दीपक के बाद अरुण… बिजनौर जेल में दूसरी मौत ने बढ़ाई प्रशासन की मुश्किलें
“जेल में बंद हैं या मौत के साए में?” लगातार दूसरी घटना से मचा हड़कंप, प्रशासन पर लापरवाही के आरोप तेज
रिपोर्ट: अवनीश त्यागी | TargetTvLive
बिजनौर। जिला कारागार बिजनौर एक बार फिर सवालों के घेरे में है। जेल के भीतर लगातार हो रही मौतों ने न सिर्फ प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि आम लोगों के मन में भी डर और आक्रोश पैदा कर दिया है। अभी 10 मई को बंदी दीपक की संदिग्ध परिस्थितियों में फांसी लगने की घटना का मामला शांत भी नहीं हुआ था कि शनिवार सुबह जेल से एक और दर्दनाक खबर सामने आ गई। मेरठ निवासी बंदी अरुण कुमार की अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद जिला अस्पताल में मौत हो गई।
लगातार 7 दिन के भीतर दो बंदियों की मौत ने जिला कारागार की व्यवस्थाओं को कटघरे में खड़ा कर दिया है। अब सवाल उठने लगे हैं कि आखिर जेल के अंदर ऐसा क्या हो रहा है, जिससे बंदियों की जान पर बन आ रही है?
चोरी के आरोप में बंद था अरुण कुमार
जानकारी के अनुसार मेरठ के शास्त्री नगर निवासी 45 वर्षीय अरुण कुमार पुत्र बृजकिशोर को चोरी के एक मामले में 13 अप्रैल 2026 को बिजनौर कोतवाली पुलिस ने जेल भेजा था। वह जिला कारागार की बैरक नंबर-2 में बंद था।
शनिवार सुबह उसने रोजाना की तरह नाश्ता किया, लेकिन कुछ ही देर बाद अचानक बेचैनी और घबराहट की शिकायत करने लगा। साथी बंदियों ने जब उसकी हालत बिगड़ती देखी तो जेल प्रशासन को सूचना दी।
जेल अस्पताल से जिला अस्पताल तक… लेकिन नहीं बच सकी जान
जेल प्रशासन आनन-फानन में अरुण कुमार को जेल अस्पताल लेकर पहुंचा, जहां डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार शुरू किया। लेकिन हालत लगातार गंभीर होती गई। इसके बाद उसे जिला अस्पताल रेफर किया गया।
डॉक्टरों ने काफी प्रयास किए, मगर जिंदगी की जंग हारते हुए अरुण कुमार ने दम तोड़ दिया। मौत की खबर मिलते ही जेल प्रशासन और पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया।
शहर कोतवाली पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। वहीं परिवार में मातम पसरा हुआ है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
10 मई को भी हुई थी संदिग्ध मौत
गौरतलब है कि महज सात दिन पहले ही जिला कारागार के मेडिकल वार्ड के पीछे आम के पेड़ पर बंदी दीपक का शव लटका मिला था। उस मामले में भी परिजनों ने हत्या की आशंका जताई थी और सड़कों पर जाम लगाकर जोरदार प्रदर्शन किया था।
अब दूसरी मौत ने जेल प्रशासन की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि आखिर इतनी बड़ी घटनाएं बार-बार कैसे हो रही हैं?
जेल अधीक्षिका ने नहीं उठाया फोन, बढ़े सवाल
घटना के बाद जब मीडिया ने जेल अधीक्षिका श्रीमती अदिति श्रीवास्तव से संपर्क करने की कोशिश की तो उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। इससे प्रशासन की कार्यशैली पर और सवाल खड़े हो गए।
हालांकि जेलर रविंद्र नाथ सिंह ने बंदी की मौत की पुष्टि करते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया मौत हार्ट अटैक से प्रतीत हो रही है।
ASP बोले- पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद होगा बड़ा खुलासा
अपर पुलिस अधीक्षक नगर डॉ. कृष्ण गोपाल सिंह ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारण स्पष्ट हो पाएंगे। फिलहाल मामले की जांच जारी है।
बड़ा सवाल
क्या जिला कारागार में बंदियों की जान सुरक्षित नहीं?
आखिर जेल के अंदर क्यों बढ़ रही हैं मौतें?
स्वास्थ्य व्यवस्था कमजोर या प्रशासनिक लापरवाही?
7 दिन में दो मौतें… क्या यह महज संयोग है?
इन सवालों के जवाब अब प्रशासन को देने होंगे। क्योंकि लगातार हो रही घटनाओं ने जिला कारागार बिजनौर की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
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