिए भी उदाहरण बन सकता है।
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रिपोर्ट : अवनीश त्यागी
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