डिलीवरी बनी मौत का कारण! जच्चा-बच्चा की मौत के बाद नर्सिंग होम सीज
जच्चा-बच्चा की मौत से भड़का गुस्सा, प्रशासन ने मारा छापा, डॉक्टरों और स्टाफ से घंटों पूछताछ
हाथरस : एक निजी नर्सिंग होम की कथित लापरवाही ने एक परिवार की खुशियां मातम में बदल दीं। प्रसव के लिए भर्ती कराई गई महिला और उसके नवजात बच्चे की मौत के बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। मामला आगरा-अलीगढ़ रोड स्थित पुरानी सब्जी मंडी के सामने संचालित नवज्योति नर्सिंग होम का है, जहां सात मई को उपचार के दौरान जच्चा-बच्चा दोनों ने दम तोड़ दिया।
घटना के बाद परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा। अस्पताल परिसर में चीख-पुकार और अफरा-तफरी का माहौल बन गया। लोगों ने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए। मामला बढ़ता देख प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीम पुलिस फोर्स के साथ मौके पर पहुंच गई।
सीडीओ, एसडीएम और स्वास्थ्य विभाग ने संभाला मोर्चा
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य विकास अधिकारी पी.एन. दीक्षित, एसडीएम नीरज शर्मा, एसीएमओ डॉ. राजीव गुप्ता और एमओआईसी डॉ. पंकज सिंह ने मौके पर पहुंचकर अस्पताल की जांच शुरू कर दी। अधिकारियों ने अस्पताल के हर कमरे, प्रसव कक्ष और रिकॉर्ड की बारीकी से जांच की।
जांच टीम ने अस्पताल का पंजीकरण, डॉक्टरों की डिग्री, इलाज से जुड़े दस्तावेज और प्रसव के दौरान अपनाई गई चिकित्सा प्रक्रिया की जानकारी कब्जे में ले ली। मौके पर मौजूद डॉक्टरों, नर्सों और स्टाफ से घंटों पूछताछ की गई। प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए नर्सिंग होम को सीज कर दिया।
क्या बिना तैयारी के चल रहा था अस्पताल?
अब सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि आखिर जिस अस्पताल में प्रसव जैसी गंभीर प्रक्रिया की जा रही थी, वहां जरूरी सुविधाएं थीं भी या नहीं? क्या वहां विशेषज्ञ डॉक्टर मौजूद थे? क्या इमरजेंसी हालात से निपटने की व्यवस्था थी? जांच टीम इन्हीं सवालों के जवाब तलाश रही है।
सूत्रों की मानें तो स्वास्थ्य विभाग अस्पताल में उपलब्ध उपकरणों, दवाओं और स्टाफ की योग्यता तक की जांच कर रहा है। यदि जांच में गड़बड़ी मिली तो अस्पताल संचालकों और जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई तय मानी जा रही है।
जिले के अवैध अस्पतालों में मचा डर
नवज्योति नर्सिंग होम पर हुई कार्रवाई के बाद जिलेभर के निजी अस्पतालों और बिना मान्यता चल रहे क्लीनिक संचालकों में दहशत फैल गई है। स्वास्थ्य विभाग अब ऐसे अस्पतालों की सूची तैयार कर रहा है जो नियमों को ताक पर रखकर मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जिले में कई छोटे नर्सिंग होम बिना पर्याप्त संसाधनों और विशेषज्ञ डॉक्टरों के संचालित हो रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग समय रहते कार्रवाई नहीं करता। यही वजह है कि आए दिन इलाज में लापरवाही और मौतों के मामले सामने आते रहते हैं।
सवालों के घेरे में स्वास्थ्य व्यवस्था
एक मां और मासूम की मौत ने जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोल दी है। लोगों के मन में सवाल है कि आखिर कब तक निजी अस्पतालों की लापरवाही गरीब और आम परिवारों की जान लेती रहेगी? क्या प्रशासन की यह कार्रवाई केवल कुछ दिनों की सख्ती बनकर रह जाएगी या दोषियों पर वास्तव में बड़ी कार्रवाई होगी?
फिलहाल जांच जारी है और पूरे मामले पर प्रशासन की नजर बनी हुई है।
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